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स्टेशनरी व्यापारी हत्याकांड: सट्टे के लिए रुपये मांगने पर डांटा, भतीजे ने सिर पर दे मारा था पत्थर, पढ़ें मामला

Fri, 05 Jul 2024 02:03 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 05 Jul 2024 02:03 PM IST
सार

Kanpur News: शिवा चाचा रामजी के स्टेशनरी कारोबार में हाथ बंटाता और उन्हीं के पास रहता था। पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी शिवा ने सबके सामने हुई बेइज्जती का बदला लेने के लिए रामजी की हत्या करने का प्लान मार्च में ही बना लिया था।

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Stationery merchant murder, scolded for asking for money for betting, nephew hit him on the head with a stone
स्टेशनरी व्यापारी हत्याकांड - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में बिल्हौर के घेमउ गांव में 30 जून की रात घर के बाहर सो रहे स्टेशनरी व्यापारी रामजी तिवारी की हत्या उन्हीं के भतीजे संस्कार उर्फ शिवा ने की थी। बिल्हौर पुलिस ने भतीजे को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया। पुलिस का दावा है कि सट्टा खेलने के लिए हत्यारोपी भतीजे ने चाचा रामजी से दस हजार रुपये मांगे थे।

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रामजी ने रुपये नहीं दिए, उल्टा उसे सबसे सामने जमकर डांट दिया। यही नहीं कुछ समय पहले परिवार की ही एक युवती से बात करने पर भी चाचा रामजी उसे सख्त हिदायत दी थी। इसी से नाराज होकर शिवा ने सरिया लगे पत्थर को चाचा रामजी के सिर पर दे मारा जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
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परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और दो दर्जन लोगों से लंबी पूछताछ व हाथ में लगी चोट के चलते पुलिस ने जब शिवा को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो वह टूट गया और घटना को कबूल कर लिया। शिवा की निशानदेही पर पुलिस ने गुरुवार तड़के घटनास्थल के पास नाली से हत्या में प्रयुक्त खून से सना पत्थर बरामद कर लिया।

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होली पर ठाना पर मौका नहीं मिल सका
शिवा चाचा रामजी के स्टेशनरी कारोबार में हाथ बंटाता और उन्हीं के पास रहता था। पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी शिवा ने सबके सामने हुई बेइज्जती का बदला लेने के लिए रामजी की हत्या करने का प्लान मार्च में ही बना लिया था। होली पर असफल रहने के बाद वह मौके की तलाश में लगा रहा। हालांकि कुछ समय बाद इरादा कमजोर पड़ गया।

घटना ने आग में घी का काम किया
लेकिन शिवराजपुर के एक गांव में रहने वाली परिवार की ही लड़की से बातचीत करने पर जब विवाद हुआ और रामजी ने सख्त लहजे में उसे युवती से बात करना बंद करने को कहा तो अपमान का घूंट पीकर रह रहे शिवा के लिए इस घटना ने आग में घी का काम किया और उसने जल्द से जल्द हत्या का मौका तलाशना शुरू कर दिया।

दोनों साथ-साथ खेलते थे सट्टा
किक्रेट व अन्य कई प्रकार की सट्टेबाजी में रामजी तिवारी और हत्यारोपी साथ-साथ दांव लगाते थे। ऑनलाइन सट्टेबाजी की वजह से ही पुलिस ने हत्या के बाद गांव व मोहल्ले के 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। यह सभी लोग लगातार मोबाइल से रामजी व शिवा के संपर्क में थे। लेकिन साक्ष्य न मिलने पर सभी को छोड़ दिया गया।

मां की हो चुकी है मौत, पिता ने की जान देने की कोशिश
शिवा की सगी मां की मौत हो चुकी है। वहीं, बेटे के हत्या के आरोप में पकड़े जाने की खबर मिलने पर पिता राजेश तिवारी ने चीखते चिल्लाते हुए खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। पंखे में फंदा लगाकर आत्महत्या का प्रयास करने लगे, लेकिन मौके पर मौजूद परिजन कमरे में दाखिल हो गए और उन्हें फंदे से लटकने से पहले ही रोक लिया।

हाथ में लगी चोट के निशान ने पुलिस को पहुंचाया शिवा तक
जांच में पता चला है कि हत्या वाली रात से पहले से ही सीसीटीवी कैमरे बंद थे। जांच के सभी पहलू किसी परिचित के ही हत्या करने की ओर इशारा कर रहे थे। साथ ही लंबी जांच के बाद जिन आठ लोगों के हाथ में पुलिस को बेंजाडीन टेस्ट में खून के निशान मिले, उनमें शिवा भी शामिल था।

पूछताछ की तो, वह टूट गया और अपराध कबूल लिया
सिर्फ उसके हाथ में ही चोट का निशान था। जांच में उसे दो बार डांटे जाने की बात पता चली, तो पुलिस का उसपर शक गहराया और हिरासत में लेकर पूछताछ की तो वह टूट गया और अपराध कबूल लिया। अब पुलिस बरामद पत्थर में लगे खून और उसके खून का भी मिलान करेगी ताकि उसे भी साक्ष्य के तौर पर कोर्ट में पेश किया जा सके।

हत्या के बाद सो गया था
पूछताछ में हत्यारोपी ने बताया कि रात करीब ढाई बजे उसने पत्थर उठाकर सिर पर दे मारा, जिससे रामजी की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद वह छत पर जाकर सो गया। हत्या से पहले उसने बड़े चाचा वकील गणेश तिवारी जिस घर में सो रहे थे, उसका भी दरवाजा बाहर से बंद कर दिया था ताकि किसी आवाज होने की स्थिति में घर से कोई बाहर न आ सके।

नाम था संस्कार, पर संस्कार से थी कोसो की दूरी
हत्यारोपी का नाम संस्कार तिवारी उर्फ शिवा था। पूछताछ में पता चला कि सगी मां की मौत के बाद जब पिता ने दूसरी शादी की और उसके प्रति व्यवहार बदला तो वह चाचा रामजी के घर ही रहने गया। चाचा ने उसे अपने बेटे की तरह अपने व्यापार में लगा लिया। एक घर में रहकर साथ ही खाना खिलाना और ख्याल रखा। लेकिन संस्कार नाम होने के बाद भी उसने हर वो काम किया जिसने उसके नाम और संस्कार में अंतर को दर्शाया। न सिर्फ वह सट्टेबाजी करता था, बल्कि परिवार की ही एक युवती से उसका संबंध भी था।

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