नहीं चला दांव...भुगतनी पड़ेगी सजा: मां-बेटी कोर्ट में बयान से पलटी, फिर भी अपहरणकर्ता को नहीं बचा सकीं
Kanpur Crime: विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि अभियोजन की ओर से पीडि़ता व उसकी मां समेत पांच गवाह कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट में दिए बयान में पीडि़ता ने कहा था कि उसके पिता की मौत हो चुकी थी।
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कानपुर में शादी का झांसा देकर किशोरी को भगा ले जाने वाले को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सुरेंद्र पाल सिंह ने पांच साल कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दो साल से जेल में बंद आरोपी को सजा से बचाने के लिए पीडि़ता और उसकी मां ने कोर्ट में बयान पलट दिए थे, लेकिन अभियुक्त के पास से किशोरी की बरामदगी के आधार पर कोर्ट ने अभियुक्त को दोषी मानकर सजा सुना दी।
काकादेव थानान्तर्गत अंबेडकर नगर निवासी सूरज 30 अक्टूबर 2020 को मोहल्ले की रहने वाली किशोरी को शादी का झांसा देकर भगा ले गया था। खोजबीन के बाद किशोरी की मां ने सूरज के खिलाफ 7 नवंबर को काकादेव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 6 मार्च 2021 को पुलिस ने सूरज के साथ किशोरी को बरामद किया था। तभी से सूरज जेल में बंद है। 15 दिन में ही पुलिस ने चार्जशीट भी कोर्ट भेज दी थी।
बिना बताए सहेली के घर चली गई थी किशोरी
विशेष लोक अभियोजक भावना गुप्ता ने बताया कि अभियोजन की ओर से पीडि़ता व उसकी मां समेत पांच गवाह कोर्ट में पेश किए गए। कोर्ट में दिए बयान में पीडि़ता ने कहा था कि उसके पिता की मौत हो चुकी थी। मां उसे मारती-पीटती थी इसलिए वह बिना बताए सहेली के घर चली गई थी। जब गुस्सा शांत हुआ तो वापस लौट आई थी। सूरज ने उसे नहीं भगाया और न ही उससे शारीरिक संबंध बनाए।
दुष्कर्म के सबूत नहीं मिले, लेकिन इसलिए मिली सजा
उसने अपना मेडिकल कराने से भी इनकार कर दिया था। वहीं पीडि़ता की मां ने भी बयान में कहा कि उसने मोहल्लेवालों के कहने पर सूरज का नाम लिखवा दिया था। दोनों गवाह पक्षद्रोही हो गए, लेकिन पुलिस ने चार माह बाद किशोरी को सूरज के साथ पकड़ा था। अभियुक्त के खिलाफ दुष्कर्म के सबूत नहीं मिले इसलिए दुष्कर्म के आरोप से तो बरी कर दिया, लेकिन गवाहों के पक्षद्रोही होने के बावजूद कोर्ट ने दोषी मानकर सजा सुनाई।