{"_id":"5ea972688ebc3e90612fe80f","slug":"two-youths-covered-2200-km-of-cycle-in-15-days-from-chennai-to-hardoi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लॉकडाउन में चेन्नई से पहुंचे हरदोई, दो युवकों ने 15 दिन में साइकिल से तय किया 2200 किलोमीटर का सफर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉकडाउन में चेन्नई से पहुंचे हरदोई, दो युवकों ने 15 दिन में साइकिल से तय किया 2200 किलोमीटर का सफर
Wed, 29 Apr 2020 05:58 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 29 Apr 2020 05:58 PM IST
विज्ञापन
युवकों ने 15 दिन में साइकिल से तय किया 2200 किलोमीटर का सफर
- फोटो : amar ujala
कोरोना महामारी से बचने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन जारी है। ऐसे में फैक्ट्रियां बंद होने की वजह से लोगों के सामने खाने पीना का संकट खड़ा हो गया है। लोग हजारों किलोमीटर का सफर तय कर जान जोखिम में डालकर अपने घर पहुंच रहे हैं।
परिवहन सेवाओं और रेल सेवाओं पर रोक होने की वजह से जिसको जो साधन मिल रहा है उसी के सहारे अपनों से मिलने की आस में निकल रहा है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में बुधवार को दो ऐसे ही युवक दो हजार किमी से भी अधिक साइकिल पर सफर कर अपने घर पहुंचे तो उनकी आंखों से आंसू छलक उठे।
विज्ञापन
परिवहन सेवाओं और रेल सेवाओं पर रोक होने की वजह से जिसको जो साधन मिल रहा है उसी के सहारे अपनों से मिलने की आस में निकल रहा है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में बुधवार को दो ऐसे ही युवक दो हजार किमी से भी अधिक साइकिल पर सफर कर अपने घर पहुंचे तो उनकी आंखों से आंसू छलक उठे।
विज्ञापन
लॉकडाउन के बाद चेन्नई की फैक्टरी में काम बंद होने के बाद रुपये खत्म होने पर हरदोई निवासी दो युवक साइकिल से 2200 किलोमीटर का सफर तय करने निकल पड़े। सड़क व गांव के रास्ते होते हुए आगरा एक्सप्रेसवे पर पहुंचे और पंद्रह दिन में अपने गांव पहुंचे। हरदोई जिले के गांव सरेहरी गांव निवासी सर्वेश कुमार गांव के ही अपने साथी विनोद कुमार के साथ साल 2019 में तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई गए थे।
यहां दोनों 15 हजार रुपये प्रति महीने पर एक गुटखा फैक्टरी में काम कर रहे थे। मार्च के अंतिम सप्ताह में कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन हो जाने से फैक्टरी बंद हो गई। मालिक ने भी कई महीने का भुगतान भी नही दिया। पास में जो रुपये थे वह भी 10 अप्रैल तक समाप्त हो गए।
खाने के लिए भी रुपये नहीं बचे। लॉक डाउन समाप्त होने की जल्द संभावना न होने से दोनों ने 15 दिन पहले साइकिल से 2200 किलोमीटर का सफर तय करने का निर्णय लिया। 13 अप्रैल को दोनों चेन्नई से साइकिल से घर के लिए निकले। रात दिन चलने और भूख प्यास से बेहाल और बिना किसी सहायता के वह दोनों लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे के जरिए मंगलवार देर रात अपने घर पहुंचे।
यहां दोनों 15 हजार रुपये प्रति महीने पर एक गुटखा फैक्टरी में काम कर रहे थे। मार्च के अंतिम सप्ताह में कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन हो जाने से फैक्टरी बंद हो गई। मालिक ने भी कई महीने का भुगतान भी नही दिया। पास में जो रुपये थे वह भी 10 अप्रैल तक समाप्त हो गए।
खाने के लिए भी रुपये नहीं बचे। लॉक डाउन समाप्त होने की जल्द संभावना न होने से दोनों ने 15 दिन पहले साइकिल से 2200 किलोमीटर का सफर तय करने का निर्णय लिया। 13 अप्रैल को दोनों चेन्नई से साइकिल से घर के लिए निकले। रात दिन चलने और भूख प्यास से बेहाल और बिना किसी सहायता के वह दोनों लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे के जरिए मंगलवार देर रात अपने घर पहुंचे।