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एक्सक्लूसिव: तेजस एक्सप्रेस से 10 गुना ज्यादा है सेमी हाईस्पीड ट्रेन-18 की कमाई
Sun, 08 Dec 2019 12:19 PM IST
शिखा पांडेय
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 08 Dec 2019 12:19 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस कमाई के मामले में मेक इन इंडिया की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस से 10 गुना पीछे चल रही है। तेजस की एक महीने की कमाई सात से आठ लाख रुपये है, जबकि ट्रेन-18 की एक महीने की औसत कमाई 70 से 80 लाख रुपये है। यात्री तेजस के मुकाबले ट्रेन-18 को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।
सुविधाओं से ज्यादा आरामदायक यात्रा को प्राथमिकता
तेजस एक्सप्रेस ने यात्रियों को लुभाने के लिए कई लोक लुभावन योजनाएं शुरू कीं। इस ट्रेन के यात्रियों को बेहतर खाने-पीने और असीमित कॉफी-चाय जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। ट्रेन के एक घंटे से ज्यादा लेट होने पर मुआवजा देने की सुविधा भी तेजस एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए है।
ट्रेन में चलता फिरता एटीएम भी है, लेकिन आरामदायक सफर के मामले में ट्रेन-18 से इस ट्रेन का कोई मुकाबला नहीं है। शायद यही वजह है कि दोनों ट्रेनों की कमाई के जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे यात्रियों ने ट्रेन 18 पर मुहर लगा दी है।
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सुविधाओं से ज्यादा आरामदायक यात्रा को प्राथमिकता
तेजस एक्सप्रेस ने यात्रियों को लुभाने के लिए कई लोक लुभावन योजनाएं शुरू कीं। इस ट्रेन के यात्रियों को बेहतर खाने-पीने और असीमित कॉफी-चाय जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। ट्रेन के एक घंटे से ज्यादा लेट होने पर मुआवजा देने की सुविधा भी तेजस एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए है।
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ट्रेन में चलता फिरता एटीएम भी है, लेकिन आरामदायक सफर के मामले में ट्रेन-18 से इस ट्रेन का कोई मुकाबला नहीं है। शायद यही वजह है कि दोनों ट्रेनों की कमाई के जो आंकड़े सामने आए हैं, उससे यात्रियों ने ट्रेन 18 पर मुहर लगा दी है।
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ट्रेन-18 में सीटों को लेकर भी मारामारी ज्यादा
यात्रियों की ट्रेन-18 में सफर करने की डिमांड की वजह से भी इस ट्रेन में सीटों को लेकर ज्यादा मारामारी होती है। चार अक्तूबर को लखनऊ से नई दिल्ली वाया कानपुर होकर चली तेजस एक्सप्रेस 31 अक्तूबर तक 7.73 लाख रुपये मुनाफा कमा सकी। तेजस ने 447.04 लाख रुपये की आमदनी की और संचालन में 439.31 लाख रुपये खर्च हुए।
इस दौरान के सफर में सीटें भी 62 फीसदी भरीं। वहीं, ट्रेन-18 में सीटों के रिजर्व होने का औसत प्रतिशत 80 से 100 फीसदी है। वंदे भारत की मासिक कमाई 70 से 80 लाख रुपये है। इस ट्रेन को बनाने में 100 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो एक साल के संचालन पर ही निकल आएंगे।
यात्रियों की ट्रेन-18 में सफर करने की डिमांड की वजह से भी इस ट्रेन में सीटों को लेकर ज्यादा मारामारी होती है। चार अक्तूबर को लखनऊ से नई दिल्ली वाया कानपुर होकर चली तेजस एक्सप्रेस 31 अक्तूबर तक 7.73 लाख रुपये मुनाफा कमा सकी। तेजस ने 447.04 लाख रुपये की आमदनी की और संचालन में 439.31 लाख रुपये खर्च हुए।
इस दौरान के सफर में सीटें भी 62 फीसदी भरीं। वहीं, ट्रेन-18 में सीटों के रिजर्व होने का औसत प्रतिशत 80 से 100 फीसदी है। वंदे भारत की मासिक कमाई 70 से 80 लाख रुपये है। इस ट्रेन को बनाने में 100 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो एक साल के संचालन पर ही निकल आएंगे।
तेजस एक्सप्रेस के संचालन से आईआरसीटीसी पूरी तरह संतुष्ट है। सहालग के सीजन में अच्छी डिमांड है। त्योहारों में इस ट्रेन में अतिरिक्त कोच भी लगाए गए थे। धीरे-धीरे तेजस एक्सप्रेस मुनाफे में नए आयाम गढ़ेगी। - अश्विनी श्रीवास्तव, मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक, आईआरसीटीसी