{"_id":"5c04ec95bdec22419b5de4a0","slug":"story-related-to-rajinikanth-movie-robot-2-0","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"ये हैं फिल्म 2.0 के रियल लाइफ 'पक्षीराजन', चारों कई सालों से दे रहे पक्षियों के संरक्षण का संदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये हैं फिल्म 2.0 के रियल लाइफ 'पक्षीराजन', चारों कई सालों से दे रहे पक्षियों के संरक्षण का संदेश
शिखा पाण्डेय, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 06 Dec 2018 07:26 AM IST
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सुर्खियों में छाई सुपरस्टार रजनीकांत और अक्षय कुमार की फिल्म '2.0' ने पक्षियों के संरक्षण का संदेश देते हुए एक बार फिर कानपुर के गौरव बाजपेई, मनीष पाण्डेय व अन्य पक्षी प्रेमियों के अभियान की याद दिला दी है। फिल्म में अक्षय कुमार पक्षीराजन का किरदार निभाते हुए नजर आए हैं। पक्षीराजन की तरह ही ये सभी प्रकृति प्रेमी कई सालों से पक्षियों को बचाने का अभियान चला रहे हैं।
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प्रदेश भर में चलाई 'पक्षियों को बचाअो' अभियान की अलख
गोविंद नगर निवासी गौरव बाजपेई ने पक्षियों के संरक्षण को लेकर प्रदेश भर में जागरूकता अभियान चलाया है। यह अभियान भोपाल, तमिलनाडू, दिल्ली, कन्नौज, इटावा, अौरैया, उन्नाव, लखनऊ, अमेठी आदि शहरों तक पहुंच चुका है। इस अभियान के तहत अब तक तमाम पक्षियों जैसे- गौरैया, ब्राह्मणी, मैना, पायी मैना, रॉबिन, फाख्ता, कबूतर, गिलहरियों आदि के संरक्षण के लिए पांच हजार से अधिक घरौंदे लगवाए जा चुके हैं।
कानपुर शहर की ही बात करें तो लगभग 4500 घोंसले लगवाए जा चुके हैं जिसका परिणाम आज यह है कि शहर के जिन क्षेत्रों में गौरैया लगभग लुप्त हो चुकी थी आज उनकी चहचाहट सुनाई देने लगी है। पिछले चार सालों में गौरैया की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
गौरैया संरक्षण की शुरूआत के लिए छोड़ दी थी नौकरी
इसे प्रकृति प्रेम कहें या पक्षियों से लगाव कि गौरैया संरक्षण अभियान को शुरू करने से पहले गौरव बाजपेई ने अपनी नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद शहरभर के स्कूलों में युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर गौरैया व अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया।
गोविंद नगर निवासी गौरव बाजपेई ने पक्षियों के संरक्षण को लेकर प्रदेश भर में जागरूकता अभियान चलाया है। यह अभियान भोपाल, तमिलनाडू, दिल्ली, कन्नौज, इटावा, अौरैया, उन्नाव, लखनऊ, अमेठी आदि शहरों तक पहुंच चुका है। इस अभियान के तहत अब तक तमाम पक्षियों जैसे- गौरैया, ब्राह्मणी, मैना, पायी मैना, रॉबिन, फाख्ता, कबूतर, गिलहरियों आदि के संरक्षण के लिए पांच हजार से अधिक घरौंदे लगवाए जा चुके हैं।
कानपुर शहर की ही बात करें तो लगभग 4500 घोंसले लगवाए जा चुके हैं जिसका परिणाम आज यह है कि शहर के जिन क्षेत्रों में गौरैया लगभग लुप्त हो चुकी थी आज उनकी चहचाहट सुनाई देने लगी है। पिछले चार सालों में गौरैया की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
गौरैया संरक्षण की शुरूआत के लिए छोड़ दी थी नौकरी
इसे प्रकृति प्रेम कहें या पक्षियों से लगाव कि गौरैया संरक्षण अभियान को शुरू करने से पहले गौरव बाजपेई ने अपनी नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद शहरभर के स्कूलों में युद्ध स्तर पर अभियान चलाकर गौरैया व अन्य पक्षियों के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया।
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अनोखा है इनका पक्षियों से प्रेम
गौ-गौरैया संरक्षण समिति के मनीष पाण्डेय का गौरैया व अन्य पक्षियों से प्रेम भी अनोखा है। मनीष वर्ष 2014 से लगातार लोगों को गौरैया संरक्षण के लिए जागरुक कर रहे हैं। यही नहीं शहर भर में अभियान चलाकर उन्होंने लगभग 500 दाना-पानी स्टैंड निशुल्क वितरित किए हैं। साथ ही लोगों को अभियान के माध्यम से संदेश दिया है कि पक्षियों के लिए सुरक्षित स्थान पर दाना-पानी की व्यवस्था करना भी हमारा दायित्व है।
गौ-गौरैया संरक्षण समिति के मनीष पाण्डेय का गौरैया व अन्य पक्षियों से प्रेम भी अनोखा है। मनीष वर्ष 2014 से लगातार लोगों को गौरैया संरक्षण के लिए जागरुक कर रहे हैं। यही नहीं शहर भर में अभियान चलाकर उन्होंने लगभग 500 दाना-पानी स्टैंड निशुल्क वितरित किए हैं। साथ ही लोगों को अभियान के माध्यम से संदेश दिया है कि पक्षियों के लिए सुरक्षित स्थान पर दाना-पानी की व्यवस्था करना भी हमारा दायित्व है।
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शहर भर में सुरक्षित स्थान देख लगाए घरौंदे
काकादेव निवासी शैलेंद्र दुबे ने गौरैया व अन्य छोटे पक्षियों के लिए शहर भर में सुरक्षित स्थानों पर 100 से ज्यादा घरौंदे लगाए हैं। साथ ही समय-समय पर पार्कों व अन्य भीड़ वाली जगहों पर अभियान चलाकर गौरैया संरक्षण के लिए लोगों को जागरुक करते हैं।
काकादेव निवासी शैलेंद्र दुबे ने गौरैया व अन्य छोटे पक्षियों के लिए शहर भर में सुरक्षित स्थानों पर 100 से ज्यादा घरौंदे लगाए हैं। साथ ही समय-समय पर पार्कों व अन्य भीड़ वाली जगहों पर अभियान चलाकर गौरैया संरक्षण के लिए लोगों को जागरुक करते हैं।
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चिड़ियों को दाना पानी डालना दिनचर्या में शामिल किया
पनकी क्षेत्र निवासी बाल कल्याण समिति सदस्य श्रद्धा कुलश्रेष्ठ बताती हैं कि उन्होंने अपने घर में गौरैया के लिए 6 घोंसले लगाए हैं। सभी में गौरैया का जोड़ा रहता है। साथ ही उन्हें सुबह-शाम दाना-पानी देना अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। रात में गौरैया को दाना-पानी देने के बाद ही पूरा घर खाना खाता है।
पनकी क्षेत्र निवासी बाल कल्याण समिति सदस्य श्रद्धा कुलश्रेष्ठ बताती हैं कि उन्होंने अपने घर में गौरैया के लिए 6 घोंसले लगाए हैं। सभी में गौरैया का जोड़ा रहता है। साथ ही उन्हें सुबह-शाम दाना-पानी देना अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है। रात में गौरैया को दाना-पानी देने के बाद ही पूरा घर खाना खाता है।