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Kanpur News: ढह चुके दो घर, अब मकानों में दरारें पर मेट्रो नहीं मान रहा अपनी गलती
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कानपुर। मेट्रो निर्माण शहरियों को चौतरफा दर्द दे रहा है। खोदाई, पाइपलाइन टूटने से परेशान हो चुके लोगों अब मकान में दरारें आने से दहशत में हैं। विजयनगर कॉलोनी में सात मकानों में आई दरार के मामले में भी मेट्रो अधिकारी हर बार की तरह अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। बुधवार को मेट्रो अफसर कह रहे थे कि टनल निकालने में तीन से चार मिमी प्रति सेकंड कंपन हो रहा था। इससे मकान में दरार नहीं आ सकती। गुरुवार को विधायक सुरेंद्र मैथानी ने यहां निरीक्षण किया तो मेट्रो अफसरों ने उन्हें बताया कि कंपन पांच मिमी प्रति सेकंड होने से सामान्य स्तर पर पहुंच गया था, इस कारण दरारें आईं।
बता दें कि करीब दो साल पहले हरबंश मोहाल में भी मेट्रो की खोदाई से दो मकान ढह गए थे। मेट्रो ने पहले तो गलती नहीं मानी लेकिन जब जांच हुई तो सामने आया कि टनल बनाने में मकान ढहे। इसके बावबजूद मेट्रो ने दोनों भवनों स्वामियों को आज तक मुआवजा नहीं दिया। इसी तरह जूही में भी पाइप लाइनें तोड़ दी और बाद में धरना-प्रदर्शन पर जांच में मेट्रो की गलत सामने आने पर बनाई भी तो एक साल बाद आधा-अधूरा काम किया।
अगस्त 2023 में मेट्रो हरबंश मोहाल क्षेत्र में टनल बनाने का कार्य कर रहा था। दिलीप गुप्ता का मकान नंबर- 62/75 और सूरज गुप्ता का मकान नंबर- 62/92 कंपन की धमक से ढह गए थे। वार्ड-76 के पार्षद रजत कौशिक ने बताया कि इन मकानों में रहने वालों को मेट्रो ने एक सप्ताह तक होटल में रखवाया, उसके बाद वहां से भी हटा दिया। पहले तो मेट्रो ने अपनी गलती ही नहीं मानी और कहा कि मकानों के नीचे कुएं थे और यह पहले से ही नगर निगम से जर्जर घोषित थे। बाद में जब पार्षद ने पीड़ितों के साथ विरोध-प्रदर्शन किया तो मेट्रो की गलती सामने आई।
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टनल बनाने में खोदाई से मकानों की नींव कमजोर हुई जिससे ये ढह गए। इसके बाद भी आज तक मेट्रो ने दोनों मकानों के स्वामियों को मुआवजा नहीं दिया। मेट्रो ने आसपास के कुछ प्रभावित मकानों की मरम्मत जरूर कराई थी। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों के मुताबिक, उस वक्त भवन स्वामियों ने यह जानकारी नहीं दी थी कि भवन के नीचे कुआं है और मेट्रो ऐसे निर्माणों पर कोई मुआवजा नहीं देता।
धरने-विरोध के बाद एक साल में डाली पाइप लाइन
जूही-हमीरपुर रोड पर मई-2024 में मेट्रो की खोदाई में पेयजल व सीवर लाइनें टूटी थीं। इससे कई वार्डों में पानी की किल्लत होने के साथ ही जलभराव की समस्या हुई थी। मेट्रो अधिकारियों ने शुरू में अपनी गलती नहीं मानी लेकिन वार्ड-14 की पार्षद शालू कनौजिया ने पति सुनील कनौजिया के साथ 20 फीट गहरे में गड्ढे में उतर कर वीडियो बनाया और विरोध जताया तो मेट्रो व नगर निगम अधिकारी आए और दोबारा जांच कराई गई। इसमें मेट्रो की गलती सामने आई और दोबारा लाइन बिछाने का आश्वासन दिया। सीवर व पेयजल लाइन डालने में मेट्रो ने एक साल लगा दिए, वह भी गलत तरीके से पाइप डाले जिससे अक्सर जलभराव की समस्या होती है।
मेट्रो ने वाइब्रो हैमर ऑपरेटर को हटाया
दूसरा वाइब्रेशन मीटर लगाया, कंपन की तीव्रता आई 1.22 मिमी प्रति सेकंड
फोटो।
