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अचानक खूंखार क्यों हुए ये आवार कुत्ते, वजह जानकर चौंक जाएंगे

Thu, 30 Mar 2017 06:07 PM IST
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 30 Mar 2017 06:07 PM IST
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street dogs are dangerous in kanpur
डेमो पिक
गली, चौराहों पर गाड़ियों के पीछे भागने वाले आवारा कुत्ते अचानक खूंखार हो गए हैं। ये कुत्ते हर रोज किसी न किसी को अपना शिकार बना रहे हैं। इसकी वजह चौंकाने वाली है। 
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बूचड़खाने और मीट की दुकानें बंद होने से वहां आसपास रहने वाले आवारा कुत्तों ने इंसानों पर हमला करना शुरू कर दिया है। स्लॉटर हाउस से निकले वेस्ट मैटेरियल के न मिलने से उनकी मानसिक स्थिति में भी परिवर्तन हो रहा है। अब वह जरा सी छेड़छाड़ में लोगों पर हमला कर रहे हैं। भूखे कुत्ते छोटे बच्चों को ज्यादा निशाना बना रहे हैं। खासकर मुस्लिम बहुल इलाकों के आवारा कुत्तों में यह स्थिति ज्यादा देखी जा रही है।
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कानपुर के मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों के चिकित्सकों के पास रोजाना दो से तीन कुत्ते के काटने के केस आ रहे हैं, जिन्हें एंटी रैबीज लगाए जा रहे हैं। इफ्तिखाराबाद के डॉ. इशरत सिद्दीकी, बेकनगंज के डॉ. वसीम रजवी, चमनगंज के मनामा अस्पताल में ऐसे मामले आ रहे हैं। बेकनगंज के यूसुफ मंसूरी ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में इस तरह के मामले बढ़े हैं। कुत्ते कटखने हो रहे हैं। गोश्त की दुकानों के आसपास उनको खाने पीने को मिल जाता था लेकिन अब दुकानें बंद होने से वह बच्चों को निशाना बना रहे हैं। हड़ताल की वजह से चिकन की दुकानें भी बहुत कम खुल रही हैं, इस कारण वहां का वेस्ट मैटेरियल भी कुत्तों को नहीं मिल रहा है।
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किदवई नगर में जानवरों के डॉक्टरों के विशेषज्ञ के मुताबिक क्षेत्रवार कुत्तों की जीवनशैली अलग अलग होती है। जहां मांस की दुकानें कम होती हैं, वहां रहने वाले आवारा कुत्तों को मीट न मिलने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। स्लॉटर हाउस और मीट की दुकानों के बंद होने से वहां आसपास पिछले करीब दस दिनों से उन्हें मीट नहीं मिल रहा है। ऐसे में उनमें बेचैनी बढ़ती है और जरा से छेड़छाड़ में वह हमला कर सकते हैं। हालांकि कुत्तों का स्वभाव अलग अलग है। बहुत से कुत्ते बेचैनी की स्थिति में किसी के घर के बाहर बैठकर पूंछ हिलाकर खाना मांगते हैं।
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