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बॉटेनिकल गार्डेन फर्जीवाड़ा: हाईकोर्ट के फैसले को ताक पे रख केडीए ने काट दिए हजारों हरे-भरे पेड़
Tue, 21 May 2019 06:14 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 21 May 2019 06:14 PM IST
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बॉटेनिकल गार्डेन (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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केडीए का बॉटेनिकल गार्डेन पहले से ही विवादों में है। ऐसे में केडीए का एक कारनामा और सामने आ है। जिसमें विभाग ने गार्डेन के नाम पर गंगा किनारे अवैध रूप से हजारों पौधों को काट डाला है। इसमें वन विभाग की भी मिलीभगत की आशंका है। खुद को फंसता देख दोनों विभागों ने इससे संबंधित विवरण भी दोस्त सेवा संस्थान को उपलब्ध नहीं कराया और न ही मौका मुआयना कराया। पेड़ न काटने की शर्त पर हाईकोर्ट ने गार्डेन का निर्माण करने की अनुमति केडीए को दी थी। हाईकोर्ट ने करीब एक हजार पेड़ शिफ्ट करने का भी आदेश दिया था।
वन विभाग ने गंगा किनारे 8800 पौधे रोपित किए थे। केडीए ने 2014 में वहां बॉटेनिकल गार्डेन निर्माण की योजना बनाई। उस समय वन विभाग से 8065 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी। वन विभाग ने भी नियमों को ताक पर रखकर इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटने की अनुमति 25 अगस्त 2015 को दे दी थी, वह भी पर्यावरण विभाग की अनुमति लिए बिना। केडीए ने 18 सितंबर 2015 को इन पेड़ों को काटने के लिए विज्ञापन जारी किया था। पेड़ों की अनुमानित कीमत 6,45,775 रुपये आंकी गई थी।
इस बीच दोस्त सेवा संस्थान के रवि शुक्ला आदि ने उच्च न्यायालय में इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान 14 सितंबर 2015 को स्टे देते हुए पेड़ काटने पर रोक लगाई। सुनवाई के बाद 26 अक्तूबर 2016 को न्यायालय ने फाइनल डिसीजन में कहा कि केडीए 1132 पेड़ों को दोस्त सेवा संस्थान को बताकर शिफ्ट करे, पर ऐसा नहीं किया गया। हजारों पेड़ काट दिए गए। संस्था के संज्ञान में भी नहीं दिया गया।
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इसका पता चलने पर संस्था ने 7 जनवरी 2017 को केडीए की तत्कालीन उपाध्यक्ष जयश्री भोज और उसी साल 9 जनवरी को वन विभाग को पत्र रिसीव कराकर पेड़ों का पूरा ब्यौरा और संस्था के सदस्यों को मुआयना कराने का आग्रह किया, पर न तो मुआयना कराया न ही जवाब दिया। रौबी शर्मा के अनुसार वहां आधे पेड़ भी नहीं बचे। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।
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वन विभाग ने गंगा किनारे 8800 पौधे रोपित किए थे। केडीए ने 2014 में वहां बॉटेनिकल गार्डेन निर्माण की योजना बनाई। उस समय वन विभाग से 8065 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी। वन विभाग ने भी नियमों को ताक पर रखकर इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटने की अनुमति 25 अगस्त 2015 को दे दी थी, वह भी पर्यावरण विभाग की अनुमति लिए बिना। केडीए ने 18 सितंबर 2015 को इन पेड़ों को काटने के लिए विज्ञापन जारी किया था। पेड़ों की अनुमानित कीमत 6,45,775 रुपये आंकी गई थी।
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इस बीच दोस्त सेवा संस्थान के रवि शुक्ला आदि ने उच्च न्यायालय में इसके खिलाफ याचिका दायर की थी। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान 14 सितंबर 2015 को स्टे देते हुए पेड़ काटने पर रोक लगाई। सुनवाई के बाद 26 अक्तूबर 2016 को न्यायालय ने फाइनल डिसीजन में कहा कि केडीए 1132 पेड़ों को दोस्त सेवा संस्थान को बताकर शिफ्ट करे, पर ऐसा नहीं किया गया। हजारों पेड़ काट दिए गए। संस्था के संज्ञान में भी नहीं दिया गया।
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इसका पता चलने पर संस्था ने 7 जनवरी 2017 को केडीए की तत्कालीन उपाध्यक्ष जयश्री भोज और उसी साल 9 जनवरी को वन विभाग को पत्र रिसीव कराकर पेड़ों का पूरा ब्यौरा और संस्था के सदस्यों को मुआयना कराने का आग्रह किया, पर न तो मुआयना कराया न ही जवाब दिया। रौबी शर्मा के अनुसार वहां आधे पेड़ भी नहीं बचे। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है।