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Kanpur News: कठिन है शिक्षा की डगर, चलना जरा संभलकर
Fri, 21 Aug 2026 12:38 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 21 Aug 2026 12:38 AM IST
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कानपुर देहात। जनपद के शिक्षा के मंदिरों की स्थिति बेहद दयनीय है। कहीं स्कूल गेट के बगल में मवेशी बंधे हैं तो कहीं बच्चों के स्कूल जाने का रास्ता मौत का रास्ता बना हुआ है। तमाम परेशानियों से लड़कर देश का भविष्य पढ़ने के लिए स्कूलों तक पहुंच रहा है। इधर, शासन के निर्देश के बाद जिला प्रशासन स्कूलों की निगरानी में जुट गया है।
लखनऊ, हमीरपुर और फतेहपुर में स्कूलों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए जेन अल्फा जब सड़कों उतरा तब सरकार ने शिक्षण संस्थानों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। जनपद के स्कूलों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। कहीं स्कूलों में जलभराव की समस्या है, तो कहीं स्कूलों के प्रवेश द्वार पर स्थानीय लोगों ने मवेशी बांधकर तबेला बना रखा है। स्कूलों में सफाई कर्मियों के न पहुंचने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कई परिसर में घास उगी है। ऐसे में नौनिहालों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी ने अलग-अलग विभाग के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर शिक्षण संस्थानों की निगरानी की जिम्मा सौंपा है। बुधवार को जनपद के 58 अधिकारियों ने 276 स्कूलों का निरीक्षण किया तो अधिकांश में कमियां पाई गईं। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर बेसिक शिक्षा विभाग सौंपी जा रही है। इसके बाद समाधान निकाला जाएगा। वहीं, बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने परिषदीय स्कूलों की पड़ताल की। जिसमें तमाम कमियां निकल कर सामने आई हैं।
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केस- एक
मौत के रास्ते से आ जा रहे बच्चे
अकबरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भटौली के मल्लाहनपुरवा में संचालित प्राथमिक स्कूल पहुंचने पर बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से होकर निकलते नजर आए। स्कूल के दोनों तरफ तालाब है। जिसके पास सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। ऐसे में कभी घर आते-जाते वक्त या फिर खेलते वक्त अगर तालाब में गिरते हैं तो बड़ा हादसा हो सकता है। प्रधानाध्यापक शकुंतला गौतम ने बताया कि सुबह व दोपहर में बच्चों के आने-जाने के दौरान उनकी देखरेख के लिए एक शिक्षक बाहर खड़ा होता है। यहां हर समय खतरा रहता है। इसके लिए ग्राम पंचायत से कई बार कहा जा चुका है।
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केस- दो
स्कूल के बाहर बंधे मवेशियों से बच्चों को खतरा
मलाला ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हैदरापुर पहुंचने पर स्कूल परिसर के बाहर ही कीचड़ से भरा तबेला मिला। इसमें चार से पांच मवेशी बंधे थे। स्कूल में पंजीकृत 42 बच्चों को इसी के पास से होकर प्रतिदिन स्कूल जाना व वापस आना पड़ता है। ये मवेशी कभी भी बच्चों के लिए खतरा बन सकते हैं। प्रधानाध्यापक सुरभि ने बताया कि तबेले को हटाने के लिए स्थानीय लोगों से कई बार कहा गया लेकिन वह विरोध करने लगते हैं। उच्चाधिकारियों को भी स्थिति से अवगत कराया गया है।
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केस-तीन
शिकायत के बाद भी नहीं हो रहा समाधान
अमरौधा ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल भोगनीपुर के परिसर में प्रथम व द्वितीय दो स्कूल संचालित हैं। यहां पहुंचने पर पहले जलभराव का सामना करना पड़ा। किसी तरह पानी से होकर अंदर पहुंचे तो बच्चे कक्षा में पढ़ाई करते मिले। प्राथमिक विद्यालय प्रथम की प्रधानाध्यापक सुजिता माथुर ने बताया कि नाले की सफाई न होने की वजह से जल निकासी नहीं हो पाती है। सफाई कर्मी भी कभी नहीं आते हैं। इसके लिए कई बार ब्लॉक स्तर पर शिकायत की गई लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया। प्राथमिक विद्यालय द्वितीय के प्रधानाध्यापक अरविंद यादव ने बताया कि हल्की बारिश से ही स्कूल तालाब में तब्दील हो जाता है।
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58 अधिकारियों ने 276 स्कूलों का किया निरीक्षण, 47 ने सौंपी रिपोर्ट
शिक्षण संस्थानों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने व व्यवस्थाओं को परखने के लिए शासन के सख्त रुख अपनाने के बाद जिला प्रशासन ने 58 अधिकारियों की टीम गठित कर स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को सभी ने 276 स्कूलों का निरीक्षण किया। जिसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बृहस्पतिवार की दोपहर दो बजे तक 47 अधिकारियों की रिपोर्ट आ चुकी है। सभी रिपोर्ट का ब्योरा तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्कूलों में गंदगी, जलभराव जैसी समस्याएं मिली हैं। अब इनके समाधान की तैयारी की जा रही है।
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बयान.....
