कोठारी ने स्टेट जीएसटी को लगाया 1111 करोड़ का चूना, विभाग ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दाखिल की अपील
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस तरह से शहर के 10 बड़े बकायेदारों में टॉप-5 में कोठारी की कंपनियां हैं। रकम वापसी की उम्मीद न दिखने पर विभाग ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में अपनी अपील दाखिल की है। स्टेट जीएसटी का यह सारा टैक्स कोठारी की तीन बड़ी कंपनियों मैसर्स रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स रोटोमैक एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड, मैसर्स कोठारी फूड एंड फ्रेग्नेंस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कर निर्धारण वर्ष 2014-15 व 2015-16 का है।
यानी बैंकों की किस्तें बंद करने के साथ ही कोठारी की कंपनियों ने करीब 550 करोड़ प्रति वर्ष की दर से दो वर्ष तक स्टेट जीएसटी में टैक्स भी जमा नहीं किया। लगातार दो वर्षों तक भारी भरकम राशि की वापसी न होने पर विभाग ने वर्ष 2018 में दो और वर्ष 2019 में चार आरसी जारी कीं।
कंपनी कर निर्धारण वर्ष बकाया रकम
मैसर्स रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड 2015-16 545,65,30,206
रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड 2014-15 431,34,49,365
रोटोमैक एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड 2014-15 66,86,11,031
कोठारी फूड-फ्रेग्नेंस प्राइवेट लिमिटेड 2014-15 43,00,00,000
रोटोमैक एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड 2015-16 15,36,77,636
कोठारी फूड-फ्रेग्नेंस प्राइवेट लिमिटेड 2015-16 8,60,08,650
कुल रकम 1110,82,76,888
कोठारी की कंपनियों से वसूली का अब हमारे पास कोई जरिया नहीं है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ही विकल्प बचता है। हम विभाग की ओर से उसमें पैरवी कर रहे हैं। कोठारी की संपत्तियों की नीलामी से मिली रकम में हम टैक्स वसूली की उम्मीद करते हैं।
पीके सिंह, अपर आयुक्त, राज्य वस्तु एवं सेवाकर, कानपुर जोन