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UP: कोबरा और करैत ने 16 महीनों में 418 लोगों को डंसा, दो सांप ही कटखने हैं कानपुर और आसपास के जिलों में
Mon, 25 Aug 2025 12:11 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 25 Aug 2025 12:11 PM IST
सार
विशेषज्ञों ने बताया कि कोबरा और करैत दोनों का जहर न्यूरो टॉक्सिक होता है लेकिन तेज असर करैत का करता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कोबरा सांप लोगों को अधिक डंस रहा है। हैलट की इमरजेंसी में सबसे अधिक रोगी कोबरा का शिकार हुए आते हैं। दूसरे नंबर पर साइलेंट किलर कहे जाने वाले करैत सांप के काटे हुए रोगी आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कानपुर नगर आसपास के जिलों में यही दोनों सांप अधिक सक्रिय होते हैं। जुलाई-अगस्त के महीने में स्नैक बाइट के रोगियों की संख्या सबसे अधिक हो जाती है।
हैलट अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के महीने में 59 रोगी सांप काटने के आए हैं। अगस्त के महीने में औसत चार रोगी स्नैक बाइट के आ रहे हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि 60 फीसदी रोगी कोबरा और 40 फीसदी करैत के काटने के होते हैं। साल में एक-दो मामले रसल वाइपर के आ जाते हैं। करैत का शिकार रोगियों की हालत अधिक गंभीर हो जाती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि कोबरा और करैत दोनों का जहर न्यूरो टॉक्सिक होता है लेकिन तेज असर करैत का करता है। हैलट के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि जुलाई, अगस्त, सितंबर में सांप काटने के सबसे अधिक मामले आते हैं। अप्रैल वर्ष 2024 से जुलाई वर्ष 2025 तक 418 केस आए हैं।
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हैलट अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के महीने में 59 रोगी सांप काटने के आए हैं। अगस्त के महीने में औसत चार रोगी स्नैक बाइट के आ रहे हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि 60 फीसदी रोगी कोबरा और 40 फीसदी करैत के काटने के होते हैं। साल में एक-दो मामले रसल वाइपर के आ जाते हैं। करैत का शिकार रोगियों की हालत अधिक गंभीर हो जाती है।
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विशेषज्ञों ने बताया कि कोबरा और करैत दोनों का जहर न्यूरो टॉक्सिक होता है लेकिन तेज असर करैत का करता है। हैलट के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनसी त्रिपाठी ने बताया कि जुलाई, अगस्त, सितंबर में सांप काटने के सबसे अधिक मामले आते हैं। अप्रैल वर्ष 2024 से जुलाई वर्ष 2025 तक 418 केस आए हैं।
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कोबरा की पहचान
- इसके काटने पर जख्म में तेज जलन और दर्द होता
- इसका जहर न्यूरो टॉक्सिक होता है
- यह सांप ज्यादातर दिन में काटता है
- जहर के असर से मांसपेशियों के जंक्शन ब्लॉक होने लगते हैं
- रोगी की पलकें गिरने लगती हैं, हाथ-पैर सुन्न, सांस में तकलीफ होती है
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- इसका जहर न्यूरो टॉक्सिक होता है
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- रोगी की पलकें गिरने लगती हैं, हाथ-पैर सुन्न, सांस में तकलीफ होती है
करैत की पहचान
- इसके काटने पर दर्द नहीं होता
- यह सांप रात में काटता है
- सोते व्यक्ति के शरीर की गर्मी से आकर्षित होता है
- जहर न्यूरो टॉक्सिक है लेकिन कोबरा से तेज असर करता है
- इसे साइलेंट किलर कहते हैं, इसके काटने से मौत सबसे अधिक होती हैं
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- यह सांप रात में काटता है
- सोते व्यक्ति के शरीर की गर्मी से आकर्षित होता है
- जहर न्यूरो टॉक्सिक है लेकिन कोबरा से तेज असर करता है
- इसे साइलेंट किलर कहते हैं, इसके काटने से मौत सबसे अधिक होती हैं
रसल वाइपर की पहचान
- इसका जहर हीमोटॉक्सिक होता है
- रोगी के नाक और मुंह से खून आने लगता है
- इसके जहर के असर से गुर्दे फेल हो जाते हैं
- मस्तिष्क और हृदय में खून के थक्के जम जाते हैं
- शरीर में जहां काटता है दर्द और सूजन होती है।
- इसका जहर हीमोटॉक्सिक होता है
- रोगी के नाक और मुंह से खून आने लगता है
- इसके जहर के असर से गुर्दे फेल हो जाते हैं
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- शरीर में जहां काटता है दर्द और सूजन होती है।