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Kanpur News: कमेटी दोबारा करेगी जांच, साथ में शामिल रहेंगे आईटीबीपी के अधिकारी
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कानपुर। आईटीबीपी के जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी के हाथ कटने के मामले की जांच रिपोर्ट पर पक्षपाती होने का आरोप लगा है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने दोबारा जांच करने पर हामी भरी है। इसमें आईटीबीपी के अधिकारी भी शामिल रहेंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि हमारी रिपोर्ट तथ्यों के आधार पर पारदर्शिता के साथ तैयार कर पुलिस कमिश्नर को सौंपी गई। अब उस रिपोर्ट से संबंधित आईटीबीपी और पुलिस के अधिकारियों के अपने सवाल है जिसे लेकर हम दोबारा जांच करेंगे।
पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में जांच कमेटी में शामिल होने के लिए एक अधिकारी को भी नामित कर दिया है जो डॉक्टरों की टीम के साथ बैठकर जांचों और बयानों की विवेचना करेगा। वहीं, जांच कमेटी के सदस्यों का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शिता के साथ की गई है। महिला ह्रदय रोगी है। उसके हाथ की नसों में ब्लॉकेज से हाथ काटा गया है। रिपोर्ट में हमने साफ-साफ लिखा है कि दोनों अस्पतालों में देरी के चलते हाथ कटने की आशंका है। नसों में ब्लॉकेज के दो कारण हो सकते हैं। पहला थ्रोम्बोसिस है जिसमें शरीर के थक्के ह्रदय की नसों से निकलकर हाथों की नसों आकर फंस जाते हैं। यह प्राकृतिक रूप से होता है। दूसरा कंपार्टमेंट सिंड्रोम है जिसमें हाथ में दर्द, सूजन होगी जिसे नजरअंदाज किया गया और देरी के चलते ऐसी स्थिति हो गई कि हाथ काटना पड़ा।
अब अगर रोगी के कटे हुए हाथ की हिस्टोपैथोलॉजी करा ली जाए तो स्थिति साफ हो जाएगी। जांच कमेटी के अध्यक्ष एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि दोनों अस्पतालों से वेरिफाइड दस्तावेज लिए गए और उसकी जांच की गई है। अगर जांच गलत भेजी है तो यह अस्पताल की गलती है। वहीं उन्होंने बताया कि रोगी को ह्रदय संबंधी दिक्कत थी इसलिए उसका टीएमटी तो हो ही नहीं सकता। ऐसे में ये आरोप निराधार है कि रोगी की टीएमटी की फर्जी रिपोर्ट भेजी गई। उसकी कोई रिपोर्ट नहीं आई है। ईको और डॉप्लर रिपोर्ट हमें मिली थी। इसके अलावा सभी डॉक्टरों और स्टाफ के बयान लिए गए हैं।
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पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में जांच कमेटी में शामिल होने के लिए एक अधिकारी को भी नामित कर दिया है जो डॉक्टरों की टीम के साथ बैठकर जांचों और बयानों की विवेचना करेगा। वहीं, जांच कमेटी के सदस्यों का कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शिता के साथ की गई है। महिला ह्रदय रोगी है। उसके हाथ की नसों में ब्लॉकेज से हाथ काटा गया है। रिपोर्ट में हमने साफ-साफ लिखा है कि दोनों अस्पतालों में देरी के चलते हाथ कटने की आशंका है। नसों में ब्लॉकेज के दो कारण हो सकते हैं। पहला थ्रोम्बोसिस है जिसमें शरीर के थक्के ह्रदय की नसों से निकलकर हाथों की नसों आकर फंस जाते हैं। यह प्राकृतिक रूप से होता है। दूसरा कंपार्टमेंट सिंड्रोम है जिसमें हाथ में दर्द, सूजन होगी जिसे नजरअंदाज किया गया और देरी के चलते ऐसी स्थिति हो गई कि हाथ काटना पड़ा।
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अब अगर रोगी के कटे हुए हाथ की हिस्टोपैथोलॉजी करा ली जाए तो स्थिति साफ हो जाएगी। जांच कमेटी के अध्यक्ष एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी ने बताया कि दोनों अस्पतालों से वेरिफाइड दस्तावेज लिए गए और उसकी जांच की गई है। अगर जांच गलत भेजी है तो यह अस्पताल की गलती है। वहीं उन्होंने बताया कि रोगी को ह्रदय संबंधी दिक्कत थी इसलिए उसका टीएमटी तो हो ही नहीं सकता। ऐसे में ये आरोप निराधार है कि रोगी की टीएमटी की फर्जी रिपोर्ट भेजी गई। उसकी कोई रिपोर्ट नहीं आई है। ईको और डॉप्लर रिपोर्ट हमें मिली थी। इसके अलावा सभी डॉक्टरों और स्टाफ के बयान लिए गए हैं।
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