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सेना में शामिल होगा उल्टा उड़ने वाला हेलीकॉप्टर, खासियत जानकर हैरान रह जाएंगे
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 05 Aug 2018 06:30 PM IST
सार
- एचएएल ने बंगलुरू में किया ट्रायल, आईआईटी कानपुर और बांबे के विशेषज्ञों ने तैयार किया है
- ऑटो पायलट है, अब 200 किलोग्राम और पांच टन का हेलीकॉप्टर बनाने की तैयारी
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आईआईटी कानपुर और आईआईटी बांबे के विशेषज्ञों द्वारा मिलकर बनाए गए देश के पहले नान-लिनियर ऑटो पायलट हेलीकॉप्टर को सेना के तीनों विंग में शामिल किया जाएगा। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) बंगलुरू ने हेलीकॉप्टर का शुक्रवार को सफलतापूर्वक ट्रायल किया।
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इसकी खासियत है कि इसे बगैर पायलट के भी चलाया जा सकता है। यही नहीं, तेज तूफान और बर्फबारी को भी झेलने की क्षमता इस हेलीकॉप्टर में है। दुर्गम इलाकों में सेना के लिए रसद और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने, निगरानी करने के मकसद से इसे विकसित किया गया है। विपरीत परिस्थिति में हेलीकॉप्टर उल्टा होने के बावजूद आसानी से उड़ सकेगा, क्रैश नहीं होगा।
इस तकनीक के हेलीकॉप्टर को देश में पहली बार आईआईटी कानपुर के प्रो. मंगल कोठारी, प्रो. अभिषेक रॉय, आईआईटी बांबे के प्रो. रवि बनावर और आईआईटी कानपुर के पीएचडी स्कॉलर निधिश सिराज ने मिलकर तैयार किया है।
इस तकनीक के हेलीकॉप्टर को देश में पहली बार आईआईटी कानपुर के प्रो. मंगल कोठारी, प्रो. अभिषेक रॉय, आईआईटी बांबे के प्रो. रवि बनावर और आईआईटी कानपुर के पीएचडी स्कॉलर निधिश सिराज ने मिलकर तैयार किया है।
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प्रो. अभिषेक ने बताया कि अभी जिस हेलीकॉप्टर का ट्रायल हुआ है, उसका वजन 14 किलोग्राम है जो 2.5 किलोग्राम वजन उठा ले सकता है। अब पहले चरण में 200 किलोग्राम का हेलीकॉप्टर तैयार किया जाएगा जो कम से कम 50 किलोग्राम का वजन ले जा सकेगा। इसमें सफलता मिलने के बाद पांच टन के हेलीकॉप्टर का निर्माण शुरू होगा जो कम से कम एक हजार किलोग्राम का वजन आसानी से उठा ले जा सकेगा। इसके अलावा इसमें 4 से 6 लोग भी बैठ सकेंगे।
सेना के इस काम आएगा यह हेलीकॉप्टर
- दूर-दराज इलाकों में जवानों को किसी भी तरह की मदद पहुंचाने के लिए जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल होता है।
- मेडिकल सामग्री को दुर्गम जगहों पर पहुंचाने के लिए।
- बॉर्डर पर कैमरे और लाइट के जरिए निगरानी रखने के लिए।
- युद्घ के दौरान बगैर पायलट के हमला करने के काम आएगा।
सेना के इस काम आएगा यह हेलीकॉप्टर
- दूर-दराज इलाकों में जवानों को किसी भी तरह की मदद पहुंचाने के लिए जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल होता है।
- मेडिकल सामग्री को दुर्गम जगहों पर पहुंचाने के लिए।
- बॉर्डर पर कैमरे और लाइट के जरिए निगरानी रखने के लिए।
- युद्घ के दौरान बगैर पायलट के हमला करने के काम आएगा।
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दुनिया का पहला हेलीकॉप्टर जो उल्टा उड़ेगा
यह दुनिया का पहला ऐसा हेलीकॉप्टर है जो 360 डिग्री तक घूमते हुए भी उड़ सकेगा। अभी तक ऐसा हेलीकॉप्टर दुनिया भर में कहीं नहीं बनाया गया है। प्रो. अभिषेक के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मुसीबत के समय बचाने में भी इस हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया जा सकता है। अभी तक विपरीत परिस्थितियों में जो हेलीकॉप्टर उड़ाए जाते हैं उनके क्रैश होने की आशंकाएं भी ज्यादा होती हैं। जबकि इसके क्रैश होने की आशंका 90 प्रतिशत कम है।
जियोमेट्रिक कंट्रोल तकनीक का हुआ प्रयोग
प्रो. अभिषेक ने बताया कि इस हेलीकॉप्टर को तैयार करने के लिए प्रो. मंगल कोठारी और प्रो. रवि ने जियोमेट्रिक कंट्रोल तकनीक का प्रयोग किया है। इसमें ऐसे फीचर दिए गए हैं जिसे तेज बारिश, हवा, तूफान, बर्फबारी जैसी परिस्थिति में इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। इस तकनीक को अब साधारण हेलीकॉप्टर में भी प्रयोग करने की कोशिश की जा रही है।
यह दुनिया का पहला ऐसा हेलीकॉप्टर है जो 360 डिग्री तक घूमते हुए भी उड़ सकेगा। अभी तक ऐसा हेलीकॉप्टर दुनिया भर में कहीं नहीं बनाया गया है। प्रो. अभिषेक के मुताबिक पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मुसीबत के समय बचाने में भी इस हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया जा सकता है। अभी तक विपरीत परिस्थितियों में जो हेलीकॉप्टर उड़ाए जाते हैं उनके क्रैश होने की आशंकाएं भी ज्यादा होती हैं। जबकि इसके क्रैश होने की आशंका 90 प्रतिशत कम है।
जियोमेट्रिक कंट्रोल तकनीक का हुआ प्रयोग
प्रो. अभिषेक ने बताया कि इस हेलीकॉप्टर को तैयार करने के लिए प्रो. मंगल कोठारी और प्रो. रवि ने जियोमेट्रिक कंट्रोल तकनीक का प्रयोग किया है। इसमें ऐसे फीचर दिए गए हैं जिसे तेज बारिश, हवा, तूफान, बर्फबारी जैसी परिस्थिति में इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। इस तकनीक को अब साधारण हेलीकॉप्टर में भी प्रयोग करने की कोशिश की जा रही है।