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Hair Transplant Case: लंबी सर्जरी, ज्यादा खर्च की वजह से विशेषज्ञ नहीं कर रहे हेयर ट्रांसप्लांट
Tue, 20 May 2025 02:28 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 20 May 2025 02:28 PM IST
सार
Kanpur Hair Transplant Case: सर्जरी के चक्कर में विशेषज्ञ डॉक्टर बालों का बवाल नहीं ले रहे। नामी प्लास्टिक सर्जन, डर्मेटोलॉजिस्ट और विशेषज्ञ रुचि नहीं ले रहे। शहर के कई क्षेत्रों में अमानक हेयर ट्रांसप्लांट की क्लीनिक बन गईं।
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डॉ. रश्मि रस्तोगी, डॉ. ममता भूरा, डॉ. शिवाकांत मिश्रा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर में कई प्लास्टिक सर्जन, डर्मेटोलॉजिस्ट और नामी विशेषज्ञ छोटी सर्जरी के चक्कर में सिर पर बालों का बवाल नहीं ले रहे हैं। इसके पीछे वजह हेयर ट्रांसप्लांट की लंबी प्रक्रिया और इसके रखरखाव पर आने वाला लंबा बजट है। छह से सात घंटे के हेयर ट्रांसप्लांट की बजाय दो से तीन छाेटी सर्जरी कर क्लीनिक और नर्सिंगहोम का खर्च निकाल रहे हैं। इसका फायदा उठाकर सामान्य डॉक्टरों के साथ कई झोलाछाप की क्लीनिक भी खुल गई हैं।
हेयर ट्रांसप्लांट में छह से सात घंटे का समय लगता है। एक बार की प्रक्रिया में एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये लगते हैं। इसमें 80 से 90 फीसदी खर्च, ओटी, स्टाफ, सहयोगी डॉक्टरों पर ही चला जाता है, जबकि उतनी देर में उससे कम स्टाफ के साथ दो से तीन अन्य सर्जरी की जा सकती हैं। यही वजह है कि बड़े डॉक्टर हेयर ट्रांसप्लांट नहीं करना चाहते हैं, इसलिए बिना विशेषज्ञ वाले डॉक्टर और झोलाछाप अपनी दुकान चला रहे हैं। यह रोही के प्रति उतने गंभीर नहीं है। इसलिए कम खर्च में पूरी प्रक्रिया करने के लिए तैयार रहते हैं।
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. रश्मि रस्तोगी के मुताबिक ओटी के हर घंटे का खर्च पांच से छह हजार रुपये है। एक क्रिटिकल केयर का डॉक्टर रोगी की मॉनिटरिंग के लिए चाहिए, जबकि थोड़ी-थोड़ी देर में एनेस्थेटिक की आवश्यकता पड़ती है। उसे पूरे आठ घंटे देने पड़ते हैं। चार से पांच स्टाफ मौजूद रहता है। एलर्जी, बीपी की मॉनीटरिंग, खाने पीने, हेडवॉश, ड्रेसिंग के लिए डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की जरुरत पड़ती है।
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हेयर ट्रांसप्लांट में छह से सात घंटे का समय लगता है। एक बार की प्रक्रिया में एक लाख से लेकर पांच लाख रुपये लगते हैं। इसमें 80 से 90 फीसदी खर्च, ओटी, स्टाफ, सहयोगी डॉक्टरों पर ही चला जाता है, जबकि उतनी देर में उससे कम स्टाफ के साथ दो से तीन अन्य सर्जरी की जा सकती हैं। यही वजह है कि बड़े डॉक्टर हेयर ट्रांसप्लांट नहीं करना चाहते हैं, इसलिए बिना विशेषज्ञ वाले डॉक्टर और झोलाछाप अपनी दुकान चला रहे हैं। यह रोही के प्रति उतने गंभीर नहीं है। इसलिए कम खर्च में पूरी प्रक्रिया करने के लिए तैयार रहते हैं।
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डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. रश्मि रस्तोगी के मुताबिक ओटी के हर घंटे का खर्च पांच से छह हजार रुपये है। एक क्रिटिकल केयर का डॉक्टर रोगी की मॉनिटरिंग के लिए चाहिए, जबकि थोड़ी-थोड़ी देर में एनेस्थेटिक की आवश्यकता पड़ती है। उसे पूरे आठ घंटे देने पड़ते हैं। चार से पांच स्टाफ मौजूद रहता है। एलर्जी, बीपी की मॉनीटरिंग, खाने पीने, हेडवॉश, ड्रेसिंग के लिए डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की जरुरत पड़ती है।
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गेहूं की तरह रोपित किए जाते बाल
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. ममता भूरा ने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट में गेहूं की फसल की तरह खुद के बाल लेकर खाली जगह पर रोपित किए जाते हैं। एरिया जितना ज्यादा होता है। समय उतना ही ज्यादा लगता है। सर्जरी को करने में छह से सात घंटे तो लगते हैं, जबकि इतनी देर में अन्य सर्जरी दो से तीन की जा सकती है। जिन लोगों के सिर में बिल्कुल बाल नहीं होते हैं। उनमें हेयर ट्रांसप्लांट नहीं हो सकता है।
