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बाघ की चहलकदमी से चकरघिन्नी बनी टीम

Mon, 22 Dec 2014 03:22 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर Updated Mon, 22 Dec 2014 03:22 AM IST
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Tiger disturbed forest department team
ढाई साल के बाघ की चहलकदमी से चकरघिन्नी बनी वन विभाग की टीम को रविवार सुबह बाघ के पैरों के ताजे निशान पहाड़ीपुर के जंगलों में मिले हैं।
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इसके बाद विभाग ने संभावित इलाके में कांबिंग की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। दरअसल बाघ की तलाश के लिए टीम के आड़े कोहरे भरा मौसम और घना जंगल आ रहा है।

उधर, उन्नाव से सटे एक गांव में जानवर के मारे जाने की सूचना कोरी बकवास निकली। शनिवार रात बाघ पहाड़ीपुर गांव में बांधे गए ट्रैपिंग केज के आसपास घूमा है।

वन विभाग की टीम को रविवार सुबह उसके पैरों के निशान मिले हैं। हालांकि बाघ ने ट्रैप केज के भीतर बंधे पड़वे को अपना शिकार नहीं बनाया है।

वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ  इंडिया के डॉक्टर सौरभ संघई ने बताया कि बाघ बहुत होशियार है। शायद उसे आभास है कि पड़वे को मारने में खतरा है, यहीं वजह है कि उसने उसे अपना शिकार नहीं बनाया।
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डॉ सौरभ ने बताया कि खराब मौसम से ट्रैकिंग में दिक्कत आ रही है। सुबह देर से होती है और शाम जल्दी हो जाती है। इस कारण कांबिंग के लिए समय कम मिल पाता है। साथ ही कोहरे की वजह से भी दिक्कत आ रही है।
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उन्होंने कहा कि बाघ घने कोहरे में भी साफ देख सकता है और हमें कई बार उसने देखा भी हो। लेकिन वह आदमखोर नहीं है यहीं वजह है कि उसने अब तक हम लोगों पर हमला नहीं किया है।
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