विजयनगर कॉलोनी में गोविंदनगर विधायक सुरेंद्र मैथानी मौके पर पहुंचे और मेट्रो अधिकारियों, इंजीनियरों व तकनीकी कर्मियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने घरों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और मेट्रो टीम को तत्काल मकानों की मरम्मत व पुताई करने का निर्देश दिया। मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि वाइब्रो हैमर चलाने वाले ऑपरेटर की लापरवाही से कंपन की तीव्रता पांच मिमी प्रति सेकंड के सामान्य मानक तक पहुंच गई थी जिससे कुछ घरों में हल्की दरारें आ गईं। मेट्रो ने तत्काल ऑपरेटर को हटा दिया और एक नया विशेषज्ञ ऑपरेटर नियुक्त किया। एक दूसरा वाइब्रेशन मीटर भी लगाया गया है। मशीन चलाकर कंपन की तीव्रता मापी गई जो 1.22 मिमी प्रति सेकंड दर्ज की गई। विधायक ने वाइब्रो हैमर और वाइब्रेशन मीटर पर लगातार निगरानी के लिए एक-एक तकनीकी कर्मचारी तैनात करने का निर्देश दिया। कंपन वाले क्षेत्र के निवासियों के तीन कार्यकर्ताओं की एक टीम बनाई। इसमें मंडल उपाध्यक्ष अजय गुप्ता, युवा मोर्चा अध्यक्ष आकाश गुप्ता और अशोक दीक्षित हैं। टीम मेट्रो अधिकारियों के साथ मिलकर कंपन की तीव्रता पर नजर रखेगी और इसे तीन से अधिक नहीं जाने देगी। विधायक ने प्रतिदिन शाम को मेट्रो और टीम से रिपोर्ट मांगी है। इस दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर अजहर सरताज, प्रोजेक्ट डायरेक्टर कल्पतरु पंकज शर्मा, डिप्टी चीफ इंजीनियर आदर्श सिंह, अधिशासी अभियंता अभिनव पटेल, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर वरुण सैनी, एडिशनल हेड राकेश जुआल आदि मौजूद रहे।
मकानों में पहले की हैं दरारें : यूपीएमआरसी
यूपीएमआरसी के जनसंपर्क विभाग के संयुक्त महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा के मुताबिक, टनल निर्माण कार्य शुरू होने से पहले प्रभावित भवनों का विस्तृत बिल्डिंग कंडीशन सर्वे कराया गया था। इसमें मकानों में पहले से मौजूद दरारों का उल्लेख किया गया था। पहले से मौजूद दरारों को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ना उचित नहीं है। अधिकांश दरारें सर्वे के दौरान पहले ही दर्ज हो चुकी थीं। रावतपुर से डबल पुलिया तक टनल निर्माण का कार्य मार्च-2026 में ही पूरा हो चुका है। अब शहर में कहीं भी टनल निर्माण कार्य नहीं चल रहा है। पाइल्स निकालने की प्रक्रिया से उत्पन्न कंपन का तकनीकी परीक्षण किया गया जिसकी तीव्रता निर्धारित मानकों के अनुरूप बहुत ही सामान्य स्तर की पाई गई है। ऑपरेटर ठेकेदार कंपनी के होते हैं, इन्हें हटाया या नहीं, इसकी जानकारी नहीं। हो सकता कोई गलती हो तो हटा दिया गया हो ऑपरेटर को। पहले से ही वाइब्रेशन मीटर लगा है, इसमें वाइब्रेशन की तीव्रता सामान्य आई है।
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बता दें कि करीब दो साल पहले हरबंश मोहाल में भी मेट्रो की खोदाई से दो मकान ढह गए थे। मेट्रो ने पहले तो गलती नहीं मानी लेकिन जब जांच हुई तो सामने आया कि टनल बनाने में मकान ढहे। इसके बावबजूद मेट्रो ने दोनों भवनों स्वामियों को आज तक मुआवजा नहीं दिया। इसी तरह जूही में भी पाइप लाइनें तोड़ दी और बाद में धरना-प्रदर्शन पर जांच में मेट्रो की गलत सामने आने पर बनाई भी तो एक साल बाद आधा-अधूरा काम किया।
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अगस्त 2023 में मेट्रो हरबंश मोहाल क्षेत्र में टनल बनाने का कार्य कर रहा था। दिलीप गुप्ता का मकान नंबर- 62/75 और सूरज गुप्ता का मकान नंबर- 62/92 कंपन की धमक से ढह गए थे। वार्ड-76 के पार्षद रजत कौशिक ने बताया कि इन मकानों में रहने वालों को मेट्रो ने एक सप्ताह तक होटल में रखवाया, उसके बाद वहां से भी हटा दिया। पहले तो मेट्रो ने अपनी गलती ही नहीं मानी और कहा कि मकानों के नीचे कुएं थे और यह पहले से ही नगर निगम से जर्जर घोषित थे। बाद में जब पार्षद ने पीड़ितों के साथ विरोध-प्रदर्शन किया तो मेट्रो की गलती सामने आई।
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टनल बनाने में खोदाई से मकानों की नींव कमजोर हुई जिससे ये ढह गए। इसके बाद भी आज तक मेट्रो ने दोनों मकानों के स्वामियों को मुआवजा नहीं दिया। मेट्रो ने आसपास के कुछ प्रभावित मकानों की मरम्मत जरूर कराई थी। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों के मुताबिक, उस वक्त भवन स्वामियों ने यह जानकारी नहीं दी थी कि भवन के नीचे कुआं है और मेट्रो ऐसे निर्माणों पर कोई मुआवजा नहीं देता।
