{"_id":"687807c0c2bf7e70080850a1","slug":"students-who-were-deprived-of-the-pre-phd-course-work-exam-will-get-another-chance-kanpur-news-c-12-1-knp1051-1189671-2025-07-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kanpur News: प्री पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा से वंचित छात्रों को मिलेगा फिर मौका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kanpur News: प्री पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा से वंचित छात्रों को मिलेगा फिर मौका
विज्ञापन
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में प्री पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा देने से वंचित छात्रों को एक बार फिर मौका मिलेगा। विवि ने छूटे अभ्यर्थियों की रेमेडियल क्लासेज लगाकर उपस्थिति को पूरा कराने और परीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं। जल्द इन शोधार्थियों के लिए विशेष परीक्षा कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
सीएसजेएमयू में सत्र 2024-25 की प्री पीएचडी कोर्स वर्क की कक्षाओं के बाद 14 से 17 जुलाई के बीच परीक्षा कराई जा रही है। यूजीसी और विवि के नियमों के अनुसार पीएचडी कोर्स वर्क में सभी शोधार्थियों की न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
परीक्षा के पहले दिन 14 जुलाई को 75 फीसदी उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले 63 शोधार्थियों को इसमें सम्मिलित होने से रोक दिया गया। इसके लिए 12 जुलाई को इन शोधार्थियों को नोटिस भी जारी किया गया। विवि के इस कदम से नाराज शोधार्थियों ने हंगामा किया था।
विज्ञापन
तब कुलपति ने समिति बनाकर छात्रहित में फैसला लेने का आश्वासन दिया था। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि समिति ने रिपोर्ट में शोधार्थियों की रेमेडियल क्लास लगाकर उपस्थिति पूरी कराने और फिर परीक्षा कराने की संस्तुति की है।
विज्ञापन
सीएसजेएमयू में सत्र 2024-25 की प्री पीएचडी कोर्स वर्क की कक्षाओं के बाद 14 से 17 जुलाई के बीच परीक्षा कराई जा रही है। यूजीसी और विवि के नियमों के अनुसार पीएचडी कोर्स वर्क में सभी शोधार्थियों की न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
विज्ञापन
परीक्षा के पहले दिन 14 जुलाई को 75 फीसदी उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले 63 शोधार्थियों को इसमें सम्मिलित होने से रोक दिया गया। इसके लिए 12 जुलाई को इन शोधार्थियों को नोटिस भी जारी किया गया। विवि के इस कदम से नाराज शोधार्थियों ने हंगामा किया था।
विज्ञापन
तब कुलपति ने समिति बनाकर छात्रहित में फैसला लेने का आश्वासन दिया था। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि समिति ने रिपोर्ट में शोधार्थियों की रेमेडियल क्लास लगाकर उपस्थिति पूरी कराने और फिर परीक्षा कराने की संस्तुति की है।