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दिल्ली से पैदल चल 8वें दिन पहुंचे चित्रकूट, बोले साहब दिल्ली नहीं कौशांबी दूर है, किसी तरह भेज दीजिए
Sun, 29 Mar 2020 12:12 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 29 Mar 2020 12:12 AM IST
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दिल्ली से पैदल चल आठवें दिन पहुंचे चित्रकूट
- फोटो : amar ujala
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चित्रकूट में लाॅकडाउन का असर कुछ ऐसा है कि शहर में आए दिन सुदूर क्षेत्र से पैदल चलकर आने वाले यात्रियों को देखा जा रहा है। चित्रकूट जिले की सीमा से सटे कौशांबी जिले के तीन मजदूरों की कहानी भी कुछ ऐसी ही दर्द भरी है।
२१ मार्च को कोई साधन न मिलने पर पैदल ही कौशांबी के लिए निकले तीन मजदूर जब आठवें दिन २८ मार्च को चित्रकूट पहुंचे तो यही बोले कि दिल्ली दूर नहीं उन्हें तो कौशांबी दूर लगता है। भूखे प्यासे व थके हारे इन मजदूरों का शहर के ट्रैफिक चौराहे पर पुलिस ने रोककर मेडीकल चेकअप कराया।
कई घंटे तक गुजारिश करने के बाद पुलिस ने तीनों को एक ट्रक में बैठाकर कौशांबी रवाना करा दिया। साहबपुर जिला कौशांबी निवासी राजाराम, रज्जन व बचोली दिल्ली में मजदूरी करते हैं। इन्होंने बताया कि जनता कफर्यू की घोषणा होते ही दिल्ली से ट्रेन बसें बंद हो गई।
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फैक्टी भी बंद हो गई तो अब भरण पोषण के लाले पड गए। उनके पास इतने रुपये भी नहंी थे कि किसी प्राइवेट वाहन को बुक करते। इसके बाद तीनों पैदल ही वहां से निकले। बाया झांसी होते हुए यह शनिवार को मुख्यालय पहुंचे थे।
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२१ मार्च को कोई साधन न मिलने पर पैदल ही कौशांबी के लिए निकले तीन मजदूर जब आठवें दिन २८ मार्च को चित्रकूट पहुंचे तो यही बोले कि दिल्ली दूर नहीं उन्हें तो कौशांबी दूर लगता है। भूखे प्यासे व थके हारे इन मजदूरों का शहर के ट्रैफिक चौराहे पर पुलिस ने रोककर मेडीकल चेकअप कराया।
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कई घंटे तक गुजारिश करने के बाद पुलिस ने तीनों को एक ट्रक में बैठाकर कौशांबी रवाना करा दिया। साहबपुर जिला कौशांबी निवासी राजाराम, रज्जन व बचोली दिल्ली में मजदूरी करते हैं। इन्होंने बताया कि जनता कफर्यू की घोषणा होते ही दिल्ली से ट्रेन बसें बंद हो गई।
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फैक्टी भी बंद हो गई तो अब भरण पोषण के लाले पड गए। उनके पास इतने रुपये भी नहंी थे कि किसी प्राइवेट वाहन को बुक करते। इसके बाद तीनों पैदल ही वहां से निकले। बाया झांसी होते हुए यह शनिवार को मुख्यालय पहुंचे थे।