Kanpur: एपेक्स सेंटर में तीन गुना ज्यादा मरीज हो सकेंगे भर्ती, छह करोड़ से तैयार होगी डीपीआर, ये होंगी सुविधाएं
Kanpur News: न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि अगले 10 सालों में रोगियों की बढ़ी हुई अनुमानित संख्या के आकलन के आधार पर ट्रॉमा सेंटर की क्षमता बढ़ाई गई है। यह क्षमता मौजूदा से तीन गुना अधिक रहेगी।
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कानपुर में हैलट परिसर का एपेक्स सेंटर ट्रॉमा का मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल होगा। इसमें ट्रॉमा रोगियों के इलाज से संबंधित सभी विभाग होंगे। साथ ही छत पर एक हेलीपैड भी होगा जिस पर एयर एंबुलेंस उतर सकेगी। 16 मॉड्यूलर ओटी के साथ एक इंटरवेंशनल ओटी और एक कैथ लैब भी रहेगी। ट्रॉमा सेंटर बनने के बाद वर्तमान की तुलना में तीन गुना रोगियों को एक समय में भर्ती किया जा सकेगा।
एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के सारे बिंदुओं पर अंतिम निर्णय हो गया है। केंद्रीय एजेंसी वास्तु निधि छह करोड़ रुपये में ट्रॉमा सेंटर की डीपीआर तैयार करेगी। इससे आसपास के 17 जिलों के ट्रॉमा रोगियों को लाभ मिलेगा। एपेक्स ट्रॉमा सेंटर की डीपीआर के संबंध में चार राउंड बैठक के बाद अंतिम निर्णय योजना विभाग ने लिया है। निर्माण स्थल की मिट्टी की जांच रिपोर्ट आने के बाद यहां तीन बेसमेंट बनाए जाने का निर्णय लिया गया।
अभी औसत 300 रोगी अस्पताल में रहते हैं भर्ती
न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि अगले 10 सालों में रोगियों की बढ़ी हुई अनुमानित संख्या के आकलन के आधार पर ट्रॉमा सेंटर की क्षमता बढ़ाई गई है। यह क्षमता मौजूदा से तीन गुना अधिक रहेगी। अभी ट्रॉमा के औसत 300 रोगी अस्पताल में भर्ती रहते हैं। बेसमेंट के तीन तलों में दो पर चार पहिया, दो पहिया और एंबुलेंस की पार्किंग रहेगी। निचले तल पर शव गृह रहेगा।
17-18 जिलों के रोगियों को मिलेगा लाभ
इसके अलावा ब्लड बैंक सेंटर, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, चेंजिंग रूम आदि रहेंगे। उन्होंने बताया कि ट्रॉमा के रोगियों को एक छत के नीचे सभी विशेषज्ञताओं का इलाज मिलेगा। जीटी रोड के किनारे होने की वजह से ट्रॉमा रोगियों को लाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि इसके लाभ 17-18 जिलों के रोगियों को लाभ मिलेगा। तुरंत इलाज मिलने से हादसों के घायलों की जान बचेगी।
- ग्राउंड फ्लोरः रेड, यलो और ग्रीन ट्राइएज जोन होंगे। इनमें अतिगंभीर, गंभीर और सामान्य स्थिति के रोगियों को रखा जाएगा। यहीं से रोगियों को उनकी स्थिति के मुताबिक वार्डों में शिफ्ट किया जाएगा। ट्रॉमा ओपीडी चलेगी। 100 बेड आपदा प्रबंधन के लिए निश्चित रहेंगे।
- पहले से पांचवें फ्लोर तक: इमरजेंसी मेडिसिन, ट्रॉमेटोलॉजी, सामान्य सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, नाक, कान, गला रोग, दंत रोग, नेत्र रोग, सीवीटीएस, न्यूरो सर्जरी, अस्थि रोग, मेडिसिन विभाग होंगे। हर विभाग में निश्चित बेड रहेंगे।
- छठवां प्लोरः 16 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, दो हाइब्रिड ओटी, एक इंटरवेंशनल ऑपरेशन थिएटर और कैथ लैब होगी। 150 बेड का आईसीयू भी रहेगा। जरूरत पड़ने पर कुछ बेड विभागों मे शिफ्ट किए जा सकते हैं। वहीं, छठवें फ्लोर की छत पर हेलीपैड रहेगा। इस पर एयर एंबुलेंस उतरेगी। ट्रॉमेटोलॉजी में एमडी की दो सीटें शुरू की जाएंगी।