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स्वामी सानंद का धर्मनगरी से रहा गहरा नाता, किराए पर नाव लेकर मंदाकिनी में अकेले करते थे सफाई

Thu, 11 Oct 2018 08:01 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 11 Oct 2018 08:01 PM IST
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Swami sanand death Know about his life in chitrakoot
सन 2017 में धर्मनगरी आने पर समाजसेवी के साथ मौजूद स्वामी सानंद - फोटो : अमर उजाला

चित्रकूट: गंगा प्रदूषण को दूर करने के लिए कई दिनों से उत्तराखंड में अनशन कर रहे स्वामी सानंद के निधन की खबर सुनते ही धर्मनगरी में शोक की लहर दौड़ गई। स्वामी सानंद ने बीस साल से ज्यादा समय तक धर्मनगरी में रहकर समाज सेवा की। साथ ही महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विभाग में डीन रहकर छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा दी।  

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 हरिद्वार के पास स्थित मुजफ्फरनगर निवासी जीडी अग्रवाल कानपुर शहर में आईआईटी कानपुर सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण विभाग में रहे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में प्रथम सचिव व राष्ट्रीय नदी संरक्षण नियंत्रण बोर्ड में निदेशालय के सलाहकार रह चुके थे। रिटायरमेंट के बाद 1990 में वह धर्मनगरी चित्रकूट आ गए, यहां उन्होने महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पर्यावरण विभाग में डीन पद पर रहकर छात्र-छात्राओं को पढ़ाने का कार्य किया।

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अपने हाथों से अकेले मंदाकिनी नदी करते थे साफ 

वो प्रमोदवन परिसर में कुटी बनाकर रहते थे। उन्होंने आगे चलकर इसको दान में दे दिया। उनके निधन पर समाज सेवी अरुण गुप्ता, अभिमंयू सिंह, बुंदेलीसेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह, धर्मनगरी महंत दिव्य जीवनदास, महंत रामप्यारे दास, कामदगिरी प्रमुख द्वार के प्रमुख पुजारी संत मदनदास, सनकादिक महाराज, योगेश जैन आदि ने दुख जताया। 

अपने हाथों से अकेले मंदाकिनी नदी करते थे साफ 
मंदाकिनी नदी मेें फैले प्रदूषण को अपने हाथों से अकेले ही साफ किया करते थे। जिनकी प्रेरणा से कई समाजसेवियों ने संगठन बनाकर नदी की सफाई के लिए संघर्ष करते रहे। 

अग्रवाल समाज में भी शोक
चित्रकूट शहर में महराजा अग्रसेन की जयंती मना रहे अग्रवाल समाज के  लोगों को जब स्वामी सानंद के निधन की जानकारी हुई तो सेठ रामनाथ रामकिशन धर्मशाला में ही कार्यक्रम को रोककर दो मिनट का मौन रखा गया। सभी ने उनकी कर्मठता की प्रशंसा कर श्रंद्धाजलि दी।

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