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‘बंटी-बबली’ ने डकारीं फाइनेंस की पांच कारें
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 25 Apr 2015 02:20 AM IST
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अपनी पहचान बदल-बदलकर एक शातिर ‘बंटी-बबली’ (दंपति) ने एसबीआई की पांच अलग-अलग शाखाओं से पांच कीमती कारें फाइनेंस कराईं और फिर उन्हें लेकर खिसक गए। कारों की किस्तें आनी बंद हुईं तो बैंक शाखाओं को इसका पता तब चला। इस तरह ठग दंपति ने एसबीआई को 50 लाख रुपये का चूना लगा दिया।
बैंक ने आरोपी दंपति के खिलाफ पिछले दिनों कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच-पड़ताल कर रही है। कभी राजीव सिंह, कभी राजवीर सिंह तो कभी संजय सिंह बनकर एक युवक ने अपनी पत्नी नेहा सिंह के साथ मिलकर एसबीआई की लखनपुर, जाजमऊ, एलिम्को, आर्यनगर और कोऑपरेटिव इस्टेट दादानगर शाखाओं से जून-जुलाई 2014 में कारें फाइनेंस कराईं।
अच्छी हैसियत दिखाने के लिए युवक ने खुद को मिनरल वॉटर फैक्ट्री का संचालक बताया। स्कॉर्पियो, जाइलो, सफारी और इंडिगो जैसी कारों की एक-दो किस्त जमा की गई।
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इसके बाद किस्त जमा करना बंद हो गया। इस पर बैंक ने रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की पता चला कि नवीन नगर और शारदा नगर के जो पते फाइनेंस के वक्त दिए गए थे, उन पर ये लोग रहते ही नहीं हैं। अधिक पड़ताल में जानकारी हुई कि आय, पहचान और निवास के जो प्रमाणपत्र कार फाइनेंस कराते वक्त लगाए गए वे भी फर्जी हैं।
मिलान किया गया तो पांचों शाखाओं से लोन का किस्सा खुलकर सामने आ गया। कारों को जब्त करने की कोशिश की गई लेकिन एक का भी पता नहीं चला।
डीलरों की मदद से कुछ गाड़ियों का तो रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया गया है। मामलेे की रिपोर्ट तत्काल बैंक के डीजीएम महेश गोयल को दी गई। उनके निर्देश पर मामले की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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बैंक ने आरोपी दंपति के खिलाफ पिछले दिनों कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच-पड़ताल कर रही है। कभी राजीव सिंह, कभी राजवीर सिंह तो कभी संजय सिंह बनकर एक युवक ने अपनी पत्नी नेहा सिंह के साथ मिलकर एसबीआई की लखनपुर, जाजमऊ, एलिम्को, आर्यनगर और कोऑपरेटिव इस्टेट दादानगर शाखाओं से जून-जुलाई 2014 में कारें फाइनेंस कराईं।
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अच्छी हैसियत दिखाने के लिए युवक ने खुद को मिनरल वॉटर फैक्ट्री का संचालक बताया। स्कॉर्पियो, जाइलो, सफारी और इंडिगो जैसी कारों की एक-दो किस्त जमा की गई।
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इसके बाद किस्त जमा करना बंद हो गया। इस पर बैंक ने रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की पता चला कि नवीन नगर और शारदा नगर के जो पते फाइनेंस के वक्त दिए गए थे, उन पर ये लोग रहते ही नहीं हैं। अधिक पड़ताल में जानकारी हुई कि आय, पहचान और निवास के जो प्रमाणपत्र कार फाइनेंस कराते वक्त लगाए गए वे भी फर्जी हैं।
मिलान किया गया तो पांचों शाखाओं से लोन का किस्सा खुलकर सामने आ गया। कारों को जब्त करने की कोशिश की गई लेकिन एक का भी पता नहीं चला।
डीलरों की मदद से कुछ गाड़ियों का तो रजिस्ट्रेशन तक नहीं कराया गया है। मामलेे की रिपोर्ट तत्काल बैंक के डीजीएम महेश गोयल को दी गई। उनके निर्देश पर मामले की रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।