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कुत्तों पर काबू के लिए कैंची तैयार
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Thu, 05 Feb 2015 03:02 AM IST
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सड़कों पर घूमते, लोगों को दौड़ाते-काटते आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए शहर में पहली बार नगर निगम ‘ऑपरेशन नसबंदी’ चलाने जा रहा है। इसका जिम्मादुर्ग (छत्तीसगढ़) की कंपनी ‘एनीमल फाउंडेशन केयर’ को दिया गया है।
मार्च से कंपनी काम शुरू कर देगी। यह कंपनी यहां सामान्य अस्पतालों की तरह कुत्तों के लिए ऑपरेशन थिएटर, प्री-ऑपरेटिव रूम, पोस्ट ऑपरेशन रूम बनाएगी।
ऑपरेशन के बाद फीमेल और मेल कुत्तों को अलग-अलग रखने के लिए केयर सेंटर (कैनल) बनाए जाएंगे, जिनमें कुत्तों को निगरानी में रखने के बाद उसी स्थान पर छुड़वाया जाएगा, जहां से पकड़ा गया था।
दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि अभियान शुरू होना अच्छी बात है। दोपहिया से चलने वाले लाखों लोग आवारा कुत्तों से त्रस्त हैं लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि इस समस्या से मुक्ति मिल ही जाएगी क्योंकि दूसरे कई शहरों और देशों में ऐसे अभियानों का रिजल्ट अच्छा नहीं रहा है।
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शहर में करीब डेढ़ लाख आवारा कुत्ते हैं। दोपहिया वाहनों से चलने वालों के लिए यह भारी मुसीबत हैं। कब-कहां दौड़ा लें, पता नहीं। चार-चार पांच-पांच कुत्ते एक साथ झपट पड़ते हैं तो रोजाना लोग गिरकर घायल हो जाते हैं।
शहर में इनसे हादसे होना आम बात हैं। अब नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी की योजना बनाई है। शासन की सहमति के बाद इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए। दो कंपनियों ने टेंडर डाले।
इनमें से दुर्ग की कंपनी एनीमल फाउंडेशन केयर का चयन कर लिया गया है। इस कंपनी में वेटनरी डॉक्टर भी हैं। यह कंपनी चार साल से जबलपुर नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कर रही है।
वहां यह कंपनी प्रति कुत्ते (मेल या फीमेल) की नसबंदी के लिए 618 रुपये की दर से शुल्क लेती है। यहां भी यह कंपनी इसी दर पर नसबंदी करेगी। समझौते के तहत नगर निगम इस संस्था को चार-पांच कमरे देगा।
संस्था वहां अपने खर्च पर प्री-ऑपरेशन रूम, ऑपरेशन थिएटर (ओटी), पोस्ट ऑपरेटिव रूम और कैनल बनाएगी। नगर निगम की वैन रोटेशन में एक-एक कर सभी वार्डों में जाएगी।
इस वैन में एनीमल फाउंडेशन केयर के ट्रेंड कर्मचारी रहेंगे। यही कर्मचारी आवारा कुत्तों को पकड़कर सेंटर पर ले जाएंगे। नगर निगम के पशु चिकित्सा विभाग ने कुत्तों का नसबंदी सेंटर बनाने के लिए ग्वालटोली मैटरनिटी सेंटर में जगह चिन्हित कर ली है, पर नसबंदी करने वाली संस्था ने आबादी से थोड़ा दूर जगह मांगी है।
जिम्मेदार बोले
नगर में दुर्ग की कंपनी अगले महीने से आवारा कुत्तों की नसबंदी करेगी। वर्कआर्डर तैयार हो गया है। कंपनी के पदाधिकारियों के यहां आते ही नसबंदी केंद्र बनाने के लिए जगह आवंटित कर दी जाएगी, प्रत्येक डॉग के हिसाब से संस्था को 618 रुपये का भुगतान किया जाएगा। कानपुर में यह अभियान बहुत बड़ी उपलब्धि है।
-डॉ. एके सिंह, पशु चिकित्साधिकारी, नगर निगम
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मार्च से कंपनी काम शुरू कर देगी। यह कंपनी यहां सामान्य अस्पतालों की तरह कुत्तों के लिए ऑपरेशन थिएटर, प्री-ऑपरेटिव रूम, पोस्ट ऑपरेशन रूम बनाएगी।
ऑपरेशन के बाद फीमेल और मेल कुत्तों को अलग-अलग रखने के लिए केयर सेंटर (कैनल) बनाए जाएंगे, जिनमें कुत्तों को निगरानी में रखने के बाद उसी स्थान पर छुड़वाया जाएगा, जहां से पकड़ा गया था।
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दूसरी ओर जानकारों का कहना है कि अभियान शुरू होना अच्छी बात है। दोपहिया से चलने वाले लाखों लोग आवारा कुत्तों से त्रस्त हैं लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि इस समस्या से मुक्ति मिल ही जाएगी क्योंकि दूसरे कई शहरों और देशों में ऐसे अभियानों का रिजल्ट अच्छा नहीं रहा है।
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शहर में करीब डेढ़ लाख आवारा कुत्ते हैं। दोपहिया वाहनों से चलने वालों के लिए यह भारी मुसीबत हैं। कब-कहां दौड़ा लें, पता नहीं। चार-चार पांच-पांच कुत्ते एक साथ झपट पड़ते हैं तो रोजाना लोग गिरकर घायल हो जाते हैं।
शहर में इनसे हादसे होना आम बात हैं। अब नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी की योजना बनाई है। शासन की सहमति के बाद इसके लिए टेंडर आमंत्रित किए गए। दो कंपनियों ने टेंडर डाले।
इनमें से दुर्ग की कंपनी एनीमल फाउंडेशन केयर का चयन कर लिया गया है। इस कंपनी में वेटनरी डॉक्टर भी हैं। यह कंपनी चार साल से जबलपुर नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी कर रही है।
वहां यह कंपनी प्रति कुत्ते (मेल या फीमेल) की नसबंदी के लिए 618 रुपये की दर से शुल्क लेती है। यहां भी यह कंपनी इसी दर पर नसबंदी करेगी। समझौते के तहत नगर निगम इस संस्था को चार-पांच कमरे देगा।
संस्था वहां अपने खर्च पर प्री-ऑपरेशन रूम, ऑपरेशन थिएटर (ओटी), पोस्ट ऑपरेटिव रूम और कैनल बनाएगी। नगर निगम की वैन रोटेशन में एक-एक कर सभी वार्डों में जाएगी।
इस वैन में एनीमल फाउंडेशन केयर के ट्रेंड कर्मचारी रहेंगे। यही कर्मचारी आवारा कुत्तों को पकड़कर सेंटर पर ले जाएंगे। नगर निगम के पशु चिकित्सा विभाग ने कुत्तों का नसबंदी सेंटर बनाने के लिए ग्वालटोली मैटरनिटी सेंटर में जगह चिन्हित कर ली है, पर नसबंदी करने वाली संस्था ने आबादी से थोड़ा दूर जगह मांगी है।
जिम्मेदार बोले
नगर में दुर्ग की कंपनी अगले महीने से आवारा कुत्तों की नसबंदी करेगी। वर्कआर्डर तैयार हो गया है। कंपनी के पदाधिकारियों के यहां आते ही नसबंदी केंद्र बनाने के लिए जगह आवंटित कर दी जाएगी, प्रत्येक डॉग के हिसाब से संस्था को 618 रुपये का भुगतान किया जाएगा। कानपुर में यह अभियान बहुत बड़ी उपलब्धि है।
-डॉ. एके सिंह, पशु चिकित्साधिकारी, नगर निगम