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Kanpur News: कानपुर, उन्नाव की कमाई यूके में कर रहे निवेश
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कानपुर। मिर्जा इंटरनेशनल समूह के प्रतिष्ठानों पर आयकर विभाग का छापा सोमवार को लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। नोएडा स्थित कारपोरेट मुख्यालय और उन्नाव स्थित तीन टेनरियों में छापा की कार्रवाई देररात तक चलती रही। वहीं, 50 प्रतिष्ठानों से टीमें लौट गई हैं। बताया गया कि समूह का बड़ा निवेश यूके में मिला है। कानपुर, उन्नाव की इकाइयों से होने वाली कमाई वहां पर लगाई जा रही थी। इसके दस्तावेज आयकर अफसरों को जांच में मिले हैं। यूके में निवेश पर कोई भी कर नहीं दिया गया। इसमें बड़े पैमाने पर कर भी चोरी पकड़ी गई है।
गुरुवार को आयकर विभाग की 150 से ज्यादा अफसरों की टीमों ने देश के प्रमुख चमड़ा निर्यातक मिर्जा इंटरनेशनल समूह के कानपुर, उन्नाव, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और कोलकाता में 52 अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापा मारा था। उन्नाव स्थित तीन टेनरियों और कई फैक्टरियों के अलावा कानपुर में 25 से ज्यादा स्थानों पर कार्रवाई की गई थी। कानपुर के सिविल लाइंस, पार्वती बांग्ला रोड, ग्वालटोली, जाजमऊ, मालरोड स्थित प्रतिष्ठानों के अलावा उन्नाव स्थित पांच टेनरी, सहायक इकाई यूरो फुटवियर फैक्टरी में जांच की गई थी। सूत्रों ने बताया कि अब केवल प्रतिष्ठानों पर ही छापा चल रहा है। इसमें उन्नाव की टेनरियां और नोएडा का कारपोरेट कार्यालय शामिल है।
टेनरी में की जाने वाली टैनिंग प्रक्रिया के बाद अलग-अलग प्रकार के उत्पाद तैयार होते हैं। इसमें से ज्यादातर हिस्से को नकद में बेचा जा रहा था। इसकी इंट्री अफसरों को जांच में नहीं मिली है। सालों से इस प्रक्रिया को अपनाया जा रहा था। इसके अलावा आपसी रिश्तेदार की कंपनी मार्शल मार्शल स्पोर्ट्स से बड़े पैमाने पर नकद में लेन-देन किया जा रहा था। अफसरों को जांच में 15 के करीब बैंक लॉकर मिल चुके हैं जिसमें से पांच-छह खोले गए हैं। नौ लॉकरों को और खोला जाना है। संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। इसमें दुबई, यूके में भी संपत्तियों के दस्तावेज हैं। कानपुर, उन्नाव, नोएडा, दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में भी संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनकी अलग से जांच कराई जागी। इनकी खरीद में आय के स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। आय के स्रोत सही न मिलने पर इन संपत्तियों को बेनामी प्रकोष्ठ भेजा जाएगा।
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करोड़ों की कर चोरी की ओर इशारा
सूत्रों के अनुसार, दो से तीन साल में समूह से जुड़ी कंपनियों ने बंपर कमाई की लेकिन उत्पादन और बिक्री कम करके दिखाया। अफसरों के हाथ लगे दस्तावेज करोड़ों की कर चोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। चमड़ा की खाल, कच्चा चमड़ा, तैयार चमड़ा और टैनिंग की प्रक्रिया के बाद बनने वाले उत्पादों और केमिकलों के दामों में भी अंतर मिला है। इसके चलते जांच का दायरा बढ़ा है। करीब 11 करोड़ के गहने और नकदी अब तक मिल चुकी है। जांच में बोगस खरीद-बिक्री के भी प्रमाण अफसरों को मिले हैं।
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विदेश में निवेश करने में फंस सकता है समूह
विदेश में रुपये भेजने के नियम बेहद सख्त हैं। इस रकम भेजने के रूट को चेक किया जा रहा है। बिना टैक्स रुपये भेजना अपराध है। ऐसे में समूह पर आगे बड़ी विधिक कार्रवाई हो सकती है। बोगस लोगों से नंबर दो की रकम को नंबर एक में बदले जाने के दस्तावेज भी अफसरों को जांच में हाथ लगे हैं।
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गुरुवार को आयकर विभाग की 150 से ज्यादा अफसरों की टीमों ने देश के प्रमुख चमड़ा निर्यातक मिर्जा इंटरनेशनल समूह के कानपुर, उन्नाव, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और कोलकाता में 52 अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापा मारा था। उन्नाव स्थित तीन टेनरियों और कई फैक्टरियों के अलावा कानपुर में 25 से ज्यादा स्थानों पर कार्रवाई की गई थी। कानपुर के सिविल लाइंस, पार्वती बांग्ला रोड, ग्वालटोली, जाजमऊ, मालरोड स्थित प्रतिष्ठानों के अलावा उन्नाव स्थित पांच टेनरी, सहायक इकाई यूरो फुटवियर फैक्टरी में जांच की गई थी। सूत्रों ने बताया कि अब केवल प्रतिष्ठानों पर ही छापा चल रहा है। इसमें उन्नाव की टेनरियां और नोएडा का कारपोरेट कार्यालय शामिल है।
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टेनरी में की जाने वाली टैनिंग प्रक्रिया के बाद अलग-अलग प्रकार के उत्पाद तैयार होते हैं। इसमें से ज्यादातर हिस्से को नकद में बेचा जा रहा था। इसकी इंट्री अफसरों को जांच में नहीं मिली है। सालों से इस प्रक्रिया को अपनाया जा रहा था। इसके अलावा आपसी रिश्तेदार की कंपनी मार्शल मार्शल स्पोर्ट्स से बड़े पैमाने पर नकद में लेन-देन किया जा रहा था। अफसरों को जांच में 15 के करीब बैंक लॉकर मिल चुके हैं जिसमें से पांच-छह खोले गए हैं। नौ लॉकरों को और खोला जाना है। संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। इसमें दुबई, यूके में भी संपत्तियों के दस्तावेज हैं। कानपुर, उन्नाव, नोएडा, दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में भी संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इनकी अलग से जांच कराई जागी। इनकी खरीद में आय के स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है। आय के स्रोत सही न मिलने पर इन संपत्तियों को बेनामी प्रकोष्ठ भेजा जाएगा।
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करोड़ों की कर चोरी की ओर इशारा
सूत्रों के अनुसार, दो से तीन साल में समूह से जुड़ी कंपनियों ने बंपर कमाई की लेकिन उत्पादन और बिक्री कम करके दिखाया। अफसरों के हाथ लगे दस्तावेज करोड़ों की कर चोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। चमड़ा की खाल, कच्चा चमड़ा, तैयार चमड़ा और टैनिंग की प्रक्रिया के बाद बनने वाले उत्पादों और केमिकलों के दामों में भी अंतर मिला है। इसके चलते जांच का दायरा बढ़ा है। करीब 11 करोड़ के गहने और नकदी अब तक मिल चुकी है। जांच में बोगस खरीद-बिक्री के भी प्रमाण अफसरों को मिले हैं।
विदेश में निवेश करने में फंस सकता है समूह
विदेश में रुपये भेजने के नियम बेहद सख्त हैं। इस रकम भेजने के रूट को चेक किया जा रहा है। बिना टैक्स रुपये भेजना अपराध है। ऐसे में समूह पर आगे बड़ी विधिक कार्रवाई हो सकती है। बोगस लोगों से नंबर दो की रकम को नंबर एक में बदले जाने के दस्तावेज भी अफसरों को जांच में हाथ लगे हैं।