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जिला अस्पताल में एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती, प्राइवेट वार्ड में रह रहीं स्टाफ नर्स
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जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बिना चादर की बेड़ पर लेटे दो मरीज। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात। जिले में एक ओर जहां डेंगू व बुखार कहर बरपा रहा है। वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल में बेहतर इलाज की आस लेकर पहुंचने वाले मरीजों को हताशा ही मिल रही है।
भीड़ के चलते एक बेड पर दो मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल के अधिकारी बेड न होने का हवाला दे रहे। जबकि 20 प्राइवेट वार्डों में कर्मचारियों ने आवास बना रखा है। जिसे मरीजों के लिए नहीं खोला जा रहा है।
मानसूनी बारिश के चलते जगह-जगह फैली गंदगी व जलभराव के चलते पिछले दो माह से डेंगू व बुखार गांव-गांव फैल रहा है। इसका दबाव जिला अस्पताल पर भी पड़ रहा है। स्थिति यह है कि स्वीकृत 70 बेड भी मरीजों के लिए कम पड़ रहे हैं।
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बुधवार को इमरजेंसी के 16 बेडों में 24 मरीज भर्ती किए गए। वहीं 48 बेड के जनरल, डेंगू व बुखार वार्ड मेें कुल 51 मरीज भर्ती थे। बेड की कमी के कारण इमरजेंसी व जनरल वार्ड के एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती कर इलाज किया गया। कई मरीज तो बेड न होने के चलते प्राइवेट अस्पतालों में चले गए।
इसके बावजूद जिला अस्पताल में बने छह कमरों के प्राइवेट वार्डों में छह स्टाफ नर्स आवास बनाए हुए हैं। जबकि चार कमरों में सामान आदि रखा हुआ है। वार्ड के गलियारे को कपड़े सुखाने के काम में लाया ज रहा है। सबसे हैरत की बात यह है कि स्टाफ नर्स आवास के नाम पर सरकार से गृह भत्ता भी लेती हैं।
जिला अस्पताल में मरीजों के लिए व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सीएमएस की है। अगर इमरजेंसी व जनरल वार्ड फुल हैं तो प्राइवेट वार्ड मरीजों को क्यों नहीं दिए जा रहे हैं, इसकी जानकारी कराई जाएगी। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ
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भीड़ के चलते एक बेड पर दो मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल के अधिकारी बेड न होने का हवाला दे रहे। जबकि 20 प्राइवेट वार्डों में कर्मचारियों ने आवास बना रखा है। जिसे मरीजों के लिए नहीं खोला जा रहा है।
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मानसूनी बारिश के चलते जगह-जगह फैली गंदगी व जलभराव के चलते पिछले दो माह से डेंगू व बुखार गांव-गांव फैल रहा है। इसका दबाव जिला अस्पताल पर भी पड़ रहा है। स्थिति यह है कि स्वीकृत 70 बेड भी मरीजों के लिए कम पड़ रहे हैं।
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बुधवार को इमरजेंसी के 16 बेडों में 24 मरीज भर्ती किए गए। वहीं 48 बेड के जनरल, डेंगू व बुखार वार्ड मेें कुल 51 मरीज भर्ती थे। बेड की कमी के कारण इमरजेंसी व जनरल वार्ड के एक बेड पर दो-दो मरीज भर्ती कर इलाज किया गया। कई मरीज तो बेड न होने के चलते प्राइवेट अस्पतालों में चले गए।
इसके बावजूद जिला अस्पताल में बने छह कमरों के प्राइवेट वार्डों में छह स्टाफ नर्स आवास बनाए हुए हैं। जबकि चार कमरों में सामान आदि रखा हुआ है। वार्ड के गलियारे को कपड़े सुखाने के काम में लाया ज रहा है। सबसे हैरत की बात यह है कि स्टाफ नर्स आवास के नाम पर सरकार से गृह भत्ता भी लेती हैं।
जिला अस्पताल में मरीजों के लिए व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सीएमएस की है। अगर इमरजेंसी व जनरल वार्ड फुल हैं तो प्राइवेट वार्ड मरीजों को क्यों नहीं दिए जा रहे हैं, इसकी जानकारी कराई जाएगी। - डॉ. एके सिंह, सीएमओ