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Kanpur: हैलट में पहली बार दमा रोगी को स्टेम सेल थेरेपी दी, सोहराब को 20 साल से है सांस की तकलीफ

Wed, 19 Oct 2022 11:03 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 19 Oct 2022 11:03 AM IST
सार

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के रिजनरेटिव मेडिसिन विभाग के विजिटिंग प्रोफेसर और स्टेम सेल थेरेपी विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने सोहराब खान को मंगलवार को थेरेपी दी।

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Stem cell therapy given to asthma patient for the first time in hallett hospital kanpur
दमा रोगी सोहराब खान को स्टेम सेल थेरेपी दी गई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के हैलट अस्पताल में पहली बार दमा रोगी को स्टेम सेल थेरेपी दी गई है। रावतपुर के रहने वाले सोहराब खान को 20 साल से सांस में तकलीफ रही है। अब इन्हेलर लेने के बाद भी उन्हें चलने में दिक्कत हो जाती रही है। इस पर उन्होंने हैलट ओपीडी में जांच कराई और उन्हें स्टेम सेल थेरेपी के चयनित कर लिया गया।

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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के रिजनरेटिव मेडिसिन विभाग के विजिटिंग प्रोफेसर और स्टेम सेल थेरेपी विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत ने उन्हें मंगलवार को थेरेपी दी। उनके साथ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला और जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की टीम रही। हैलट में यह पहला केस था। डॉ. राजपूत ने बताया कि स्टेम सेल थेरेपी से दमा रोगियों को फायदा मिलता है। उनके टिश्यू में सुधार आता है। अब तक वह मुंबई और दिल्ली में 20 दमा रोगियों को यह थेरेपी दे चुके हैं। डॉ. राजपूत ने बताया कि रोगी सोहराब खान को 20 साल से सांस में तकलीफ रही है।

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उन्होंने 15 साल से अधिक समय तक सिगरेट पी है। सांस में तकलीफ बढ़ने के बाद सिगरेट छोड़ी। उसके बाद से वे इन्हेलर से दवाएं ले रहे थे। रोगी ने डॉक्टरों को बताया कि बाद में इन्हेलर लेने के बावजूद थोड़ी दूर चलने पर उन्हें तकलीफ होने लगती थी। उन्होंने बताया कि तीन महीने के बाद थेरेपी की दूसरी डोज दी जाती है। अभी तक उन्होंने 20 रोगियों को यह थेरेपी दी है। इससे रोगियों की दवा कम हो गई। इसके साथ ही ऑक्सीजन लेने की जरूरत भी कम पड़ी। स्टेम सेल रोगी के शरीर से ही ली जाती हैं। उन्हें एक खास प्रक्रिया से गुजारने के बाद रोगी के शरीर में इन्हें डाल दिया जाता है।

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