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Unnao: डिप्थीरिया से तीन बच्चों की मौत…छह चपेट में, सीएमओ ने स्वास्थ्य टीम को भेजा गांव, शुरू कराई जांच

Fri, 16 Aug 2024 09:48 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 16 Aug 2024 09:48 PM IST
सार

Unnao News: जिले के अलग-अलग ब्लॉकों के तीन गांवों में डिप्थीरिया से तीन बच्चों की मौत हो गई, जबकि छह और चपेट में हैं। सीएमओ ने स्वास्थ्य टीम को गांव भेजकर जांच शुरू कराई है।

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Three children died of diphtheria and six affected, CMO sent health team to the village, started investigation
मृतका शिवन्या के घर में जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम - फोटो : amar ujala

विस्तार

उन्नाव नवाबगंज और असोहा ब्लॉक के तीन गांवों में डिप्थीरिया (गला घोंटू) बीमारी से तीन बच्चों की मौत हो गई। एक मृतका के भाई-बहन सहित छह बच्चे संक्रमण की चपेट में आए। इलाज के बाद अब बच्चे स्वस्थ हैं। बीमारी का पता चलने पर शुक्रवार सीएचसी प्रभारी के नेतृत्व में डब्ल्यूएचओ की टीम गांव पहुंची और घर-घर जाकर बच्चों की जांच कर रही है।

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नवाबगंज ब्लॉक क्षेत्र के सतगुरखेड़ा गांव निवासी शिवन्या (6) पुत्री गोविंद को गले में खरास के साथ बुखार व खांसी की शिकायत पर परिजन निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। सुधार न होने पर 12 अगस्त को लखनऊ के लोकबंधु अस्पताल लेकर गए थे। डॉक्टर ने गला घोंटू बीमारी की आशंका जताते हुए लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था।
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यहां जांच में डिप्थीरिया की पुष्टि हुई। 15 अगस्त की दोपहर इलाज के दौरान शिवन्या की मौत हो गई। शिवन्या की बड़ी बहन सेजल (9) में भी लक्षण दिखने पर स्वास्थ्य टीम को भेजा गया। नवाबगंज ब्लॉक के गांव बजेहरा निवासी शगुन (12) पुत्री सुनील कुमार को सात अगस्त को बुखार व गले में दर्द होने पर परिजन सीएचसी लेकर गए थे। डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर किया था।

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गले में दर्द व सूजन की शिकायत हुई
जांच में डिप्थीरिया की पुष्टि होने पर कानपुर ने हैलट भेजा था, जहां आठ अगस्त को इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, असोहा ब्लॉक के दरियारखेड़ा गांव निवासी आरती (7) पुत्री रामेश्वर को चार अगस्त को बुखार आने के साथ गले में दर्द व सूजन की शिकायत हुई। परिजन निजी अस्पताल लेकर गए। डॉक्टर ने इलाज किया। सुधार न देख सरस्वती मेडिकल कॉलेज लाए थे।।

इलाज के दौरान हो गई थी मौत
वहां जांच में डिप्थीरिया की पुष्टि होने पर लखनऊ किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज भेजा था। सात अगस्त को वहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वहीं रामेश्वर का बड़ा बेटा मोहित (12), पड़ोसी राजोले के दो बेटे शुभ (7) व राजन (4), सहरावां गांव निवासी शिवा (6) पुत्र लक्ष्मण को भी गले में खरास व दर्द की शिकायत होने पर जिला अस्पताल भेजा गया।

सीएमओ ने जांच के लिए टीम को भेजा गांव
वहां इलाज में सुधार होने पर परिजन घर ले आए। उमर्रा गांव निवासी अंकित (4) पुत्र संदीप का इसी बीमारी के चलते किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। उसकी हालत में सुधार है। गलाघोंटू बीमारी से तीन बच्चों की मौत और एक ही परिवार के तीन बच्चों को यह दिक्कत होने की सूचना पर सीएमओ ने एसीएमओ डॉ. नरेंद्र सिंह, नवाबगंज सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश को सतगुरखेड़ा गांव भेजा है।

बच्चों की जांच के साथ दवा दी जा सके
सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश ने बताया कि बजेहरा गांव की मरीज शगुन इलाज के लिए आई थी। उसे डिप्थीरिया की पुष्टि होने पर कानपुर हैलट भेजा गया था। उसकी मौत हुई है। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि मामला जानकारी में आया है। स्वास्थ्य टीम को गांव भेजा गया है, ताकि बच्चों की जांच कराने के साथ उन्हें दवा दी जा सके।

डिप्थीरिया के लक्षण
सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश के मुताबिक आमतौर पर बैक्टीरिया के आपके शरीर में प्रवेश करने के एक से सात दिन बाद लक्षण दिखाई देते हैं, जिसमें बुखार और ठंड लगना, गले में खराश, स्वर बैठना, निगलने में दर्द, लार टपकना, त्वचा का रंग नीला पड़ना, नाक से खूनी, पानी जैसा रिसाव, सांस लेने में समस्या, जिसमें सांस लेने में कठिनाई, तेज सांस लेना, ऊंची आवाज में सांस लेना शामिल है। त्वचा पर घाव भी हो सकते हैं।

डिप्थीरिया से बचाव
सीएमओ के मुताबिक, मरीज को देखने के बाद डॉक्टर को पता चल जाता है कि वह इस बीमारी से पीड़ित है या नहीं। वह जांच कराता है लेकिन इलाज शुरू कर देता है। डिप्थीरिया एंटीटॉक्सिन को मांसपेशियों में या अंतःशिरा लाइन के माध्यम से इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है। फिर संक्रमण का इलाज पेनिसिलिन और एरिथ्रोमाइसिन जैसे एंटीबायोटिक्स से किया जाता है। एंटीटॉक्सिन लेते समय आपको अस्पताल में रहना पड़ सकता है

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