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यहां 'मौत की छत' के नीचे पढ़ रहे तमाम बच्चे, किसी को नहीं है इनका ख्याल

Thu, 02 Aug 2018 05:30 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 02 Aug 2018 05:30 PM IST
सार

- कई स्कूलों की छत से बह रहा बारिश का पानी, गिर रहा प्लास्टर 
- असोहा क्षेत्र के तीन परिषदीय स्कूलों के भवन हो चुके खस्ताहाल 

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These schools have the risk of loss due to rain
स्कूल का हाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी में उन्नाव जिले के कई परिषदीय स्कूलों के भवन मरम्मतीकरण के अभाव में खस्ताहाल हो चुके हैं। भवन की छतें बारिश में टपकने के साथ ही प्लास्टर के बड़े बड़े टुकड़े टूटकर कमरों की फर्श पर गिर रहे हैं।
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जिससे सैकड़ों नौनिहाल बच्चों की जान सांसत में हैं। बीते 48 घंटे से हो रही झमाझम बारिश से जर्जर भवनों का अस्तित्व खतरे में है। 

जिले में 2309 प्राथमिक व 839 जूनियर स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में करीब 2.38 लाख से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सरोसी, कर्ण, सफीपुर, मियांगंज, असोहा, हिलौली, गंजमुरादाबाद ब्लाक के कई स्कूलों के भवन समय से मरम्मतीकरण न होने से जर्जर हो रहे हैं।
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These schools have the risk of loss due to rain
स्कूल में भरा पानी - फोटो : अमर उजाला
स्कूलों की फर्श टूटने के साथ ही छतों में दरारें पड़ना सामान्य नजारा है। बीते 48 घंटे के बारिश में कई स्कूलों की छतों से पानी का तेज रिसाव हो रहा है।

साथ ही छतों से प्लास्टर के टुकड़े गिरने से स्लेप की सरिया तक बाहर निकल आई हैं। जिससे भवन की मजबूती खतरे में है। असोहा ब्लाक के मंगतखेड़ा स्थित प्राथमिक व जूनियर विद्यालय का बारिश में बुरा हाल हो गया है।

पूरी इमारत टपक रही है। साथ ही प्राथमिक विद्यालय खत्रिनखेड़ा का भवन भी जर्जर हो रहा है। भवन निर्माण में हुए बंदरबांट की पोल बारिश ने खोल दी है।

These schools have the risk of loss due to rain
स्कूल की छत का हाल - फोटो : अमर उजाला
जर्जर स्कूल भवनों की छत के नीचे पढ़ाई कर रहे सैकड़ों छात्र छात्राओं की जिंदगी खतरे में है। और अधिकारी चुप्पी साधे हैं। बीएसए बीके शर्मा ने बताया कि जर्जर भवनों की जानकारी नहीं है।

बीईओ के माध्यम से चेकिंग अभियान चलाकर जर्जर भवनों को चिन्हित कर मरम्मतीकरण कराया जाएगा। जो बहुत ही ज्यादा जर्जर होंगे उन्हें ढहाए जाने की कार्रवाई की जाएगी।
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