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विधायक पक्ष पर हत्या करने का झूठा प्रार्थनापत्र देने के मुकदमे में दुष्कर्म पीड़िता के चाचा को जमानत
Mon, 30 Sep 2019 11:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
यूपी डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 30 Sep 2019 11:29 PM IST
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भारी सुरक्षा के बीच उन्नाव कोर्ट पहुंचा दुष्कर्म पीड़िता का चाचा
- फोटो : अमर उजाला
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उन्नाव कांड में सीबीआई के एक गवाह की मौत के बाद विधायक पक्ष पर हत्या किए जाने का झूठा प्रार्थनापत्र देने के मुकदमे में दुष्कर्म पीड़िता के चाचा को अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ ने सोमवार को सुनवाई के बाद जमानत दे दी।
दुष्कर्म पीड़िता के पिता से हुई मारपीट की घटना में सीबीआई के गवाह की 20 अगस्त 2018 को मौत हो गई थी। गवाह की मौत बाद चाचा ने आरोपी विधायक पक्ष पर हत्या करने का शक जताते हुए पुलिस को प्रार्थनापत्र दिया थ।
जबकि मृतक की पत्नी ने बीमारी से मौत होने की बात कही थी। मामला तूल पकड़ा तो पुलिस ने शव को कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया था। इसके बाद मृतक के भाई ने पीड़िता के चाचा पर झूठा प्रार्थना पत्र देने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। अपर सत्र न्यायधीश चतुर्थ अरविंद उपाध्याय ने सुनवाई करते हुए सोमवार को आरोपी चाचा के वकील अजेंद्र अवस्थी, अशोक द्विवेदी व सहायक अधिवक्ता विमल यादव की दलीलों को सुनने के बाद जमानत मंजूर की। न्यायाधीश ने शर्त लगाई कि रिहा होने पर वह गवाह और सबूत को प्रभावित नहीं करेंगे। न्यायधीश ने आगे इस मामले में आरोपी चाचा को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में हाजिर रहने के निर्देश दिए हैं।
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दुष्कर्म पीड़िता के पिता से हुई मारपीट की घटना में सीबीआई के गवाह की 20 अगस्त 2018 को मौत हो गई थी। गवाह की मौत बाद चाचा ने आरोपी विधायक पक्ष पर हत्या करने का शक जताते हुए पुलिस को प्रार्थनापत्र दिया थ।
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जबकि मृतक की पत्नी ने बीमारी से मौत होने की बात कही थी। मामला तूल पकड़ा तो पुलिस ने शव को कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया था। इसके बाद मृतक के भाई ने पीड़िता के चाचा पर झूठा प्रार्थना पत्र देने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। अपर सत्र न्यायधीश चतुर्थ अरविंद उपाध्याय ने सुनवाई करते हुए सोमवार को आरोपी चाचा के वकील अजेंद्र अवस्थी, अशोक द्विवेदी व सहायक अधिवक्ता विमल यादव की दलीलों को सुनने के बाद जमानत मंजूर की। न्यायाधीश ने शर्त लगाई कि रिहा होने पर वह गवाह और सबूत को प्रभावित नहीं करेंगे। न्यायधीश ने आगे इस मामले में आरोपी चाचा को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में हाजिर रहने के निर्देश दिए हैं।