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तीन तलाक का मामला: आरोपियों के नाम हटाने को लेकर फोन पर भिड़े दो चौकी इंचार्ज, रिकार्डिंग वायरल

Fri, 21 Aug 2020 03:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 21 Aug 2020 03:29 PM IST
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triple talaq case: Two daroga Clash on phone to remove names of accused
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
कानपुर के बाबूपुरवा थाना क्षेत्र में नवंबर 2019 में दर्ज हुए तीन तलाक के मामले में पीड़िता ने जांच कर रहे पूर्व जांच अधिकारी (आईओ) पर केस डायरी से सात आरोपियों के नाम हटाने का आरोप लगाकर सीओ से शिकायत की। इसका पता चलने पर पूर्व आईओ चमनगंज तकिया पार्क चौकी इंचार्ज और वर्तमान आईओ बाबूपुरवा सुजातगंज चौकी इंचार्ज फोन पर एक-दूसरे पर आरोप लगाकर भिड़ गए।
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बृहस्पतिवार को बाबूपुरवा सीओ आलोक सिंह से दोबारा मिलने पहुंची पीड़िता ने उन्हें भी यह रिकार्डिंग सुनाई। पीड़िता ने सुजातगंज निवासी पति, सास, ससुर, देवर, दो ननदों और उनके पतियों के खिलाफ बाबूपुरवा थाने में दहेज के लिए प्रताड़ित करने, फोन पर तीन तलाक देने समेत गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पीड़िता का आरोप है कि उसने करीब डेढ़ माह पूर्व वर्तमान आईओ पवन कुमार दुबे से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि पूर्व आईओ मनसूर अली ने केस डायरी से पति को छोड़कर सभी के नाम निकाल दिए हैं। इस पर पीड़िता ने सोमवार को पूर्व आईओ की सीओ से शिकायत की। सीओ ने पूर्व आईओ मंसूर अली को तलब किया।
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इस पर उन्होंने खुद पीड़िता को फोन किया और वर्तमान आईओ को कॉन्फ्रेंस पर लिया। पीड़िता का आरोप है कि नाम हटाने के बारे में जब पूर्व आईओ ने पूछा तो वर्तमान आईओ भड़क गए और मिलकर बात करने को कहा। सीओ आलोक सिंह का कहना है कि वर्तमान आईओ को तलब किया है। नाम हटाने की बात की सच्चाई का पता केस डायरी की जांच के बाद ही सामने आएगी। 

ससुरालीजनों के खिलाफ साक्ष्य के बाद भी नहीं लगी चार्जशीट
पीड़िता का आरोप है कि जब पति ने सऊदी से फोन कर तलाक दिया था तो उससे पहले ही उसने अपने माता-पिता से संबंध विच्छेद कर लिए। ताकि उन पर कोई कार्रवाई न हो। इसके लिए उसने पुलिस को भी 50 हजार रुपये दिए। इसका खुलासा आरोपी पति ने अपने दोस्त से फोन पर बातचीत में किया है।

प्रधानमंत्री को अपशब्द, नहीं हुई कार्रवाई
पीड़िता का आरोप है कि पति ने बातचीत के दौरान तीन तलाक के कानून को लेकर प्रधानमंत्री को भी अपशब्द बोले। रिकार्डिंग पुलिस अधिकारियों को सुनाने के बाद भी उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
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