फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Terrorists used to stay in dargahs as pilgrims

UP: जायरीन बनकर दरगाहों में रुकते थे आतंकी, उन्नाव-कानपुर में आकर युवाओं को बरगलाते थे, बुनते थे साजिश का...

Wed, 01 Mar 2023 01:27 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 01 Mar 2023 01:27 PM IST
सार

देश में आतंक की पाठशाला चलाने में जब अवरोध पैदा होने लगे तो आतंकियों ने हिजरत करने का मन बनाया। हिजरत यानी समस्या आने पर देश छोड़ना। वह इसके लिए कश्मीर और केरल तक गए थे। वह सीरिया से भारत में आतंक के जरिये इस्लाम कायम करने का ख्वाब बुन रहे थे। एनआईए को भी जांच में इस बात के साक्ष्य मिले थे।

विज्ञापन
Terrorists used to stay in dargahs as pilgrims
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में धमाका करने वाला आतंकी सैफुल्लाह ने अपने साथियों के साथ शहर की कुछ दरगाहों पर जायरीन बनकर शरण ली थी। लखनऊ में हुए सैफुल्लाह के एनकाउंटर के बाद एनआईए और एटीएस की टीमों ने शहर के मोहम्मद फैसल, गौस मोहम्मद, मो. दनिश, मोहम्मद अजहर, आतिफ मुजफ्फर को गिरफ्तार किया था।

विज्ञापन


साथ ही पकडे़े गए सैयद मीर हुसैन, आसिफ इकबाल उर्फ रॉकी और मो. आतिफ उर्फ आतिफ ईरानी को काला नकाब पहनाकर यहां लाई थी और जांच के बाद लौट गई थी। 28 मार्च 20017 को एनआईए आतंकियों को लेकर उन्नाव के कांजी स्थित दो मस्जिदों और जाजमऊ के तीन धार्मिक स्थलों पर पहुंची थी। सीन री-क्रिएशन के बाद टीम सभी आतंकियों को उन्नाव रेलवे स्टेशन रोड स्थित उस बुद्धनशाह दरगाह लेकर पहुंची, जहां सभी आतंकी जायरीन बनकर रुके थे। उसके बाद कानपुर की कुछ दरगाह भी गए थे।

विज्ञापन

दरगाह परिसर में ही वीडियो व फोटोग्राफी की थी। पटकापुर, छिपियाना और किला स्थित शिया मस्जिद भी ले गई थी। सूत्रों के अनुसार आतंकियों ने बताया था कि मौलाअली की दरगाह में सैफुल्लाह के साथ सभी दरगाहों में ठहरे थे। टीम ने यहां सिर्फ आतंकी आतिफ को ही कार से उतारकर पूछताछ की थी। गौस मोहम्मद शुक्लागंज के खंडहरनुमा मकान में युवाओं को बम बनाने, फायरिंग करने की ट्रेनिंग देता था। गौस ही युवाओं को बरगलाता था। वह खुद सोशल मीडिया के जरिये आईएसआई के हैंडलरों से जुड़ा था। वही हैंडलर उसे बम बनाने की ट्रेनिंग देते थे।

हिजरत के बहाने सीरिया भागना चाहते थे आतंकी
देश में आतंक की पाठशाला चलाने में जब अवरोध पैदा होने लगे तो आतंकियों ने हिजरत करने का मन बनाया। हिजरत यानी समस्या आने पर देश छोड़ना। वह इसके लिए कश्मीर और केरल तक गए थे। वह सीरिया से भारत में आतंक के जरिये इस्लाम कायम करने का ख्वाब बुन रहे थे। एनआईए को भी जांच में इस बात के साक्ष्य मिले थे। हिजरत करने की योजना बनाने में मुख्य भूमिका आतिफ मुजफ्फर, गौस मोहम्मद खान की थी। एनआईए के विशेष लोक अभियोजक कौशल किशोर शर्मा बताते हैं कि देश के खिलाफ साजिश रचने में ही सभी को दोषी करार दिया गया है।
विज्ञापन

सिर्फ पिस्टल चेक करने के लिए की थी हत्या 
भोपाल उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में धमाका करने से पहले आतंकियों ने बिधनू में स्कूल के प्रधानाचार्य रमेश बाबू को महज पिस्टल ट्रायल के लिए ही गोली मार दी थी।

14 मार्च 2017 को एनआईए को मिली थी जांच
14 मार्च 2017 को केंद्र सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौंपी थी। जांच में सामने आया कि आतंकी संगठन आईएसआई से जुड़े आतंकियों ने बम प्लांट किया था। जांच एजेंसियों ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से सभी को गिरफ्तार किया था, जबकि आतंकी सैफुल्लाह मुठभेड़ में मारा गया था।

ऐसे पकड़े गए थे आरोपी
वर्तमान में आतंकी सैयद मीर हुसैन, मोहम्मद दानिश और आतिफ मुजफ्फर हाई सिक्योरिटी वाली भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। इन तीनों को मध्य प्रदेश की पिपरिया पुलिस ने घटना के कुछ ही घंटों बाद उसी दिन पकड़ लिया था। तीनों आतंकी बस से भागने का प्रयास कर रहे थे। वहीं, चौथे आतंकी गौस मोहम्मद खान को इनके द्वारा दी गई जानकारी पर बाद में शुक्लागंज से गिरफ्तार किया गया। उसे लखनऊ जेल में रखा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed