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UP election 2022: उन्नाव के पुरवा में काम नहीं आई मोदी लहर, कभी नहीं खिला कमल, 25 सालों से कांग्रेस-सपा का कब्जा
Wed, 19 Jan 2022 05:25 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 19 Jan 2022 05:25 PM IST
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उन्नाव का पुरवा
- फोटो : amar ujala
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राजधानी लखनऊ और रायबरेली की सीमा से सटा पुरवा विधानसभा क्षेत्र भाजपा के लिए चुनौती बना है। अब तक 17 चुनाव हो चुके हैं लेकिन भाजपा का जीत का खाता नहीं खुला है। 2017 में जब जिले की पांच सीटों पर भगवा फहराया तो पुरवा ही एकमात्र सीट थी जिस पर बसपा ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी भाजपा के लिए यहां कमल खिलाने की बड़ी चुनौती है।
कभी पुरवा विधानसभा सीट कांग्रेस व सपा के लिए सुरक्षित मानी जाती थी। यहां की जनता ने इन दोनों पार्टियों को बराबर-बराबर मौका दिया। दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को पांच-पांच बार जिताकर विधानसभा भेजा। कांग्रेस और सपा ने 25-25 साल तक इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा। बीच के कुछ चुनावों में निर्दलीय और जनता दल ने कब्जा किया।
भाजपा एक जीत दर्ज करने के लिए तरस गई। हालांकि पार्टी कई चुनाव में रनर रहीं लेकिन जीत का आंकड़ा नहीं छू पाई। 2017 में भाजपा की लहर में भी बसपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे अनिल सिंह ने यहां पर जीत का परचम लहराया था। हालांकि वर्तमान समय में अनिल भाजपा में हैं।
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सपा का रहा पांच बार लगातार कब्जा
1993 में सपा ने पुरवा विधानसभा सीट पर जीत का सिलसिला शुरू किया था। इसके बाद पार्टी ने लगातार पांच चुनावों में जीत की हैट्रिक लगाई। शायद इसी कारण पुरवा सीट सपा के लिए सबसे मजबूत सीटों में शुमार मानी जाती है। सपा मुखिया मुलायम सिंह विधानसभा चुनाव में अपनी पहली चुनावी रैली की शुरुआत यहीं से करते रहे हैं। यह बात अलग है कि पुरवा को कभी कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई।
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कभी पुरवा विधानसभा सीट कांग्रेस व सपा के लिए सुरक्षित मानी जाती थी। यहां की जनता ने इन दोनों पार्टियों को बराबर-बराबर मौका दिया। दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों को पांच-पांच बार जिताकर विधानसभा भेजा। कांग्रेस और सपा ने 25-25 साल तक इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा। बीच के कुछ चुनावों में निर्दलीय और जनता दल ने कब्जा किया।
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भाजपा एक जीत दर्ज करने के लिए तरस गई। हालांकि पार्टी कई चुनाव में रनर रहीं लेकिन जीत का आंकड़ा नहीं छू पाई। 2017 में भाजपा की लहर में भी बसपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे अनिल सिंह ने यहां पर जीत का परचम लहराया था। हालांकि वर्तमान समय में अनिल भाजपा में हैं।
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सपा का रहा पांच बार लगातार कब्जा
1993 में सपा ने पुरवा विधानसभा सीट पर जीत का सिलसिला शुरू किया था। इसके बाद पार्टी ने लगातार पांच चुनावों में जीत की हैट्रिक लगाई। शायद इसी कारण पुरवा सीट सपा के लिए सबसे मजबूत सीटों में शुमार मानी जाती है। सपा मुखिया मुलायम सिंह विधानसभा चुनाव में अपनी पहली चुनावी रैली की शुरुआत यहीं से करते रहे हैं। यह बात अलग है कि पुरवा को कभी कैबिनेट में जगह नहीं मिल पाई।
विधानसभा अध्यक्ष निर्दलीय जीते थे
वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष और भगवंतनगर से भाजपा विधायक हृदय नारायण दीक्षित ने वर्ष 1985 में निर्दलीय जीत दर्ज की थी। इससे पहले वर्ष 1957 में परमेश्वरदीन वर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। पुरवा विधानसभा क्षेत्र के लउवासिंहखेड़ा ग्राम पंचायत ने इस विधानसभा को आठ बार विधायक भी दिया। इनमें हृदय नारायण दीक्षित और उदयराज यादव चार बार विधायक चुने गए।
25 साल तक कांग्रेस ने भी किया राज
इस सीट पर कभी 25 साल तक राज करने वाली कांग्रेस को विकास और जनता की अनदेखी भारी पड़ी। नतीजा यह हुआ कि क्षेत्र की जनता ने कांग्रेस को सिरे से नकार दिया। हालत यह हुई कि 1985 से कांग्रेस जीतना तो दूर मुख्य मुकाबले में भी कभी नहीं आई।
अब तक के विधायक
वर्ष विधायक दल
1951 रामधीन सिंह कांग्रेस
1957 परमेश्वरदीन वर्मा निर्दलीय
1962 रामाधीन सिंह कांग्रेस
1967 लाखन भारतीय जनसंघ
1969 दुलारेलाल कांग्रेस
1974 गया सिंह कांग्रेस
1977 चंद्रभूषण जनता पार्टी
1980 गया सिंह कांग्रेस
1985 हृदय नारायण दीक्षित निर्दलीय
1989 हृदय नारायण दीक्षित जनता दल
1991 हृदय नारायण दीक्षित जनता पार्टी
1993 हृदय नारायण दीक्षित सपा
1996 उदयराज यादव सपा
2002 उदयराज यादव सपा
2007 उदयराज यादव सपा
2012 उदयराज यादव सपा
2017 अनिल सिंह बसपा
वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष और भगवंतनगर से भाजपा विधायक हृदय नारायण दीक्षित ने वर्ष 1985 में निर्दलीय जीत दर्ज की थी। इससे पहले वर्ष 1957 में परमेश्वरदीन वर्मा ने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। पुरवा विधानसभा क्षेत्र के लउवासिंहखेड़ा ग्राम पंचायत ने इस विधानसभा को आठ बार विधायक भी दिया। इनमें हृदय नारायण दीक्षित और उदयराज यादव चार बार विधायक चुने गए।
25 साल तक कांग्रेस ने भी किया राज
इस सीट पर कभी 25 साल तक राज करने वाली कांग्रेस को विकास और जनता की अनदेखी भारी पड़ी। नतीजा यह हुआ कि क्षेत्र की जनता ने कांग्रेस को सिरे से नकार दिया। हालत यह हुई कि 1985 से कांग्रेस जीतना तो दूर मुख्य मुकाबले में भी कभी नहीं आई।
अब तक के विधायक
वर्ष विधायक दल
1951 रामधीन सिंह कांग्रेस
1957 परमेश्वरदीन वर्मा निर्दलीय
1962 रामाधीन सिंह कांग्रेस
1967 लाखन भारतीय जनसंघ
1969 दुलारेलाल कांग्रेस
1974 गया सिंह कांग्रेस
1977 चंद्रभूषण जनता पार्टी
1980 गया सिंह कांग्रेस
1985 हृदय नारायण दीक्षित निर्दलीय
1989 हृदय नारायण दीक्षित जनता दल
1991 हृदय नारायण दीक्षित जनता पार्टी
1993 हृदय नारायण दीक्षित सपा
1996 उदयराज यादव सपा
2002 उदयराज यादव सपा
2007 उदयराज यादव सपा
2012 उदयराज यादव सपा
2017 अनिल सिंह बसपा