धरने-विरोध के बाद एक साल में डाली पाइप लाइन
जूही-हमीरपुर रोड पर मई-2024 में मेट्रो की खोदाई में पेयजल व सीवर लाइनें टूटी थीं। इससे कई वार्डों में पानी की किल्लत होने के साथ ही जलभराव की समस्या हुई थी। मेट्रो अधिकारियों ने शुरू में अपनी गलती नहीं मानी लेकिन वार्ड-14 की पार्षद शालू कनौजिया ने पति सुनील कनौजिया के साथ 20 फीट गहरे में गड्ढे में उतर कर वीडियो बनाया और विरोध जताया तो मेट्रो व नगर निगम अधिकारी आए और दोबारा जांच कराई गई। इसमें मेट्रो की गलती सामने आई और दोबारा लाइन बिछाने का आश्वासन दिया। सीवर व पेयजल लाइन डालने में मेट्रो ने एक साल लगा दिए, वह भी गलत तरीके से पाइप डाले जिससे अक्सर जलभराव की समस्या होती है।
मेट्रो ने वाइब्रो हैमर ऑपरेटर को हटाया
दूसरा वाइब्रेशन मीटर लगाया, कंपन की तीव्रता आई 1.22 मिमी प्रति सेकंड
फोटो।
विजयनगर कॉलोनी में गोविंदनगर विधायक सुरेंद्र मैथानी मौके पर पहुंचे और मेट्रो अधिकारियों, इंजीनियरों व तकनीकी कर्मियों के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने घरों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और मेट्रो टीम को तत्काल मकानों की मरम्मत व पुताई करने का निर्देश दिया। मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि वाइब्रो हैमर चलाने वाले ऑपरेटर की लापरवाही से कंपन की तीव्रता पांच मिमी प्रति सेकंड के सामान्य मानक तक पहुंच गई थी जिससे कुछ घरों में हल्की दरारें आ गईं। मेट्रो ने तत्काल ऑपरेटर को हटा दिया और एक नया विशेषज्ञ ऑपरेटर नियुक्त किया। एक दूसरा वाइब्रेशन मीटर भी लगाया गया है। मशीन चलाकर कंपन की तीव्रता मापी गई जो 1.22 मिमी प्रति सेकंड दर्ज की गई। विधायक ने वाइब्रो हैमर और वाइब्रेशन मीटर पर लगातार निगरानी के लिए एक-एक तकनीकी कर्मचारी तैनात करने का निर्देश दिया। कंपन वाले क्षेत्र के निवासियों के तीन कार्यकर्ताओं की एक टीम बनाई। इसमें मंडल उपाध्यक्ष अजय गुप्ता, युवा मोर्चा अध्यक्ष आकाश गुप्ता और अशोक दीक्षित हैं। टीम मेट्रो अधिकारियों के साथ मिलकर कंपन की तीव्रता पर नजर रखेगी और इसे तीन से अधिक नहीं जाने देगी। विधायक ने प्रतिदिन शाम को मेट्रो और टीम से रिपोर्ट मांगी है। इस दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर अजहर सरताज, प्रोजेक्ट डायरेक्टर कल्पतरु पंकज शर्मा, डिप्टी चीफ इंजीनियर आदर्श सिंह, अधिशासी अभियंता अभिनव पटेल, डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर वरुण सैनी, एडिशनल हेड राकेश जुआल आदि मौजूद रहे।
मकानों में पहले की हैं दरारें : यूपीएमआरसी
यूपीएमआरसी के जनसंपर्क विभाग के संयुक्त महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा के मुताबिक, टनल निर्माण कार्य शुरू होने से पहले प्रभावित भवनों का विस्तृत बिल्डिंग कंडीशन सर्वे कराया गया था। इसमें मकानों में पहले से मौजूद दरारों का उल्लेख किया गया था। पहले से मौजूद दरारों को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़ना उचित नहीं है। अधिकांश दरारें सर्वे के दौरान पहले ही दर्ज हो चुकी थीं। रावतपुर से डबल पुलिया तक टनल निर्माण का कार्य मार्च-2026 में ही पूरा हो चुका है। अब शहर में कहीं भी टनल निर्माण कार्य नहीं चल रहा है। पाइल्स निकालने की प्रक्रिया से उत्पन्न कंपन का तकनीकी परीक्षण किया गया जिसकी तीव्रता निर्धारित मानकों के अनुरूप बहुत ही सामान्य स्तर की पाई गई है। ऑपरेटर ठेकेदार कंपनी के होते हैं, इन्हें हटाया या नहीं, इसकी जानकारी नहीं। हो सकता कोई गलती हो तो हटा दिया गया हो ऑपरेटर को। पहले से ही वाइब्रेशन मीटर लगा है, इसमें वाइब्रेशन की तीव्रता सामान्य आई है।