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लखनऊ, वाराणसी से जहरीली कानपुर की हवा, 440 तक पहुंचा शहर का एक्यूआई, औसत 264 रहा
Tue, 02 Nov 2021 11:26 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 02 Nov 2021 11:26 PM IST
सार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, मंगलवार को कानपुर का औसत एक्यूआई 264 दर्ज किया गया। यह लखनऊ (248), वाराणसी (127) से ज्यादा पर दिल्ली (303) और मेरठ (296) से कम रहा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर में धनतेरस पर खरीदारी के लिए बाजारों में उमड़ी भीड़ ने हवा की सेहत खराब कर दी। आमदिनों के मुकाबले एक साथ डेढ़ गुना से अधिक लोग वाहनों से निकले। इसके चलते जगह-जगह जाम लगने से वाहनों से निकलने वाला दमघोंटू धुआं फेफड़ों को छलनी करता रहा।
मंगलवार को ब्रह्मनगर चौराहे पर नेहरूनगर के पांच सौ मीटर के दायरे में आने वाले बाजारों में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 440 तक पहुंच गया। एक दिन पहले यह 404 था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, मंगलवार को शहर का औसत एक्यूआई 264 दर्ज किया गया।
यह लखनऊ (248), वाराणसी (127) से ज्यादा पर दिल्ली (303) और मेरठ (296) से कम रहा। चिंताजनक यह है कि शहर की हवा में पीएम 2.5 की मात्रा सबसे अधिक है, जो सेहत के लिहाज से ज्यादा खतरनाक है। इसमें धूल और धुएं की मात्रा सबसे अधिक होती है।
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इसकी तीन वजहें सामने आई हैं। पहली हवा में बढ़ी नमी, दूसरी त्योहारी भीड़ के चलते जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला धुआं और तीसरी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के बाद भी सड़कों, फुटपाथों और बाजारों में पानी का छिड़काव न किया जाना।
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मंगलवार को ब्रह्मनगर चौराहे पर नेहरूनगर के पांच सौ मीटर के दायरे में आने वाले बाजारों में एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 440 तक पहुंच गया। एक दिन पहले यह 404 था। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, मंगलवार को शहर का औसत एक्यूआई 264 दर्ज किया गया।
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यह लखनऊ (248), वाराणसी (127) से ज्यादा पर दिल्ली (303) और मेरठ (296) से कम रहा। चिंताजनक यह है कि शहर की हवा में पीएम 2.5 की मात्रा सबसे अधिक है, जो सेहत के लिहाज से ज्यादा खतरनाक है। इसमें धूल और धुएं की मात्रा सबसे अधिक होती है।
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इसकी तीन वजहें सामने आई हैं। पहली हवा में बढ़ी नमी, दूसरी त्योहारी भीड़ के चलते जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला धुआं और तीसरी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के बाद भी सड़कों, फुटपाथों और बाजारों में पानी का छिड़काव न किया जाना।
इस संबंध में जिलाधिकारी के निर्देशों की भी अनदेखी कर दी गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, जिन बाजारों में जाम लग रहा है, वहां काफी देर तक वाहनों के फंसने से धुआं नमी की वजह से जमीन से करीब तीन किमी ऊपर जमा हो रहा है। ऐसे बाजारों के आसपास प्रदूषण की मात्रा अधिक है।
इन क्षेत्रों में ज्यादा प्रदूषण
- नेहरूनगर के आसपास 80 फीट रोड, सीसामऊ, पी रोड, गुमटी, अशोकनगर, जरीब चौकी पर एक्यूआई 420
- आईआईटी के 500 मीटर के दायरे में कल्याणपुर का क्षेत्र यहां एक्यूआई 276
- किदवईनगर चौराहे के आसपास के क्षेत्र में एक्यूआई 184
- एनएसआई के आसपास कल्याणपुर बड़ा बाजार है, वहां पर एक्यूआई 178
इन क्षेत्रों में ज्यादा प्रदूषण
- नेहरूनगर के आसपास 80 फीट रोड, सीसामऊ, पी रोड, गुमटी, अशोकनगर, जरीब चौकी पर एक्यूआई 420
- आईआईटी के 500 मीटर के दायरे में कल्याणपुर का क्षेत्र यहां एक्यूआई 276
- किदवईनगर चौराहे के आसपास के क्षेत्र में एक्यूआई 184
- एनएसआई के आसपास कल्याणपुर बड़ा बाजार है, वहां पर एक्यूआई 178