फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   transfer fee Case, Mayor said MLC should give in writing, nagar nigam sent proposal to government after 17 day

Kanpur: मेयर बोलीं- एमएलसी लिखित दें...स्थगित कर देंगे नामांतरण शुल्क, निगम 17 दिन बाद भेजा शासन को प्रस्ताव

Sun, 06 Oct 2024 11:51 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 06 Oct 2024 11:51 AM IST
सार

Kanpur News: नगर निगम ने नामांतरण शुल्क के संबंध में 17 दिन बाद शासन को जवाब भेजा है। नगर विकास विभाग के संयुक्त सचिव कल्याण बनर्जी को भेजे गए जवाब में बताया कि नगर निगम सदन की एक अगस्त 2018 को स्वीकृत प्रस्ताव संख्या-11 के तहत नगर निगम के आर्थिक हित के मद्देनजर नामांतरण शुल्क को संशोधित किया गया।

विज्ञापन
transfer fee Case, Mayor said MLC should give in writing, nagar nigam sent proposal to government after 17 day
कानपुर नगर निगम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में नामांतरण शुल्क का मामला अधिकारियों के गले की फांस बन गया है। इसके तूल पकड़ते ही महापौर प्रमिला पांडेय ने सात अक्तूबर को होने वाली बैठक स्थगित कर दी। महापौर ने दोपहर में नगर आयुक्त और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी से अलग-अलग करीब आधा-आधा घंटा विचार-विमर्श करने के बाद यह निर्णय लिया।

विज्ञापन

बैठक स्थगति करने का कारण भी नहीं बताया गया।  माना जा रहा है कि संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क के विरोध की काट ढूंढने के लिए ऐसा किया गया। उधर, महापौर ने बताया कि एमएलसी लिखकर देंगे और सदन की मंशा होगी तो वह नामांतरण शुल्क स्थगित कर देंगी।
विज्ञापन

उधर, सत्तारूढ़ पार्टी से लेकर गैर भाजपाई पार्षदों ने भी नामांतरण शुल्क के विरोध का ऐलान किया है।  उनका कहना है कि नगर निगम अधिनियम के विपरीत भवन स्वामियों से इतना ज्यादा नामांतरण शुल्क वसूला जा रहा है। इससे लोगों पर हर साल करीब 25 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। जब लखनऊ और वाराणसी नगर निगम ने एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क खत्म कर दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

2016 से लिया जा रहा है नामांतरण शुल्क
ऐसे में नगर आयुक्त यहां ऐसा क्यों नहीं कर रहे। गाजियाबाद में संपत्ति खरीदने में लगे स्टांप का एक प्रतिशत या कम से कम एक हजार रुपये नामांतरण शुल्क 2016 से लिया जा रहा है। भवनों के नाम परिवर्तन में भी भवन की रजिस्ट्री शुल्क का एक प्रतिशतता न्यूनतम एक हजार रुपये नामांतरण शुल्क लेने का आदेश पारित हुआ है।

नगर निगम ने 17 दिन बाद शासन को भेजा जवाब
नगर निगम ने नामांतरण शुल्क के संबंध में 17 दिन बाद शासन को जवाब भेजा है। नगर विकास विभाग के संयुक्त सचिव कल्याण बनर्जी को भेजे गए जवाब में बताया कि नगर निगम सदन की 1 अगस्त 2018 को स्वीकृत प्रस्ताव संख्या-11 के तहत नगर निगम के आर्थिक हित के मद्देनजर नामांतरण शुल्क को संशोधित किया गया। नगर निगम के रिकार्ड के अनुसार, यह दर सन् 2002 से पूर्व प्रचलित है।

एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क लिया जा रहा
समय-समय पर नामांतरण शुल्क में संशोधन किए गए। 26 दिसंबर 2002 व 17 अक्तूबर 2012 को कार्यकारिणी समिति की बैठक और 15 दिसंबर 2012 व एक अगस्त 2018 को सदन की बैठक में भी इसे स्वीकृति प्रदान की गई। इसीलिए एक अगस्त 2018 से संपत्ति की कीमत की डीएम सर्किल दर या संपत्ति की बिक्री में से जो ज्यादा हो, उसका एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क लिया जा रहा है।

शासन को रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे
बताते चलें कि नगर विकास विभाग के संयुक्त सचिव कल्याण बनर्जी ने 17 सितंबर को एमएलसी अरुण पाठक की तरफ से नामांतरण शुल्क के विरोध में की गई आपत्ति का हवाला देते हुए इसका परीक्षण कराकर एमएलसी और शासन को रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे। नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने अक्तूबर में इसका जवाब भेजा।

समान रूप से नामांतरण शुल्क की वसूली हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन
नगर निगम में संपत्ति के नामांतरण के लिए वसूले जाने वाले नामांतरण शुल्क को अधिवक्ता भी गैरकानूनी और मध्यमवर्गीय व्यक्ति पर अनावश्यक बोझ पैदा करने वाला बताते हैं। हर मामले में समान रूप से नामांतरण शुल्क की वसूली को अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना भी बताया है। पहले एक निर्धारित दर से नामांतरण शुल्क वसूला जाता था, लेकिन पिछले कुछ सालों से संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क वसूला जाने लगा है। इसको लेकर जनता के साथ ही जनप्रतिनिधियों ने भी आवाज उठाई है। नामांतरण शुल्क जमा न कर पाने के कारण कई संपत्तियां विवादों में घिर जाती हैं। इससे मुकदमेबाजी को भी बढ़ावा मिलता है।

हाईकोर्ट का आदेश है कि वरासतन मिलने वाली संपत्ति पर नामांतरण शुल्क नहीं वसूला जा सकता। साफ है कि सिर्फ विक्रय पत्र से संपत्ति नामांतरण पर ही शुल्क लिया जाना चाहिए क्योंकि इसी आधार पर संपत्ति का टाइटल बदलता है बाकी दोनों आधारों पर टाइटल नहीं बदलता। नामांतरण शुल्क वसूलना पूर्णत: गैरकानूनी है।  -श्यामजी श्रीवास्तव, वरिष्ठ अधिवक्ता

संपत्ति की कीमत का एक प्रतिशत नामांतरण शुल्क वसूलना बिल्कुल गलत है। गरीब व्यक्ति शुल्क न दे पाने केे कारण भवन का नामांतरण नहीं करा पाता, जिस कारण संपत्तियों में विवाद पैदा होता है। इसका दलाल फायदा उठाते हैं और गरीबों की करोड़ों रुपये कीमत की संपत्तियां औने-पौने दाम पर बिकवा देते हैं।  -सिद्धांत शुक्ला, वरिष्ठ अधिवक्ता

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed