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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   The groom inspired for dowry-free marriage by taking a plant in Fatehpur, gave the message to society

एक विवाह ऐसा भी: दूल्हे ने उपहार में लिया एक पौधा, दहेज मुक्त विवाह का दिया संदेश, पढ़ें क्यों लिया था ऐसा प्रण

Wed, 13 Mar 2024 03:41 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 13 Mar 2024 03:41 PM IST
सार

Fatehpur News: दूल्हे ने बताया कि उन्होंने अपने घर पर ही बहुत बड़ा बगीचा तैयार कर रखा है, जिस पर फल-फूलदार वृक्ष और पौधे लगे हैं। उनका मानना है कि हर अतिथि जब अपने घरों और आसपास में एक-एक पेड़ लगाएगा, तो पर्यावरण को संरक्षित करने में एक सार्थक प्रयास होगा।

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The groom inspired for dowry-free marriage by taking a plant in Fatehpur, gave the message to society
विदाई के समय उपहार में मिले पौधे लिए वर वधू व बाराती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फतेहपुर जिल में अमौली कस्बे के ज्वैलर्स व्यवसायी ज्ञानेंद्र प्रकाश का बिना दहेज के विवाह करने का फैसला नवयुवकों के लिए प्रेरणादायक है। बरात मंगलवार को दोपहर लौटी तो समाज में चर्चा का विषय बनी रही। 11 मार्च को फतेहपुर के तांबेश्वर नगर के एक गेस्ट हाउस में उन्होंने वीरेंद्र साहू की पुत्री आरती साहू के साथ वैदिक रीति रिवाज से विवाह किया।

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सुबह विदाई के समय दहेज के नाम पर उपहार में केवल पौधे स्वीकार किया। विवाह में शामिल सभी बारातियों को एक-एक पौधे उपहार स्वरूप मिले। इसी तरह तिलक के कार्यक्रम में नकद धनराशि में मात्र 11 रुपये और पांच पौधे लिए थे। ज्ञानेंद्र प्रकाश ज्वैलर्स व्यवसाय के साथ-साथ मंचों में कविताएं पढ़ते हैं।

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इनके पिता ओम प्रकाश साहू का निधन इनके बचपन में ही हो गया था, जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्होंने बताया कि समाज में बेटियों के साथ हो रहे अत्याचार को देखते हुए पहले ही प्रण कर लिया था कि वह दहेज मुक्त विवाह करेंगे। पौधे लेने के पीछे का कारण उन्होंने बताया कि उनकी मां शोभा देवी पर्यावरण प्रेमी हैं।

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एक-एक पेड़ लगेंगे, तो पर्यावरण संरक्षण का होगा सार्थक प्रयास
उन्होंने अपने घर पर ही बहुत बड़ा बगीचा तैयार कर रखा है, जिस पर फल-फूलदार वृक्ष और पौधे लगे हैं। उनका मानना है कि हर अतिथि जब अपने घरों और आसपास में एक-एक पेड़ लगाएगा, तो पर्यावरण को संरक्षित करने में एक सार्थक प्रयास होगा। ज्ञानेंद्र की पत्नी आरती इतिहास से एमए करके पीएचडी की तैयारी कर रही हैं।

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