UP: GSVM में न्यूरो एब्लेशन तकनीक से हो रहा इलाज, दर्द वाली तंत्रिकाओं को निष्क्रिय कर दे रहे मरीजों को राहत
Kanpur News: पेन मेडिसिन विभाग के प्रभारी डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि रोगियों के इलाज में पेन जनरेटर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक में फ्लोरोस्कोपी करते हैं। इसमें सुई जितने पतले तार को कैंसर वाले स्थान पर पहुंचाया जाता है। वहां दर्द पहुंचाने वाली तंत्रिकाओं को रेडियो फ्रीक्वेंसी से निष्क्रिय कर दिया जाता है।
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कानपुर में कैंसर रोगियों के दर्द को कम करने के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पेन मेडिसिन विभाग में न्यूरो एब्लेशन तकनीक अपनाई जा रही है। इससे लिवर कैंसर के अलावा गाल ब्लैडर, गर्भाशय, अग्नाशय, गुदा द्वार और नली आदि कैंसर के रोगियों को आराम मिल रहा है। इस तकनीक में मस्तिष्क तक दर्द का संदेश पहुंचाने वाली तंत्रिकाओं को रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया जाता है। इससे रोगी को दर्द का अहसास ही नहीं हो पाता है।
लिवर, गॉल ब्लैडर, अग्नाशय, गर्भाशय के कैंसर के रोगियों को बहुत दर्द होता है। दर्द कम करने के लिए उन्हें पेन किलर का इंजेक्शन या टैबलेट डॉक्टर देते हैं। इससे दर्द में पूरी तरह आराम नहीं मिलता है, साथ ही दर्दनाशक दवाओं के दुष्प्रभाव भी रोगी को झेलने पड़ते हैं। न्यूरो एब्लेशन तकनीक में रोगियों को आराम मिल जाता है। पेन मेडिसिन विभाग के प्रभारी डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि रोगियों के इलाज में पेन जनरेटर मशीन का इस्तेमाल किया जाता है।
खून का थक्का बनना बंद हो जाता है
इस तकनीक में फ्लोरोस्कोपी करते हैं। इसमें सुई जितने पतले तार को कैंसर वाले स्थान पर पहुंचाया जाता है। वहां दर्द पहुंचाने वाली तंत्रिकाओं को रेडियो फ्रीक्वेंसी से निष्क्रिय कर दिया जाता है। इससे दर्द का मैसेज मस्तिष्क तक नहीं पहुंच पाता और रोगी को दर्द का अहसास नहीं होता। उन्होंने बताया कि एडवांस लिवर कैंसर में यह विधि अधिक कारगर नहीं है। लिवर कैंसर की इस स्थिति में खून का थक्का बनना बंद हो जाता है। इससे प्रभावित अंग में सुई डालने पर ब्लीडिंग का खतरा रहता है।