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कन्नौज के फूल-पौधों से सुगंधित तेल और इत्र निकालने की कला से तमिलनाडु में दूर होगी बेरोजगारी
Wed, 28 Aug 2019 02:23 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 28 Aug 2019 02:23 AM IST
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तमिलनाडु से आया प्रतिनिधि मंडल
- फोटो : अमर उजाला
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फूल-पौधों से सुगंधित तेल और इत्र निकालने के लिए मशहूर कन्नौज अब दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में बेरोजगारी दूर करेगा। एफएफडीसी की मदद से चंदन के गढ़ में बेरोजगारों व कारोबारियों को नया बाजार भी मुहैया कराया जाएगा।
इसके लिए सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) में तमिलनाडु से आए 35 जिला उद्योग और जिला उद्यान अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार से शुरू हुआ। तमिलनाडु सरकार की ओर से एफएफडीसी में 35 जिला उद्योग अधिकारियों और जिला उद्यान अधिकारियों का दल एफएफडीसी भेजा गया है।
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इसके लिए सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) में तमिलनाडु से आए 35 जिला उद्योग और जिला उद्यान अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार से शुरू हुआ। तमिलनाडु सरकार की ओर से एफएफडीसी में 35 जिला उद्योग अधिकारियों और जिला उद्यान अधिकारियों का दल एफएफडीसी भेजा गया है।
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दल को एफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने औषधीय पौधों से तेल और फूलों से इत्र बनाने की सरल विधि बताई। इसके साथ ही जिलेनियम, पान मसाला में इस्तेमाल होने वाले पचौली व लेमन ग्रास का तेल निकालने के बारे में भी बताया।
प्रधान निदेशक ने बताया कि तमिलनाडु में बड़ी संख्या में चंदन के पेड़ पाए जाते हैं। इससे वहां बड़े पैमाने पर इत्र कारोबार किया जा सकता है। इस मंशा से तमिलनाडु सरकार ने इत्र बनाने की विधि सीखने के लिए प्रतिनिधि मंडल भेजा है। दो दिवसीय प्रशिक्षण के बाद इन्हें रवाना किया जाएगा। इसके बाद यह तमिलनाडु के जिले में बेरोजगारों व कारोबारियों को इत्र बनाने का प्रशिक्षण देने के साथ सुगंध व्यापार के प्रति लोगों को प्रेरित करेंगे।
प्रधान निदेशक ने बताया कि तमिलनाडु में बड़ी संख्या में चंदन के पेड़ पाए जाते हैं। इससे वहां बड़े पैमाने पर इत्र कारोबार किया जा सकता है। इस मंशा से तमिलनाडु सरकार ने इत्र बनाने की विधि सीखने के लिए प्रतिनिधि मंडल भेजा है। दो दिवसीय प्रशिक्षण के बाद इन्हें रवाना किया जाएगा। इसके बाद यह तमिलनाडु के जिले में बेरोजगारों व कारोबारियों को इत्र बनाने का प्रशिक्षण देने के साथ सुगंध व्यापार के प्रति लोगों को प्रेरित करेंगे।
बड़े बाजार का रास्ता खुलेगा।
तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर चंदन के पेड़ पाए जाते हैं। इससे सुगंध कारोबारियों को काफी फायदा होगा। वहीं तमिलनाडु में इत्र कारोबार फैलने से पड़ोसी राज्य कर्नाटक, केरल में उन्हें बड़ा बाजार मिलेगा। युवाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खुलेंगे। साथ में निर्यात बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं। इससे तमिलनाडु सरकार का यह बड़ा कदम है।
कम लागत में तैयार हो सकता है चंदन का तेल और इत्र
कन्नौज में तैयार चंदन के तेल और इत्र की मांग को देखते हुए चंदन का गढ़ कह जाने वाले तमिलनाडु में भी इस उद्योग के प्रति रुचि बढ़ी है। प्रशिक्षण लेने आए तमिलनाडु के अधिकारियों की मानें तो उनकी सरकार का मानना है कि यदि तमिलनाडु में होने वाले चंदन का तेल और इत्र अगर यहीं बनाया जाए तो इसकी लागत में काफी कमी आएगी।
कम लागत होने के कारण इसकी मांग बढ़ेगी। नया उद्योग भी यहां स्थापित हो सकता है। बेरोजगार युवा इस क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाकर अच्छी आमदनी कर सकते हैं। दरअसल, तमिलनाडु से चंदन अब सरकार द्वारा की जाने वाली नीलामी के जरिए ही कन्नौज तक पहुंच पाता है। बोली ऊंची होने के कारण इसके दाम बढ़ जाते हैं। अगर तमिलनाडु में ही यह कारोबार शुरू होता है तो सरकार की ओर से विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे इसके दाम घटेंगे। इसके अलावा इसे यहां तक लाने में होने वाले खर्च में भी कटौती होगी।
तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर चंदन के पेड़ पाए जाते हैं। इससे सुगंध कारोबारियों को काफी फायदा होगा। वहीं तमिलनाडु में इत्र कारोबार फैलने से पड़ोसी राज्य कर्नाटक, केरल में उन्हें बड़ा बाजार मिलेगा। युवाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खुलेंगे। साथ में निर्यात बढ़ने की प्रबल संभावनाएं हैं। इससे तमिलनाडु सरकार का यह बड़ा कदम है।
कम लागत में तैयार हो सकता है चंदन का तेल और इत्र
कन्नौज में तैयार चंदन के तेल और इत्र की मांग को देखते हुए चंदन का गढ़ कह जाने वाले तमिलनाडु में भी इस उद्योग के प्रति रुचि बढ़ी है। प्रशिक्षण लेने आए तमिलनाडु के अधिकारियों की मानें तो उनकी सरकार का मानना है कि यदि तमिलनाडु में होने वाले चंदन का तेल और इत्र अगर यहीं बनाया जाए तो इसकी लागत में काफी कमी आएगी।
कम लागत होने के कारण इसकी मांग बढ़ेगी। नया उद्योग भी यहां स्थापित हो सकता है। बेरोजगार युवा इस क्षेत्र में अपना कॅरियर बनाकर अच्छी आमदनी कर सकते हैं। दरअसल, तमिलनाडु से चंदन अब सरकार द्वारा की जाने वाली नीलामी के जरिए ही कन्नौज तक पहुंच पाता है। बोली ऊंची होने के कारण इसके दाम बढ़ जाते हैं। अगर तमिलनाडु में ही यह कारोबार शुरू होता है तो सरकार की ओर से विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे इसके दाम घटेंगे। इसके अलावा इसे यहां तक लाने में होने वाले खर्च में भी कटौती होगी।