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Kannauj: दर्शन हो गए हैं अब आ रहे घर... पर आई मौत की खबर, मोनू ने आखिरी बार पत्नी से फोन पर कही थी ये बात

Mon, 05 Aug 2024 01:36 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 05 Aug 2024 01:36 PM IST
सार

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर हुए सड़क हादसे में मां-बेटे सहित तीन की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचे तो हर किसी की आंख नम हो गई।

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Three people including mother and son died in an accident on Lucknow-Agra Expressway
रोती बिलखती मोनू की पत्नी को संभालती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन कर घर लौट रहे श्रद्धालु इटावा के पास लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर हादसे का शिकार हो गए। हादसे में मां-बेटे सहित तीन की मौत हो गई। खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। हादसे में दम तोड़ने वाले मोनू ने पत्नी को कॉल करके कहा था कि दर्शन हो चुके हैं, वापसी कर रहे हैं। पत्नी उनके आने का इंतजार कर रही थी, लेकिन मौत की खबर आई। मोनू की आखिरी बार फोन पर अपनी पत्नी से बात हुई थी।

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तालग्राम के गधैइया ऊसर गांव निवासी मोनू सिंह (35) परचून की दुकान चलाते थे। शुक्रवार को मोनू अपनी मां चंदादेवी (70), पुत्र प्रिंस उर्फ रिंकू (13), पास के हिम्मतनगला गांव निवासी मोहित यादव (30) और तिसौली गांव निवासी कस्बा तालग्राम में मेडिकल स्टोर संचालक सचिन यादव (24), उसका भाई प्रद्युम्न (15) के साथ राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन करने के लिए गए थे।
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दर्शन कर वापस आते समय शनिवार रात आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर इटावा में उनकी कार बस से टकरा गई। हादसे में मां-बेटा के साथ ही सचिन की मौत हो गई और तीन लोग घायल हो गए। पत्नी प्रेमा ने बताया कि शनिवार शाम को पति ने बताया था कि दर्शन हो गए हैं। घर आ रहे हैं, लेकिन उनके मौत की खबर आई। इसके बाद से वह बेसुध हो गई।

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एक साथ गांव पहुंचे तीन शव, हर आंख नम
रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचे तो हर किसी की आंख नम हो गई। दोनों परिवारों के लोगों की आंख से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। एक साथ मां-बेटे की अर्थी उठी तो अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ा। देर शाम मां बेटे का अंतिम संस्कार गंगा घाट पर किया गया। जबकि सचिन के पिता अरविंद यादव ने बताया कि उसकी अभी शादी नहीं हुई थी। ब्लाॅक प्रमुख सुमन सिंह और उनके पति राजीव सिंह उर्फ पुच्ची ठाकुर इटावा पहुंचे। घायलों का हालचाल लिया और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

बच गई इकलौते बेटे की जान
बालाजी दर्शन करने अपने पिता और दादी के साथ परिवार में इकलौता बेटा प्रिंस भी गया था। दर्शन कर लौटते समय जब हादसा हुआ, उस समय प्रिंस अपनी दादी के पास बैठा था। हादसे में पिता और दादी की जान चली गई, लेकिन ईश्वर की कृपया से प्रिंस के मामूली चोटें ही आईं। वहीं, परिजनों ने बताया कि मोनू के पिता का कई साल पहले निधन हो गया था। उनके बाद बड़ा भाई राहुल परिवार की देखरेख करता था। छह साल पहले राहुल ने आत्महत्या कर ली थी। तब से पूरे परिवार की जिम्मेदार मोनू पर थी। मोनू की पत्नी प्रेमा ने बताया कि ससुर-जेठ के बाद पति और सास भी हमेशा के लिए अकेला छोड़कर चले गए।

बड़े भाई का शव आया, छोटा लड़ रहा मौत से जंग
घायल प्रद्युमन सैफई अस्पताल में जीवन मौत से संघर्ष कर रहा है। उसकी जिद के चलते बड़े भाई सचिन उसे दर्शन कराने के लिए साथ लेकर गया था। हादसे में बड़े भाई की जान जान चली गई। जबकि छोटा भाई अस्पताल में जिंदगी से जंग लड़ रहा है।
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