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दिमाग में कीड़ा दे रहा झटका
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Sun, 31 Jan 2016 01:46 AM IST
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बात करते-करते सब कुछ भूल जाएं, हाथों और पैरों में ऐंठन या फिर अचानक बेहोश होने पर लापरवाही कतई न बरतें। शहरियों पर मिर्गी (इपिलेप्सी) का अटैक बढ़ गया है।
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दिमाग में घूमता कीड़ा (न्यूरो सिस्टी सरकोसिस, इससे दिमाग में गांठ बन जाती है) अचानक उन्हें बेहोश कर रहा है। हैलट के डॉक्टरों का कहना है कि कम उम्र के लोगों में दिमागी कीड़े के ज्यादातर केस आ रहे हैं।
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इनमें महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। डॉक्टरों का कहना है कि हरी सब्जियों के अलावा धनियां को ठीक तरीके से न धुले जाने की वजह से बीमारी बढ़ रही है।
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लक्षण
lबात करते हुए अचानक सब कुछ भूल जाना।
बॉडी के किसी अंग की मांसपेशियां अचानक फड़कना।
हाथ-पैर में अचानक ऐंठन होना।
तेज रोशनी में आंखों में परेशानी होना।
अचानक बेहोश हो जाना।
खुले में शौच बड़ा कारण
न्यूरो सिस्टी सरकोसिस पेट के केंचुए (फीताकृमि) में मौजूद होता है। यह मल के रास्ते शरीर से निकलता है। खेत में शौच करने पर यह जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियों पर साग, धनियां, ककड़ी, गाजर आदि में चिपक जाता है। इन सब्जियों को ठीक से धुलकर या उबालकर न खाने वालों के पेट के रास्ते यह कीड़ा दिमाग में चला जाता है।
हैलट में मिर्गी के मरीजों का डाटा बनना शुरू
कानपुर। हैलट में मिर्गी (इपिलेप्सी) के मरीजों का डाटा बनना शुरू हो गया है। शनिवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने ओपीडी में कैंप का शुभारंभ किया। कैंप में 400 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें परामर्श दिया गया।
एक विशेष साफ्टवेयर में मरीजों की पूरी हिस्ट्री फीड कर उन्हें आईडी दी जाएगी। आईडी से ओपीडी में बैठे डॉक्टर मरीज की पूरी जानकारी कंप्यूटर पर ही देख लेंगे। मरीज को बार-बार पर्चा बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने बताया कि मरीजों में अलग-अलग तरह के मिर्गी के लक्षण होते हैं।
इसलिए तय हुआ है कि हैलट ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों का डाटा तैयार किया जाए। इसमें मरीज का नाम, पता, मिर्गी के दौरे का प्रकार, कितने समय तक का दौरा, कब से मिर्गी, कौन सी दवाएं चल रही हैं, कब तक चलेगी दवा, मोबाइल नंबर आदि का ब्योरा दर्ज होगा।
इंडोर गेम भी विटामिन डी की कमी की वजह
कानपुर। बच्चों में विटामिन डी की कमी का कारण अस्तव्यस्त जीवनशैली और इंडोर गेम भी हो सकते हैं। यह कहना है।
पीडियाट्रिक गैस्ट्रोइंट्रेटोलॉजिस्ट डॉ. जया अग्रवाल का। डॉ. अग्रवाल शनिवार को एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के तत्वावधान में ‘बच्चों में विटामिन डी व कैल्शियम की कमी’ विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रही थीं।
बाल हार्मोन रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग वाजपेई ने कहा कि शरीर में विटामिन डी की कमी का सबसे बड़ा कारण धूप में कम समय रहना है। इस दौरान संयोजक डॉ. विवेक सक्सेना, अध्यक्ष डॉ. नवीन सहाय, सचिव डॉ. केके डोकनिया, डॉ. एमएम मैथानी, डॉ. राजतिलक, डॉ. सुनील तनेजा, डॉ. योगेश टंडन, डॉ. यशवंत राव आदि मौजूद रहे।