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ऐसे दौरों का क्या फायदा साहब!

Sat, 16 Jan 2016 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर Updated Sat, 16 Jan 2016 02:07 AM IST
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The use of such visits, sir!

विधानसभा की आश्वासन समिति के चेयरमैन सतीश महाना, सदस्य मनीष अतीजा, डीएम कौशलराज शर्मा और करीब आठ विभागों के अफसर गुरुवार को फौज-फाटे के साथ गंगा किनारे जिन ग्लू फैक्ट्रियों और अवैध निर्माण को देखकर आए थे, वे शुक्रवार को जस के तस रहे।

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न ग्लू फैक्ट्रियां हटीं न अवैध निर्माण। कागजी घोड़े दौड़ाने के लिए केडीए की टीम वाजिदपुर पहुंची जरूर पर चार-चार मंजिल तन चुकी इमारतों को ताक कर लौट आई। अब निर्माण रुकवाने की बात कह रही है लेकिन ये चार मंजिले तन कैसे गईं, इस पर कोई जवाब देते नहीं सूझ रहा।
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प्रदूषण नियंत्रण विभाग हमेशा की तरह अब भी सो रहा है क्योंकि ‘पेट भरने’ के बाद नींद अच्छी आती है। बर्रा और फूलबाग की टंकी चालू करने के लिए भी कुछ नहीं हुआ। इसलिए यह सवाल उठना लाजिमी है कि ऐसे दौरों का क्या फायदा साहब?
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मोदी सरकार बनने के बाद से गंगा पर इतने आदेश पारित हो चुके हैं जितनी गंगा में लहरें हैं लेकिन कम से कम इन आदेशों पर शहर में तो कुछ नहीं हो रहा सिवाय गंगा आरती में फोटो खिंचाने के। 

सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्ती के बावजूद सब पहले जैसा है। आश्वासन समिति, डीएम और अन्य अफसरों ने 14 जनवरी को वाजिदपुर में गंगा किनारे चल रहीं ग्लू भट्ठियां हटाने का आदेश दिया था लेकिन शुक्रवार को अमर उजाला के दौरे में भट्ठियां पहले जैसी चलते दिखीं।

आसपास के लोगों ने नसीन पहलवान की भट्ठी बताया, जबकि वहां काम करने वालों ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। ट्रीटमेंट प्लांट के आगे वाजिदपुर और प्योंदी गांव में गंगा के किनारे ग्लू की आठ भट्ठियां धधक रही थीं। एसटीपी के आगे ही पुलिया के पास और प्योंदी गांव मार्ग पर नौ पक्के निर्माण हो रहे थे।

भनक मिलने पर दोपहर बाद जोन-1 (प्रवर्तन) के सहायक अभियंता योगेश कुमार दस्ते के साथ मौके पर पहुंचे और दावा किया कि सभी निर्माण बंद करा दिए गए। इसकी निगरानी के लिए चकेरी पुलिस को पत्र लिखा गया है। अब पत्रों का क्या हाल होता है ये तो सब जानते हैं।

इस पाप का दोषी कौन
सुप्रीमकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बावजूद गंगा किनारे वाजिदपुर में ग्लू फैक्ट्रियों और अवैध निर्माण के लिए किन-किन विभागों के कौन-कौन से अफसर दोषी हैं, इस सवाल पर अफसर कुछ भी बताने से कन्नी काट रहे हैं।

दो-टूक सतीश महाना-चेयरमैन आश्वासन समिति

ग्लू फैक्ट्रियां तो आज भी धड़ल्ले से चल रही हैं, क्या फायदा हुआ आपके दौरे का?
हमने शासन को लिखा है कि कड़ी कार्रवाई की जाए, इसका असर शीघ्र दिखेगा।

साफ बताइये कि कार्रवाई कब तक होगी?
21 को फिर बैठक है। उसमें आदेश दूंगा कि ग्लू फैक्ट्री वालों पर  एफआईआर करें।

क्या एफआईआर के बाद फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी?
देखिये, एफआईआर और कार्रवाई की प्रक्रिया में कुछ समय लगता है। 15 फरवरी तक फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी। प्रदूषण बोर्ड वाले करते क्या हैं सिर्फ पैसा वसूली के अलावा? वर्ना इतनी ग्लू भट्ठियां कैसे चल सकती हैं। आश्वासन समिति की 21 जनवरी को नगर विकास विभाग के साथ विधानसभा के समिति कक्ष में बैठक है।


उस बैठक में केडीए, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन सहित अन्य संबंधित विभागों से निरीक्षण के बाद हुई कार्रवाई की रिपोर्ट रखनी है। जिन विभागों की रिपोर्ट संतोषजनक नहीं है, उसके प्रमुख सचिव को कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। दरअसल, गंगा किनारे ग्लू फैक्ट्रियां चलने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था दोषी है।

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