चित्रकूट। भारत जननी परिसर रानीपुर भट्ट में 50 कोल आदिवासी छात्राएं जनजातीय नृत्य, पारंपरिक नृत्य व शास्त्रीय गायन व नाट्यकला में दक्षता हासिल रही हैं। गुरुवार को छात्राओं ने लोकगीत के साथ नृत्य भी किए।
लोक विधाओं के संरक्षक/अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के संस्थापक गया प्रसाद गोपाल ने बताया कि वनवासी छात्राओं को एक महीने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 8 जून तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में आदिवासी बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का लक्ष्य है। चित्रकला प्रशिक्षक अर्चन ने बताया कि संगीतज्ञ लल्लूराम शुक्ल, लोक विधाओं में पारंगत गोपाल भाई, भारतेन्दु नाट्य अकादमी से रोजी दुबे, पारंपरिक नृत्य कला में समर्थ श्यामा कोल, मंजू पाठक, एवं सुपरिचित लोक गायिका बूटी कोल द्वारा छात्राओं को विविध कलाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण में मानिकपुर क्षेत्र के 20 गांवों की 50 कोल आदिवासी छात्राएं सहभागिता कर रही हैं।