चाैथे चरण से पहले प्रत्याशियाें ने छाेड़े ब्रहमास्त्र, एेसे कर रहे वाेटाें का जुगाड़
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आचार संहिता लागू होने के 51वें दिन यानी गुरुवार को प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो जाएंगी। प्रचार थमने के बाद सभी प्रत्याशियों में घर-घर दौड़ की होड़ है। भाजपा, बसपा और सपा-कांग्रेस एक-दूसरे के वोट बैंक में सेंध लगाने की सियासत रच रहे हैं। भाजपा भीम एप के जरिए दलितों को रिझा रहे हैं तो बसपा अपना परंपरागत वोटबैंक बताकर साधने की कोशिश में हैं। सपा-कांग्रेस यादव और मुस्लिमों को पाले में लाने की कोशिश में है।
इसके अलावा भी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। प्रमुख दलों के प्रत्याशी प्रधान, ब्लाक प्रमुख, बीडीसी और डीडीसी के जरिए भी वोटबैंक तक पहुंचने का रास्ता अपना रहे हैं। साम, दाम, दंड, भेद की सियासत भी गर्माई है। प्रशासन की घेरेबंदी प्रत्याशियों के सिस्टम के आगे बौनी साबित हुई। चुनाव प्रचार थमने के बाद गुपचुप ढंग से पार्टियां का सिलसिला चला। शराब के जाम टकराए तो दावतों के दौर चलते रहे।