ठग गिरोह का भंडाफोड़: कोई कर रहा था मार्केटिंग…तो कोई जॉब की तलाश, चारों आरोपी एमए-बीए पास, ऐसे देते अंजाम
Kanpur News: आरिबा ने अपने साथ पढ़ाई करने वाली सहेली कीर्ति गुप्ता उर्फ स्नेहा को भी अपने गिरोह में शामिल कर दिया। वह भी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में थी। इसके बाद दोनों हरिओम के कहने पर टेलीकॉलर बनकर ठगी को अंजाम देने लगे थे।
विस्तार
कानपुर में ठगी के मामले में पकड़े गए चारों आरोपी एमए व बीए पास हैं। दो आरोपी मार्केटिंग का काम कर रहे थे तो युवतियां नौकरी की तलाश कर रही थीं। पकड़े गए तीन आरोपियों के तार हरिओम पांडेय से मिले हैं। हरिओम ठगी के लिए दोनों युवतियों को टेलीकॉलर के रूप में इस्तेमाल करता था।
डीसीपी ने बताया कि गैंग का सरगना हरिओम पांडेय एमए पास आउट है। आरोपी पढ़ाई पूरी करने के बाद मार्केटिंग लाइन में नौकरी करता था। उसके परिवार में पत्नी व एक बेटा है। वह वर्ष 2013 में बादशाहीनाका और वर्ष 2015 में बस्ती से जेल जा चुका है। अनुराग दीक्षित ने बीकॉम की पढ़ाई की है।
आरिबा अंसारी नौकरी की तलाश में थी
उसके परिवार में माता पिता हैं। अनुराग भी मार्केटिंग लाइन में जॉब करता था। नौ साल पहले उसकी मुलाकात हरिओम से हुई थी। इसके बाद वह भी ठगी में शामिल हो गया। ऐसे ही आरिबा अंसारी भी बीए की पढ़ाई कर चुकी है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह नौकरी की तलाश में थी।
दोनों टेलीकॉलर बनकर ठगी को अंजाम देने लगे थे
तभी एक साल पहले हरिओम के संपर्क में आने के बाद साइबर ठगी के गिरोह में शामिल हो गई। आरिबा ने अपने साथ पढ़ाई करने वाली सहेली कीर्ति गुप्ता उर्फ स्नेहा को भी अपने गिरोह में शामिल कर दिया। वह भी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में थी। इसके बाद दोनों हरिओम के कहने पर टेलीकॉलर बनकर ठगी को अंजाम देने लगे थे।
नौ साल से ठगी की वारदातों को दे रहे अंजाम
डीसीपी एसएम कासिम आब्दी ने बताया कि गिरोह 2015 से साइबर ठगी की घटना में शामिल हैं। अब तक देश भर में सवा लाख से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बना चुके हैं। आरोपियों ने एक साल पहले 2.47 लाख रुपये में एक साल के लिए नौकरी.कॉम वेबसाइट का पैकेज ले रखा था।