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बालू, धूल व केमिकल से बन रहा गुलाल-रंग, जानिए त्वचा व आंखों के लिए कितने खतरनाक हैं ये
Tue, 12 Mar 2019 04:30 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 12 Mar 2019 04:30 PM IST
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खुले मैदान में मिलावटी गुलाल बनाते मजदूर
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में बड़ी मात्रा में केमिकल युक्त रंग व बालू-धूल मिलाकर गुलाल तैयार किया जा रहा है। यह त्वचा के साथ आंखों की रोशनी पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में जितना हो, ऐसे रंगों से बचें।
जाजमऊ, बिधनू, चकेरी आदि जगहों पर केमिकल वाला रंग धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। रोजाना एक से दो ट्रक माल सप्लाई किया जा रहा है।
बिधनू के न्यू अजाद नगर में स्थित रंग की फैक्ट्री में खुलेआम बालू, डस्ट व केमिकल से गुलाल व रंग तैयार हो रहा है। इसकी कीमत थोक में मात्र 30 रुपये प्रति किलो है। मार्केट में यही गुलाल 60 से 70 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है।
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जाजमऊ, बिधनू, चकेरी आदि जगहों पर केमिकल वाला रंग धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। रोजाना एक से दो ट्रक माल सप्लाई किया जा रहा है।
बिधनू के न्यू अजाद नगर में स्थित रंग की फैक्ट्री में खुलेआम बालू, डस्ट व केमिकल से गुलाल व रंग तैयार हो रहा है। इसकी कीमत थोक में मात्र 30 रुपये प्रति किलो है। मार्केट में यही गुलाल 60 से 70 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है।
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मिलावटी गुलाल बनाने के लिए बालू व डस्ट सु्खाया जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
ये मिलाते हैं
एक किलो गुलाल तैयार करने में चार सौ ग्राम बालू, चार सौ ग्राम डस्ट व दो सौ ग्राम अरारोट व केमिकल लगता है। गुलाल में चमक लाने के लिए बालू मिलाई जाती है। साथ ही पत्थर की डस्ट का उपयोग होता है जो त्वचा को खराब करती है।
12 से अधिक शहरों में सप्लाई
रोजाना एक फैक्ट्री से एक से दो ट्रक माल दूसरे शहरों को भेजा जा रहा है। कानपुर के अलावा, कानपुर देहात कन्नौज, उन्नाव, शुक्लागंज, फतेहपुर, घाटमपुर, हमीरपुर समेत अन्य जगहों पर इसकी सप्लाई हो रही है।
एक किलो गुलाल तैयार करने में चार सौ ग्राम बालू, चार सौ ग्राम डस्ट व दो सौ ग्राम अरारोट व केमिकल लगता है। गुलाल में चमक लाने के लिए बालू मिलाई जाती है। साथ ही पत्थर की डस्ट का उपयोग होता है जो त्वचा को खराब करती है।
12 से अधिक शहरों में सप्लाई
रोजाना एक फैक्ट्री से एक से दो ट्रक माल दूसरे शहरों को भेजा जा रहा है। कानपुर के अलावा, कानपुर देहात कन्नौज, उन्नाव, शुक्लागंज, फतेहपुर, घाटमपुर, हमीरपुर समेत अन्य जगहों पर इसकी सप्लाई हो रही है।
यह है नुकसान
पानी वाला रंग किसी ने चेहरे पर ज्यादा रगड़ दिया तो चेहरा कट सकता है। रंग आंखों में पड़ जाए तो रोशनी जा सकती है। अगर यह रंग शरीर के अंदर चला गया तो किडनी पर भी असर डाल सकता है। इसका केमिकल काफी खतरनाक होता है और शरीर के अंदर पहुंचने के बाद यह नसें काट देता है।
ऐसे करें बचाव
होली खेलने से पहले पूरे शरीर पर तेल या क्रीम से अच्छे से मालिश करें ताकि रंग आपकी त्वचा पर सीधे अटैक न करे। होली खेलते समय चश्मा लगाएं। रंग खेलते समय यदि आप पानी पीते हैं तो उससे पहले कुल्ला कर लें।
पानी वाला रंग किसी ने चेहरे पर ज्यादा रगड़ दिया तो चेहरा कट सकता है। रंग आंखों में पड़ जाए तो रोशनी जा सकती है। अगर यह रंग शरीर के अंदर चला गया तो किडनी पर भी असर डाल सकता है। इसका केमिकल काफी खतरनाक होता है और शरीर के अंदर पहुंचने के बाद यह नसें काट देता है।
ऐसे करें बचाव
होली खेलने से पहले पूरे शरीर पर तेल या क्रीम से अच्छे से मालिश करें ताकि रंग आपकी त्वचा पर सीधे अटैक न करे। होली खेलते समय चश्मा लगाएं। रंग खेलते समय यदि आप पानी पीते हैं तो उससे पहले कुल्ला कर लें।