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आज डेढ़ हजार श्रमिकों को लाएगी स्पेशल ट्रेन, गुजरात के गोधरा से दोपहर में पहुंचेगी कानपुर सेंट्रल
Tue, 05 May 2020 01:15 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 05 May 2020 01:15 AM IST
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दो दिन पहले भी गुजरात से श्रमिकों के लेकर कानपुर पहुंची थी ट्रेन
- फोटो : amar ujala
गुजरात के गोधरा से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन मंगलवार को दोपहर करीब ढाई बजे कानपुर सेंट्रल स्टेशन आएगी। 24 कोच वाली यह ट्रेन करीब डेढ़ हजार मजदूरों को लेकर सोमवार देर रात गोधरा स्टेशन से रवाना होगी। इसमें कानपुर समेत करीब 35 से 40 जिलों के मजदूर बताए जा रहे हैं।
सेंट्रल पर जीआरपी और आरपीएफ जवानों को मुस्तैद रहने को कहा गया है। रविवार को भी अहमदाबाद के साबरमती स्टेशन से एक ट्रेन कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची थी। इसमें प्रदेश के 52 जिलों के 1200 से अधिक यात्री आए थे।
कानपुर में बड़ी तादाद में यात्रियों का आना खतरनाक
कानपुर शहर रेड जोन में है और यहां रोज नए-नए मामले बड़ी संख्या में मिल रहे हैं। ऐसे में कानपुर में गुजरात से बड़ी संख्या में इस तरह यात्रियों का आना खतरनाक हो सकता है। कानपुर में इन प्रवासी मजदूरों को उतारकर अलग-अलग जिलों में बसों से भेजने पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि ट्रेन से उतरने वाले यात्री कानपुर और आसपास के कम ही होते हैं।
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साबरमती से आई स्पेशल ट्रेन के 1200 से अधिक यात्रियों में करीब 250 यात्री ही कानपुर और उसके आसपास जिलों के थे। ज्यादातर यात्री पूर्वांचल के थे। ऐसे में यात्रियों को प्रयागराज या पूर्वांचल के किसी स्टेशन पर उतारना ज्यादा उपयुक्त होता। रोडवेज को भी लंबी दूरी की कवायद न करनी होती। दरअसल, ये मजदूर गुजरात में क्वारंटीन नहीं हुए हैं, बल्कि थर्मल स्क्रीनिंग कराकर इनको ट्रेन से लाया जा रहा है।
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सेंट्रल पर जीआरपी और आरपीएफ जवानों को मुस्तैद रहने को कहा गया है। रविवार को भी अहमदाबाद के साबरमती स्टेशन से एक ट्रेन कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंची थी। इसमें प्रदेश के 52 जिलों के 1200 से अधिक यात्री आए थे।
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कानपुर में बड़ी तादाद में यात्रियों का आना खतरनाक
कानपुर शहर रेड जोन में है और यहां रोज नए-नए मामले बड़ी संख्या में मिल रहे हैं। ऐसे में कानपुर में गुजरात से बड़ी संख्या में इस तरह यात्रियों का आना खतरनाक हो सकता है। कानपुर में इन प्रवासी मजदूरों को उतारकर अलग-अलग जिलों में बसों से भेजने पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि ट्रेन से उतरने वाले यात्री कानपुर और आसपास के कम ही होते हैं।
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साबरमती से आई स्पेशल ट्रेन के 1200 से अधिक यात्रियों में करीब 250 यात्री ही कानपुर और उसके आसपास जिलों के थे। ज्यादातर यात्री पूर्वांचल के थे। ऐसे में यात्रियों को प्रयागराज या पूर्वांचल के किसी स्टेशन पर उतारना ज्यादा उपयुक्त होता। रोडवेज को भी लंबी दूरी की कवायद न करनी होती। दरअसल, ये मजदूर गुजरात में क्वारंटीन नहीं हुए हैं, बल्कि थर्मल स्क्रीनिंग कराकर इनको ट्रेन से लाया जा रहा है।