पूछ रहा रूरा, आरओबी कब होगा पूरा: मार्च 2019 में शुरू हुआ काम, 2022 में होना था पूरा, चौथे साल भी सपना अधूरा
रूरा कस्बे के लोगों को जाम से निजात दिलाने वाले आरओबी का काम चार साल बाद भी अधूरा है। इसका काम मार्च 2019 में शुरू हुआ था, जो 2022 में पूरा होना था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर देहात में रूरा कस्बे के लोगों को क्रॉसिंग बंद होने पर जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए मार्च 2019 में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कराया गया। अधिकारियों ने इसके तीन साल मार्च 2022 में पूरा होने का लोगों को सपना दिखाया, लेकिन चौथे साल में भी काम अधूरा है।
निर्माण कार्य की कछुआ गति से लोगों का इंतजार अभी और बढ़ गया है। वहीं, कई बार रेलवे लाइन से एक के बाद एक ट्रेनें निकलने से क्रॉसिंग आधे से पौन घंटे तक बंद हो जाते है। इससे लोग यहां जाम में फंसकर बेहाल होते रहते हैं। क्रॉसिंग के बाद बदहाल मार्ग से उड़ती धूल भी फेफड़े खराब कर रही है।
इससे लोगों के जुबान पर एक ही सवाल रहता है कि आखिर आरओबी कब पूरा होगा। माती जिला मुख्यालय को झींझक, रसूलाबाद, शिवली आदि स्थानों से जोड़ने वाले रूरा माती मार्ग पर रेलवे क्रासिंग हैं। यहां आसपास के लोगों की अधिक आवाजाही होने के चलते रेलवे ओवरब्रिज की मांग हो रही थी।
रेलवे क्रॉसिंग पर लगती हैं लंबी कतारें
इसके बाद में डेडीकेटेड फ्रंट कारीडोर की तीसरी और चौथी लाइन बन गई तो दिल्ली हावड़ा रेल रूट पर ट्रेनों की संख्या और बढ़ गई। अब कई बार आधे से पौन घंटे तक फाटक बंद कर ट्रेनें निकाली जाती हैं। ऐसे में रेलवे क्रॉसिंग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
2019 में शुरू हुआ था काम
फाटक खुलने पर यहां वाहन आपस में उलझ जाते हैं और जाम लगता है। इससे वाहन सवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिमी केबिन पर ओवरब्रिज की मांग शुरू हुई, तो शासन से मंजूरी मिलने पर 35.65 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2019 में काम शुरू कराया गया।
सुस्ती से चल रहा है काम
कार्यदायी संस्था उप्र सेतु निर्माण निगम की ओर से तीन साल में काम पूरा होने की बात कही गई थी। लेकिन काम बेहद सुस्त गति से चला। अब चौथे साल में भी काम अधूरा पड़ा है। इससे रेलवे फाटक पर जाम आम है। कई बार एंबुलेंस फंसने से मरीजों की जान पर बन आती है।
ठीक से नहीं कराया सर्विस लेन का समतलीकरण
आरओबी के पिलर बनाने में सड़क संकरी हो गई, तो सेतु निगम ने सर्विस लेन को दुरुस्त कराए बिना ही काम कराया। अफसरों के निरीक्षण में लोगों ने शिकायत की। अफसरों की फटकार मिली, तो कार्यदायी संस्था ने सर्विस लेने पर दिखावा भर का समतलीकरण करा दिया लेकिन ठीक से सड़क नहीं बनाई।
एक नजर में रूरा आरओबी
- 32 पिलर बनाए जाने हैं।
- दो पिलर का कार्य अभी बाकी है।
- चार पिलर रेलवे को बनाने हैं।
- 35.65 करोड़ रुपये लागत है।
- 855 मीटर कुल लंबाई है।
धूल के गुबार से दुकानदार व राहगीर परेशान
रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में सीसी सड़क उखाड़ दी गई है। नगर पंचायत कार्यालय के पास सड़क का एक हिस्सा उखाड़ कर काम करीब एक माह से बंद है। अब वाहन एक संकरी पटरी से ही निकल रहे हैं। दूसरी तरफ का फुटपाथ तक खाली नहीं कराया गया है। मौजूदा समय में सहालगों का दौर चल रहा है।
काम में देरी पर अफसरों का तर्क
प्रोजेक्ट मैनेजर केएन ओझा ने बताया कि लोगों की आवाजाही के बीच काम अधिक सतर्कता से कराना पड़ता है। इसमें समय अधिक लगता है। जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी शीश कुमार ने बताया कि रेलवे के निर्माण वाला डिजाइन अब फाइनल हो गया है। रेलवे अपने हिस्से का काम जुलाई में पूरा कर लेगा।
रूरा से होकर औरैया व बिल्हौर जाते लोग
रूरा का यह मार्ग झींझक, रसूलाबाद, बनीपारा, मिंडाकुआं शिवली, मैथा जिला मुख्यालय से जुड़ा है। यहां से लोग बेला, बिधूना होते बिल्हौर से कन्नौज और कंचौसी होते हुए औरैया भी जाते हैं। हर दिन छोटे बड़े करीब पांच हजार से अधिक वाहन निकलते हैं।
राष्ट्रपति ने भी कहा था जल्द बना दें पुल
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 जून 2021 को रूरा स्टेशन पर विशेष ट्रेन से आए थे। यहां उन्होंने लोगों से रूबरू होकर यादें साझा की थीं। उन्होंने साथ आए रेलवे के डीआरएम व अन्य अफसरों से कहा था कि वह भी कई बार रूरा की क्रासिंग पर जाम में फंस चुके हैं। यहां ओवरब्रिज बन रहा है यह प्रशंसा योग्य है। उन्होंने कहा था कि रेलवे ओवरब्रिज जल्द बने इसके लिए रेलवे व अन्य अफसर प्रयास करें।
आरओबी निर्माण का काम मार्च 22 में पूरा होना था। वर्ष 2020 में कोविड की वजह से काम बंद रहा। इसके बाद काम धीमी गति से चला। पिलर बनाने का काम लगभग पूरा है। स्लोब ढलाई का काम कराया जा रहा है। करीब 57 फीसदी काम पूरा हो गया है। रेलवे की ओर से नक्शा बदलने से पोल शिफ्टिंग की वजह से काम में विलंब हुआ। - केएन ओझा, प्रोजेक्ट मैनेजर