डीपीआरओ से हो रहा पत्राचार, सुधरेगी व्यवस्था
स्कूलों में गंदगी व जलभराव की समस्या का समाधान किए जाने के लिए डीपीआरओ से पत्राचार किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर स्कूलों में नियमित सफाई कर्मी पहुंचें व जिन स्कूलों में जल निकासी की व्यवस्था नहीं है, वहां नाली आदि दुरुस्त किए जाने को कहा जा रहा है। साथ ही स्कूल परिसरों में जल जनित बीमारी न फैले इसके लिए दवा का छिड़काव कराया जाएगा। - आशीष कुमार पांडेय, बीएसए
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लखनऊ, हमीरपुर और फतेहपुर में स्कूलों की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए जेन अल्फा जब सड़कों उतरा तब सरकार ने शिक्षण संस्थानों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। जनपद के स्कूलों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। कहीं स्कूलों में जलभराव की समस्या है, तो कहीं स्कूलों के प्रवेश द्वार पर स्थानीय लोगों ने मवेशी बांधकर तबेला बना रखा है। स्कूलों में सफाई कर्मियों के न पहुंचने से गंदगी का अंबार लगा हुआ है। कई परिसर में घास उगी है। ऐसे में नौनिहालों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है।
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शासन के निर्देश पर जिलाधिकारी ने अलग-अलग विभाग के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर शिक्षण संस्थानों की निगरानी की जिम्मा सौंपा है। बुधवार को जनपद के 58 अधिकारियों ने 276 स्कूलों का निरीक्षण किया तो अधिकांश में कमियां पाई गईं। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर बेसिक शिक्षा विभाग सौंपी जा रही है। इसके बाद समाधान निकाला जाएगा। वहीं, बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने परिषदीय स्कूलों की पड़ताल की। जिसमें तमाम कमियां निकल कर सामने आई हैं।
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केस- एक
मौत के रास्ते से आ जा रहे बच्चे
अकबरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भटौली के मल्लाहनपुरवा में संचालित प्राथमिक स्कूल पहुंचने पर बच्चे कीचड़ भरे रास्ते से होकर निकलते नजर आए। स्कूल के दोनों तरफ तालाब है। जिसके पास सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। ऐसे में कभी घर आते-जाते वक्त या फिर खेलते वक्त अगर तालाब में गिरते हैं तो बड़ा हादसा हो सकता है। प्रधानाध्यापक शकुंतला गौतम ने बताया कि सुबह व दोपहर में बच्चों के आने-जाने के दौरान उनकी देखरेख के लिए एक शिक्षक बाहर खड़ा होता है। यहां हर समय खतरा रहता है। इसके लिए ग्राम पंचायत से कई बार कहा जा चुका है।
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केस- दो
स्कूल के बाहर बंधे मवेशियों से बच्चों को खतरा
मलाला ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हैदरापुर पहुंचने पर स्कूल परिसर के बाहर ही कीचड़ से भरा तबेला मिला। इसमें चार से पांच मवेशी बंधे थे। स्कूल में पंजीकृत 42 बच्चों को इसी के पास से होकर प्रतिदिन स्कूल जाना व वापस आना पड़ता है। ये मवेशी कभी भी बच्चों के लिए खतरा बन सकते हैं। प्रधानाध्यापक सुरभि ने बताया कि तबेले को हटाने के लिए स्थानीय लोगों से कई बार कहा गया लेकिन वह विरोध करने लगते हैं। उच्चाधिकारियों को भी स्थिति से अवगत कराया गया है।
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केस-तीन
शिकायत के बाद भी नहीं हो रहा समाधान
अमरौधा ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल भोगनीपुर के परिसर में प्रथम व द्वितीय दो स्कूल संचालित हैं। यहां पहुंचने पर पहले जलभराव का सामना करना पड़ा। किसी तरह पानी से होकर अंदर पहुंचे तो बच्चे कक्षा में पढ़ाई करते मिले। प्राथमिक विद्यालय प्रथम की प्रधानाध्यापक सुजिता माथुर ने बताया कि नाले की सफाई न होने की वजह से जल निकासी नहीं हो पाती है। सफाई कर्मी भी कभी नहीं आते हैं। इसके लिए कई बार ब्लॉक स्तर पर शिकायत की गई लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया। प्राथमिक विद्यालय द्वितीय के प्रधानाध्यापक अरविंद यादव ने बताया कि हल्की बारिश से ही स्कूल तालाब में तब्दील हो जाता है।
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58 अधिकारियों ने 276 स्कूलों का किया निरीक्षण, 47 ने सौंपी रिपोर्ट
शिक्षण संस्थानों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने व व्यवस्थाओं को परखने के लिए शासन के सख्त रुख अपनाने के बाद जिला प्रशासन ने 58 अधिकारियों की टीम गठित कर स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को सभी ने 276 स्कूलों का निरीक्षण किया। जिसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बृहस्पतिवार की दोपहर दो बजे तक 47 अधिकारियों की रिपोर्ट आ चुकी है। सभी रिपोर्ट का ब्योरा तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान अधिकांश स्कूलों में गंदगी, जलभराव जैसी समस्याएं मिली हैं। अब इनके समाधान की तैयारी की जा रही है।
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बयान.....
डीपीआरओ से हो रहा पत्राचार, सुधरेगी व्यवस्था
स्कूलों में गंदगी व जलभराव की समस्या का समाधान किए जाने के लिए डीपीआरओ से पत्राचार किया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर स्कूलों में नियमित सफाई कर्मी पहुंचें व जिन स्कूलों में जल निकासी की व्यवस्था नहीं है, वहां नाली आदि दुरुस्त किए जाने को कहा जा रहा है। साथ ही स्कूल परिसरों में जल जनित बीमारी न फैले इसके लिए दवा का छिड़काव कराया जाएगा। - आशीष कुमार पांडेय, बीएसए