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Kanpur News: गुजरात में फंसे ट्रक, बढ़ सकता है माल भाड़ा, भड़केगी महंगाई
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कानपुर। गुजरात में ईंधन संकट और गहरा गया है। डीजल न मिलने से शहर के 1500 से ज्यादा ट्रक वहीं फंसे हुए हैं। निजी कंपनियों की ओर से तेल की कीमतें बढ़ाने और लिमिट तय करने से संकट बढ़ा है। ट्रांसपोर्टर भी 20 प्रतिशत तक माल-भाड़ा बढ़ सकते हैं। इससे महंगाई भड़कने की आशंका है। वहीं, पीएनजी के दाम बढ़ने से बिस्कुट, ब्रेड और नमकीन इकाइयों में उत्पादन लागत 10 प्रतिशत और बढ़ गई है।
कानपुर कपड़ा कारोबार का बड़ा हब है। इसके अलावा मारबल का बड़े स्तर पर काम होता है। शहर से गुजरात प्रतिदिन 1500 से ज्यादा ट्रकों का आवागमन होता है। ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि डीजल लिमिट की समस्या मंगलवार से शुरू हुई है। दरअसल वहां के पंप संचालकों ने लिमिट तय कर दी। वहां पर निजी कंपनियों के पंप ज्यादा हैं और उन्होंने रेट भी बढ़ा दिए हैं। औद्योगिक डीजल भी वहां पर ज्यादा महंगा हो गया है। इससे संकट ज्यादा बढ़ गया है। ट्रांसपोर्टरों ने गुजरात के अलग-अलग शहरों से पहले तीन दिन में ट्रक शहर आ जाते थेे। अब डीजल न मिलने से वहीं फंस गए हैं। अब उन्हें आने में ही छह से सात दिन लग जाएंगे। इससे उत्पादों की आपूर्ति ही प्रभावित हो जाएगी।
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बातचीत
गुजरात में निजी पेट्रोल कंपनियों ने दाम बढ़ाए
गुजरात में शहर के ट्रांसपोर्टरों के 1500 के करीब ट्रक अभी फंसे हुए हैं। गुजरात में निजी पेट्रोल कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं। पंप संचालकों ने डीजल की लिमिट तय कर दी है जिससे संकट खड़ा हो गया है। गुजरात में ट्रक जा भी नहीं पा रहे हैं। जब वहां से आ पाएंगे तभी जा पाएंगे। माल-भाड़ा में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। - मनीष कटारिया, अध्यक्ष, यूपी मोटर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन।
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उद्योगों में संकट लगातार बढ़ता जा रहा
उद्योगों में संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की सप्लाई 20 प्रतिशत कम कर दी गई। अब 10 रुपये कीमत बढ़ा दी गई। इससे इकाइयों की उत्पादन लागत भी 10 प्रतिशत और बढ़ गई। पीएनजी से खाद्य उत्पादों की इकाइयां संचालित होती हैं। उत्पादन लागत बढ़ गई तो दाम भी बढ़ना तय हो गए हैं। उद्योगों की हालत बिगड़ती जा रही है। - सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए।
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कानपुर कपड़ा कारोबार का बड़ा हब है। इसके अलावा मारबल का बड़े स्तर पर काम होता है। शहर से गुजरात प्रतिदिन 1500 से ज्यादा ट्रकों का आवागमन होता है। ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि डीजल लिमिट की समस्या मंगलवार से शुरू हुई है। दरअसल वहां के पंप संचालकों ने लिमिट तय कर दी। वहां पर निजी कंपनियों के पंप ज्यादा हैं और उन्होंने रेट भी बढ़ा दिए हैं। औद्योगिक डीजल भी वहां पर ज्यादा महंगा हो गया है। इससे संकट ज्यादा बढ़ गया है। ट्रांसपोर्टरों ने गुजरात के अलग-अलग शहरों से पहले तीन दिन में ट्रक शहर आ जाते थेे। अब डीजल न मिलने से वहीं फंस गए हैं। अब उन्हें आने में ही छह से सात दिन लग जाएंगे। इससे उत्पादों की आपूर्ति ही प्रभावित हो जाएगी।
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बातचीत
गुजरात में निजी पेट्रोल कंपनियों ने दाम बढ़ाए
गुजरात में शहर के ट्रांसपोर्टरों के 1500 के करीब ट्रक अभी फंसे हुए हैं। गुजरात में निजी पेट्रोल कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं। पंप संचालकों ने डीजल की लिमिट तय कर दी है जिससे संकट खड़ा हो गया है। गुजरात में ट्रक जा भी नहीं पा रहे हैं। जब वहां से आ पाएंगे तभी जा पाएंगे। माल-भाड़ा में 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। - मनीष कटारिया, अध्यक्ष, यूपी मोटर ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन।
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उद्योगों में संकट लगातार बढ़ता जा रहा
उद्योगों में संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की सप्लाई 20 प्रतिशत कम कर दी गई। अब 10 रुपये कीमत बढ़ा दी गई। इससे इकाइयों की उत्पादन लागत भी 10 प्रतिशत और बढ़ गई। पीएनजी से खाद्य उत्पादों की इकाइयां संचालित होती हैं। उत्पादन लागत बढ़ गई तो दाम भी बढ़ना तय हो गए हैं। उद्योगों की हालत बिगड़ती जा रही है। - सुनील वैश्य, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईआईए।