शिक्षक दिवस विशेष: शिक्षा की लौ से रोशन कर रहे घरों के चिराग, अलग सोच और मेहनत से बच्चों को बनाया प्रतिभाशाली
Kanpur News: डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर अमर उजाला ऐसे शिक्षकों से रूबरू करा रहा है, जिनकी मेहनत से सरकारी स्कूलों के बच्चे पढ़ाई, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहे हैं।
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भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को देश भर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी क्रम में अमर उजाला आपको रूबरू करा रहा है शहर के उन गुरुजनों से जिन्होंने अपनी अलग सोच और मेहनत से सामान्य बच्चों को प्रतिभाशाली बना दिया है। इन सरकारी स्कूलों के बच्चे पढ़ाई के अलावा खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी अपना परचम लहलहा रहे हैं। रोचक ढंग से शिक्षण कार्य होने के चलते निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी इन सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं।
आशा का संकल्प बना प्रेरणा
बिल्हौर ब्लॉक का संविलियन विद्यालय गोहलियापुर आज सहायक अध्यापिका आशा कटियार के समर्पण से नजीर बना है। 2017 में मात्र 43 बच्चों से शुरू हुआ नामांकन आज 262 तक पहुंच गया है। उनके प्रयासों से विद्यालय 2022 में एससीईआरटी का सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बना और 2023 में आशा को राज्य अध्यापक पुरस्कार भी मिला। यहां की छात्राएं जवाहर नवोदय, राष्ट्रीय आय छात्रवृत्ति, अटल आवासीय विद्यालय जैसी परीक्षाओं में चयनित हो रही हैं। यहां के बच्चों ने कबड्डी से लेकर योग तक में स्टेट और नेशनल स्तर की उपलब्धियां हासिल की हैं। यूथ ओलंपिक 2025 में भी स्वर्ण पदक पाया है। बच्चों के लिए पहली स्पोर्ट्स अकादमी भी यहीं से शुरू हुई। आज यह विद्यालय ऐसा माहौल देता है जहां प्राइवेट स्कूल छोड़कर 16 गांवों के बच्चे पांच-छह किमी दूर से पढ़ने आते हैं।
सरकारी विद्यालय को नई पहचान दे रहीं खुर्शीदा
कल्याणपुर ब्लॉक के महेंद्रनगर स्थित पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका खुर्शीदा परवीन ने बच्चों को अंग्रेजी बोलचाल सिखाने की अनूठी पहल की। रोज एक घंटे की अंग्रेजी कक्षा ने अभिभावकों का प्राइवेट स्कूलों से मोह तोड़ा तो बच्चों की उपस्थिति 50 से बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुंच गई। पहले जहां बच्चे चटाई पर बैठते थे आज कक्षाएं फर्नीचर, वाल पेंटिंग, लर्निंग कॉर्नर से सुसज्जित हैं। विद्यालय के बच्चे प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिले का मान बढ़ा रहे हैं। हर सप्ताह टेस्ट से शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर दिया जा रहा है। स्मार्ट क्लास से आधुनिक शिक्षा का माहौल दिया जा रहा है। खुर्शीदा बतातीं हैं कि बच्चों को हिन्दी व अंग्रेजी से जोड़ना उनकी सबसे बड़ी चुनौती रही जिसे उन्होंने संवाद और सम्मान से अवसर में बदला। आज स्कूल में 107 बच्चे पढ़ते हैं।
दयालपुर का विद्यालय बना प्रतिभा की नर्सरी
चौबेपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय दयालपुर के प्रधानाध्यापक अब्दुल मजीद सिद्दीकी ने समर्पण और सतत प्रयास से सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदली है। 2016 में विद्यालय में केवल 75 नामांकन और 35 बच्चों की उपस्थिति थी। आज 95 प्रतिशत उपस्थिति के साथ 125 विद्यार्थी नामांकित हैं। उनकी पहल पर बच्चों को लैब, सात कंप्यूटर, वाटर कूलर और इनवर्टर की सुविधा मिली। हर दिन संविधान की प्रस्तावना का वाचन कराते हुए उन्होंने शिक्षा को अनुशासन और संस्कार से जोड़ा। राष्ट्रीय आय परीक्षा में 23 बच्चों का चयन हो चुका है। इंस्पायर अवॉर्ड, अटल आवासीय विद्यालय व श्रेष्ठ परीक्षा में भी बच्चे सफलता पा चुके हैं। छात्रा लक्ष्मी ने 400 मीटर दौड़ में नेशनल चैंपियन और लंबी कूद में स्टेट चैंपियन बनकर नाम रोशन किया। बबली मंडल स्तरीय लंबी कूद प्रतियोगिता में चैंपियन रही। हाल ही में कानपुर यूथ ओलंपिक 2025 में नैतिक ने लॉन्ग जंप में गोल्ड, लक्ष्मी ने लॉन्ग जंप और 600 मीटर दौड़ में गोल्ड जीता था। विद्यालय की रिले टीम ने सिल्वर मेडल जीतकर पूरे जनपद का मान बढ़ाया था।
डिजिटल शिक्षा के माध्यम से शेखर दिखा रहे नई राह
पतारा के कंपोजिट विद्यालय रामसारी के सहायक अध्यापक शेखर यादव डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर नवाचार कर रहे हैं। स्कूल में 156 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। वे डिजिटल लिटरेसी पुस्तक निर्माण टीम के सदस्य हैं और आईसीटी की पाठशाला मंच के जरिये अब तक हजारों शिक्षकों और बच्चों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। तकनीकी क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2022 में राज्य आईसीटी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनका डिजिटल लिटरेसी बाल ई-पोस्टर नवाचार एससीईआरटी लखनऊ में चयनित हुआ है। इसका विमोचन 5 सितंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। शेखर पीएम ई-विद्या डीटीएच चैनल के लिए शैक्षिक वीडियो निर्माण भी कर चुके हैं जो बच्चों को डिजिटल माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का एक अभिनव प्रयास है।
नवाचार से बच्चों का भविष्य संवार रहीं रूपांजली
शिवराजपुर के धिमऊ स्थित कंपोजिट विद्यालय की शिक्षिका रूपांजली बच्चों को नई सोच और रचनात्मकता से जोड़ने के लिए लगातार नवा चार कर रही हैं। 2010 में विद्यालय की जिम्मेदारी संभालते समय सिर्फ 37 बच्चे थे। आज संख्या 196 पर पहुंच गई है। उन्होंने मात्रा कविता तैयार कर बच्चों में भाषा की समझ विकसित की जिसे जनपद स्तर पर प्रथम पुरस्कार मिला। रंगोली व अन्य कार्यक्रमों से भी बच्चों ने कई बार पुरस्कार जीते। विद्यालय के बच्चे लगातार जनपद और राज्य स्तर पर सम्मानित हो रहे हैं। रूपांजली को शिक्षक दिवस पर दो बार बीएसए सम्मानित कर चुके हैं। वह बतातीं हैं कि गरीब बच्चों को उनकी मंजिल तक पहुंचाना और उनका पूर्ण विकास करना ही संकल्प है।
निर्धन छात्रों को सीए बनाने का उठाया जिम्मा
इंस्टीट्यूट ऑफ ऑफ इंडिया के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर शाहिद कामरान खान अब तक शहर के 50 से अधिक निर्धन छात्रों को चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) कोर्स में प्रवेश दिला चुके हैं। इतना ही नहीं उनको कोचिंग और स्कॉलरशिप दिलाकर चार्टर्ड अकाउंटेंट बनाने की हर संभव कोशिश भी करते हैं। ये छात्र देश की प्रमुख कंपनियों में नौकरी कर या निजी प्रैक्टिस कर कॅरिअर को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। कामरान ने बताया कि वह गरीब और मेधावी बच्चों के बीच जाकर कॅरिअर काउंसलिंग प्रोग्राम आयोजित करते हैं। इसी मुहिम और उत्कृष्ट कार्य के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं। उन्हें विभिन्न संस्थाएं भी समय-समय पर सम्मानित करती हैं।