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Kanpur News: तीन महिला वैज्ञानिकों को मिला सरोज चंद्रशेखर मेमोरियल अवार्ड
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आईआईटी में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोग।
- फोटो : आईआईटी
कानपुर। जैव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने वाली तीन महिला वैज्ञानिकों को सरोज चंद्रशेखर मेमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया। आईआईटी में शुक्रवार को आयोजित समारोह में योगिता कपूर, हर्षा रानी, अंतिमा अंकिता मेनन को यह सम्मान उनके डॉक्टरेट शोध के लिए दिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली एम्स में संरचनात्मक जीवविज्ञान की विशेषज्ञ प्रो. सुजाता शर्मा और वायरस पर रिसर्च कर रही आईआईटी कानपुर की रसायन विभाग की डॉ. नगमा परवीन शामिल हुईं।
इस दौरान तपेदिक से जुड़ी बैक्टीरिया की वृद्धि और विभाजन पर रिसर्च करने वाली सीएसआईआर-सीसीएमबी हैदराबाद की योगिता कपूर, कोलोरेक्टल कैंसर में पी53 जीन की भूमिका पर रिसर्च करने पर मणिपाल की इंस्टीट्यूट ऑफ बायोइनफॉर्मेटिक्स एंड एप्लाइड बायोटेक्नोलॉजी की हर्षा रानी और दवा व बायोमार्कर को पहचानने वाले खास बायोसेंसर विकसित करने वाली आईआईटी पालक्कड़ की अंतिमा अंकिता मेनन को सम्मानित किया गया।
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यह पुरस्कार प्रोफेसर सरोज चंद्रशेखर की याद में दिया जाता है, जो तपेदिक (टीबी) पर शोध करने वाली एक जानी-मानी वैज्ञानिक थीं। कॅरिअर के शुरुआत में प्रोफेसर सरोज चंद्रशेखर ने मुंबई विश्वविद्यालय के सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीएससी की।
इसके बाद उन्होंने 1950 में यूके के इंपीरियल कॉलेज से बैक्टीरियोलॉजी में पीएचडी की। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट में प्रमुख पदों पर रहीं और 1966 से 1969 तक जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) में भी पढ़ाया। उनके शोध ने टीबी की बेहतर समझ और इलाज की दिशा में बड़ी मदद की।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली एम्स में संरचनात्मक जीवविज्ञान की विशेषज्ञ प्रो. सुजाता शर्मा और वायरस पर रिसर्च कर रही आईआईटी कानपुर की रसायन विभाग की डॉ. नगमा परवीन शामिल हुईं।
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इस दौरान तपेदिक से जुड़ी बैक्टीरिया की वृद्धि और विभाजन पर रिसर्च करने वाली सीएसआईआर-सीसीएमबी हैदराबाद की योगिता कपूर, कोलोरेक्टल कैंसर में पी53 जीन की भूमिका पर रिसर्च करने पर मणिपाल की इंस्टीट्यूट ऑफ बायोइनफॉर्मेटिक्स एंड एप्लाइड बायोटेक्नोलॉजी की हर्षा रानी और दवा व बायोमार्कर को पहचानने वाले खास बायोसेंसर विकसित करने वाली आईआईटी पालक्कड़ की अंतिमा अंकिता मेनन को सम्मानित किया गया।
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यह पुरस्कार प्रोफेसर सरोज चंद्रशेखर की याद में दिया जाता है, जो तपेदिक (टीबी) पर शोध करने वाली एक जानी-मानी वैज्ञानिक थीं। कॅरिअर के शुरुआत में प्रोफेसर सरोज चंद्रशेखर ने मुंबई विश्वविद्यालय के सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीएससी की।
इसके बाद उन्होंने 1950 में यूके के इंपीरियल कॉलेज से बैक्टीरियोलॉजी में पीएचडी की। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट में प्रमुख पदों पर रहीं और 1966 से 1969 तक जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय (अमेरिका) में भी पढ़ाया। उनके शोध ने टीबी की बेहतर समझ और इलाज की दिशा में बड़ी मदद की।