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मां को खून न देता तो न पता चलता कि वह, उसकी बीवी और बेटा भी है "एचआईवी पाजिटिव"
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 30 Nov 2017 10:30 AM IST
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कहते हैं कि मां का आशीर्वाद झूठा नहीं जाता। एक बेटे ने मां को रक्तदान किया तो मां ने उसे दुआएं दे डालीं। बाद में पता चला कि युवक एचआईवी पाजिटिव है। उसकी पत्नी और तीन साल का बेटा भी इससे पीड़ित निकला। हालांकि सही समय और सही इलाज के साथ मां की दुआएं काम आईं और अब पूरा कुनबा खतरे से बाहर है।
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मां की जान बचाने की खातिर किया था रक्तदान
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अगस्त माह में जिले के अहिरोरी ब्लाक में एक मां की जान बचाने की खातिर जब डॉक्टर ने उसके लिए ब्लड की मांग की तो बेटा आगे आया और उसने ब्लड बैंक में जाकर अपना रक्त दिया और उसके बदले में एक यूनिट रक्त लेकर अपनी मां की जान बचाई।
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तीन साल का बेटा भी एचआईवी पाजिटिव
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कुछ ही दिन बाद उसके पास फोन आया कि उसका ब्लड एचआईवी पाजीटिव पाया गया है। इसके बाद जिला चिकित्सालय के आईसीटीसी सेंटर में परिवार के सदस्यों की भी जांच कराने को कहा गया। उसकी पत्नी के अलावा उसका तीन साल का बेटा भी एचआईवी पाजिटिव संक्रमित पाया गया।
रक्तदान न किया होता तो शायद कभी पता नहीं लग पाता
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सही समय पर चिंहित होने और सही इलाज मिल जाने के बाद वह सभी अब खतरे के बाहर हैं। आईसीटीसी के परामर्शदाता प्रहलाद सिंह गौड़ का कहना है कि यह प्रकरण वास्तव में बड़ा चर्चा का विषय बना रहा।
सिर्फ इसलिए नहीं कि बेटा, बहू व पोता एचआईवी पाजिटिव संक्रमित पाए गए बल्कि मां की खातिर बेटे ने यदि रक्तदान न किया होता तो शायद कभी पता नहीं लग पाता कि वह एचआईवी पाजिटिव है जिसके बाद नतीजा भयावह ही होता। यहां तक की समय निकल जाने के बाद पत्नी व बेटे के लिए भी जीवन बचा पाना मुश्किल था।
सिर्फ इसलिए नहीं कि बेटा, बहू व पोता एचआईवी पाजिटिव संक्रमित पाए गए बल्कि मां की खातिर बेटे ने यदि रक्तदान न किया होता तो शायद कभी पता नहीं लग पाता कि वह एचआईवी पाजिटिव है जिसके बाद नतीजा भयावह ही होता। यहां तक की समय निकल जाने के बाद पत्नी व बेटे के लिए भी जीवन बचा पाना मुश्किल था।
3156 पुरूष व 2089 महिलाओं ने कराई जांच
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जनवरी माह से लेकर नवंबर माह तक करीब पांच हजार से अधिक एचआईवी की जांचें हुईं जिसमें 19 लोग एचआईवी पाजिटिव पाए गए। इनमें 11 पुरुष व 8 महिलाएं शामिल हैं। आईसीटीसी सेंटर पर 3156 पुरूष व 2089 महिलाओं ने जांच कराई।