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Hallet hospital में बढ़ेंगी सुविधाएं: आठ मॉड्यूलर ओटी वाले ट्रॉमा सेंटर को मंजूरी, मरीजों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

Thu, 02 Jun 2022 12:31 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 02 Jun 2022 12:31 PM IST
सार

हैलट अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल हेल्थ मिशन के तहत 270 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। यहां आठ मॉड्यूलर ओटी निर्मित किए जाएंगे। साथ ही हैलीपैड के लिए भी विशेष प्रस्ताव तैयार गया है। 

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Trauma center with eight modular OTs to be built in Hallet hospital, central government approved Rs 270 crore
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में हैलट अस्पताल परिसर में प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर  के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल हेल्थ मिशन के तहत 270 करोड़ रुपये को मंजूरी दे दी है। इस धनराशि से भवन बनेगा। ट्रामा सेंटर में आठ मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाए जाएंगे। इससे घायलों और सर्जरी के रोगियों को उत्कृष्ट सुविधाएं मिल सकेंगी।

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ट्रॉमा सेंटर में मंडल के जिलों के अलावा आसपास के 17 जिलों के रोगियों को अच्छा इलाज मिलेगा। ट्रामा सेंटर में घायलों का इलाज तो होगा ही, साथ ही अन्य रोगों के रोगियों के लिए भी इमरजेंसी सेवा की व्यवस्था की गई है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर को एपेक्स सेंटर बनाया जाएगा। इसके साथ ही ट्रामा सेंटर की छत पर हेलीपैड की भी व्यवस्था की जा रही है।
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बता दें कि हैलट में 375 करोड़ की लागत से प्रस्तावित ट्रॉमा सेंटर का प्रस्ताव कोरोना काल के कारण अटक गया था। केंद्र सरकार में इसकी फाइल रुकी हुई थी। अब इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस कड़ी में केंद्र सरकार ने भवन के मद की धनराशि को हरी झंडी दे दी है। इसके बाद उपकरणों के संबंध में प्रस्ताव पास किया जाएगा। इससे प्रदेश सरकार का भी शेयर रहेगा। 

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ट्रॉमा सेंटर के प्रस्ताव में सुविधाओं को लेकर थोड़ा सा बदलाव किया गया है। सेंटर में दो सौ बेड रहेंगे। इनमें सौ बेड ट्रॉमा के रोगियों के लिए रहेंगे। वहीं, बाकी सौ बेड दूसरी स्पेशियलिटी से संबंधित इमरजेंसी के लिए रहेंगे। इनमें मेडिसिन, सर्जरी और दूसरे विभागों के रोगी भर्ती हो सकेंगे। इससे घायलों के साथ सभी रोगियों को विशेषज्ञों का इलाज मिल सकेगा।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर की छत पर हेलीपैड बनाया जाएगा। हालांकि प्रस्ताव में इस संबंध में पहले से सुझाव रहा है, लेकिन इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। दूर-दराज इलाकों से घायलों को लाने में आसानी रहेगी। हेलीकॉप्टर के हिलने से झटके लगने के कारण ट्रॉमा के रोगियों को दिक्कत हो सकती है। घायलों को एक ही छत के नीचे सभी विशेषज्ञताओं का इलाज मिल जाएगा। 

मॉड्यूलर ओटी से फायदा
यह ऑपरेशन थिएटर अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होता है। इसमें जीरो संक्रमण की व्यवस्था रहती है। ऑटोमैटिक मशीनों से पल्स रेट, ब्लड प्रेशर आदि की मॉनीटरिंग होती रहती है। सर्जरी के दौरान रोगी के शरीर से निकलने वाले द्रव्य को मशीन सोख लेती है। इससे संक्रमण फैल नहीं पाता। बिजली बैक अप होता है। 

ट्रॉमा के अभी सिर्फ 26 बेड
हैलट में अभी ट्रॉमा रोगियों के लिए सिर्फ 26 बेड हैं। यहां प्रतिदिन सौ से डेढ़ ट्रॉमा के रोगी आते हैं। इससे उन्हें इमरजेंसी में स्थिर करने के बाद सामान्य वार्डों में रखकर इलाज किया जाता है। ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद इन रोगियों के इलाज की पर्याप्त सुविधा हो जाएगी।

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