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ययाति के किले पर भूमाफिया का कब्जा
संतोष सिंह, कानपुर
Updated Wed, 14 Oct 2015 01:42 AM IST
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित जाजमऊ में राजा ययाति के किले की जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा कर लिया। जमीन के प्लाट काटकर बेंच गए। अब वहां सैकड़ों मकान बने खड़े हैं। बाउंड्रीवाल खड़ी करके उस पर ताला जड़ दिया।
सरकारी जमीन पर निजी दूर संचार कंपनी वोडाफोन का भारी प्रचार बोर्ड लगवाकर प्रतिमाह दो लाख रुपये किराया वसूला जा रहा। इसका खुलासा सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से हुआ। केडीए के अधीक्षण अभियंता प्रवर्तन सरवत अली का कहना है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा है।
अब कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने पूरे मामले की जांच करने का आदेश डीएम को दिया है। कमिश्नर का कहना है कि एडीएम सिटी अविनाश सिंह से जांच कराके भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यह मामला बेहद गंभीर है।
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जाजमऊ का टीला 28 फरवरी 1968 से पुरातत्व सर्वेक्षण के पास है। इसका जिक्र विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट में भी है। इसके बावजूद गंगा के किनारे स्थित इस टीले की छह बीघा जमीन अवैध कब्जे में चली गई। आरटीआई के तहत केडीए ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक 48 साल पुराने किले की जमीन पर मकान बने हैं।
चकेरी पुलिस और सदर तहसील क्षेत्र के राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से पुराने खसरा-खतौैनी में बदलाव किया गया। यह सिलसिला अब भी जारी है। यही वजह है कि आरटीआई कार्यकर्ता और लाल बंगला निवासी संदीप शुक्ला ने आपत्ति की। पहले कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुदद्दीन से शिकायत करके भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कार्यकर्ता ने कहा कि राजा ययाति के किले की भूमि बेशकीमती है।
वहां से प्राचीन कालीन सभ्यता, संस्कृति जुड़ी है, जिसे भूमाफिया मिटाने पर तुले हैं। कमिश्नर ने 23 सितंबर को जांच के आदेश दिए। वहीं, आरटीआई का जवाब देते हुए 6 अक्तूबर को केडीए के अधीक्षण अभियंता सरवत अली ने कहा है कि मौके पर बाउंड्रीवाल निर्मित है। एक दरवाजा भी लगा है। हैवी एंगिल का प्रचार बोर्ड भी लगा है। किले की जमीन पर सैकड़ों मकान भी बने हैं। यह ऐतिहासिक किला है, जिससे अवैध कब्जा हटाने की जरूरत है।
अधीक्षण अभियंता ने इसकी जानकारी कमिश्नर और एसएसपी शलभ माथुर को भी दी है। अधीक्षण अभियंता का कहना है कि ऐतिहासिक किले को कब्जा मुक्त बनाने की जरूरत है।
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सरकारी जमीन पर निजी दूर संचार कंपनी वोडाफोन का भारी प्रचार बोर्ड लगवाकर प्रतिमाह दो लाख रुपये किराया वसूला जा रहा। इसका खुलासा सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से हुआ। केडीए के अधीक्षण अभियंता प्रवर्तन सरवत अली का कहना है कि सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा है।
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अब कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुद्दीन ने पूरे मामले की जांच करने का आदेश डीएम को दिया है। कमिश्नर का कहना है कि एडीएम सिटी अविनाश सिंह से जांच कराके भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यह मामला बेहद गंभीर है।
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जाजमऊ का टीला 28 फरवरी 1968 से पुरातत्व सर्वेक्षण के पास है। इसका जिक्र विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट में भी है। इसके बावजूद गंगा के किनारे स्थित इस टीले की छह बीघा जमीन अवैध कब्जे में चली गई। आरटीआई के तहत केडीए ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक 48 साल पुराने किले की जमीन पर मकान बने हैं।
चकेरी पुलिस और सदर तहसील क्षेत्र के राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से पुराने खसरा-खतौैनी में बदलाव किया गया। यह सिलसिला अब भी जारी है। यही वजह है कि आरटीआई कार्यकर्ता और लाल बंगला निवासी संदीप शुक्ला ने आपत्ति की। पहले कमिश्नर मोहम्मद इफ्तिखारुदद्दीन से शिकायत करके भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कार्यकर्ता ने कहा कि राजा ययाति के किले की भूमि बेशकीमती है।
वहां से प्राचीन कालीन सभ्यता, संस्कृति जुड़ी है, जिसे भूमाफिया मिटाने पर तुले हैं। कमिश्नर ने 23 सितंबर को जांच के आदेश दिए। वहीं, आरटीआई का जवाब देते हुए 6 अक्तूबर को केडीए के अधीक्षण अभियंता सरवत अली ने कहा है कि मौके पर बाउंड्रीवाल निर्मित है। एक दरवाजा भी लगा है। हैवी एंगिल का प्रचार बोर्ड भी लगा है। किले की जमीन पर सैकड़ों मकान भी बने हैं। यह ऐतिहासिक किला है, जिससे अवैध कब्जा हटाने की जरूरत है।
अधीक्षण अभियंता ने इसकी जानकारी कमिश्नर और एसएसपी शलभ माथुर को भी दी है। अधीक्षण अभियंता का कहना है कि ऐतिहासिक किले को कब्जा मुक्त बनाने की जरूरत है।