ये कर सकते हैं हेयर ट्रांसप्लांट
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कानपुर की अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी ने बताया कि एनएमसी की गाइडलाइन के अनुसार, प्लास्टिक सर्जन एमसीएच, डर्मेटोलॉजिस्ट पोस्ट ग्रेजुएट, एमडीएस मैग्जिलोफेशियल सर्जरी, जनरल सर्जन ( छह महीने का विशेष प्रशिक्षण), ईएनटी सर्जन ( छह महीने का विशेष प्रशिक्षण) हेयर ट्रांसप्लांट कर सकते हैं।
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. ममता भूरा ने बताया कि हेयर ट्रांसप्लांट में गेहूं की फसल की तरह खुद के बाल लेकर खाली जगह पर रोपित किए जाते हैं। एरिया जितना ज्यादा होता है। समय उतना ही ज्यादा लगता है। सर्जरी को करने में छह से सात घंटे तो लगते हैं, जबकि इतनी देर में अन्य सर्जरी दो से तीन की जा सकती है। जिन लोगों के सिर में बिल्कुल बाल नहीं होते हैं। उनमें हेयर ट्रांसप्लांट नहीं हो सकता है।
ये कर सकते हैं हेयर ट्रांसप्लांट
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कानपुर की अध्यक्ष डॉ. नंदिनी रस्तोगी ने बताया कि एनएमसी की गाइडलाइन के अनुसार, प्लास्टिक सर्जन एमसीएच, डर्मेटोलॉजिस्ट पोस्ट ग्रेजुएट, एमडीएस मैग्जिलोफेशियल सर्जरी, जनरल सर्जन ( छह महीने का विशेष प्रशिक्षण), ईएनटी सर्जन ( छह महीने का विशेष प्रशिक्षण) हेयर ट्रांसप्लांट कर सकते हैं।
छह महीने का विशेष प्रशिक्षण आवश्यक
एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष व नेशनल बोर्ड ऑफ इग्जामिनेशन ऑफ मेडिकल साइंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन के अनुसार हेयर ट्रांसप्लांट करने के लिए प्लास्टिक सर्जन एमसीएच, डर्मेटोलॉजिस्ट पोस्टग्रेजुएट, एमडीएस मैग्जिलोफेशियल सर्जरी के अलावा ईएनटी व जनरल सर्जन भी ट्रांसप्लांट कर सकते हैं, बशर्ते इसके लिए उनके पास अलग से छह महीने का प्रशिक्षण होना चाहिए। ये थेरेपी करने वाले लोकल एनेस्थीसिया, रिकवरी रूम हो और सीएमओ के यहां पंजीकरण भी आवश्यक है। इसमें समय अधिक लगता है। इस वजह से अधिकतर डॉक्टर इसे नहीं करते हैं। इसका फायदा कुछ टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स उठा रहे हैं और कई जगह ऐसे सेंटर खोल रहे हैं, जिसके दुष्प्रभाव हैं।
एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष व नेशनल बोर्ड ऑफ इग्जामिनेशन ऑफ मेडिकल साइंस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि नेशनल मेडिकल कमीशन के अनुसार हेयर ट्रांसप्लांट करने के लिए प्लास्टिक सर्जन एमसीएच, डर्मेटोलॉजिस्ट पोस्टग्रेजुएट, एमडीएस मैग्जिलोफेशियल सर्जरी के अलावा ईएनटी व जनरल सर्जन भी ट्रांसप्लांट कर सकते हैं, बशर्ते इसके लिए उनके पास अलग से छह महीने का प्रशिक्षण होना चाहिए। ये थेरेपी करने वाले लोकल एनेस्थीसिया, रिकवरी रूम हो और सीएमओ के यहां पंजीकरण भी आवश्यक है। इसमें समय अधिक लगता है। इस वजह से अधिकतर डॉक्टर इसे नहीं करते हैं। इसका फायदा कुछ टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स उठा रहे हैं और कई जगह ऐसे सेंटर खोल रहे हैं, जिसके दुष्प्रभाव हैं।
मैग्जिलोफेशियल सर्जन नहीं कर रहे हैं हेयर ट्रांसप्लांट
मैग्जिलोफेशियल सर्जन भी न के बराबर हेयर ट्रांसप्लांट कर रहे हैं। उनके सामने भी यही दिक्कत है कि वो जितना एक ट्रांसप्लांट में कमाएंगे उतनी देर में वे दूसरी अन्य सर्जरी कर सकेंगे। शहर में दांतों के डॉक्टरों की संख्या करीब 800 के आसपास है, जिनमें से 300 इंडियन डेंटल एसोसिएशन के सदस्य हैं। 50 से 70 एमडीएस मैग्जिलोफेशियल सर्जन हैं। इंडियन डेंटल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अवधेश तिवारी ने बताया कि एमडीएस मैग्जिलोफेशियल से करने के बाद एक साल की फेलोशिप इन हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी करते हैं। ये सर्जरी ओरल कैंसर, जबड़े के कैंसर, जीभ में कैंसर, गाल में कैंसर आदि से संबंधित रहती है। कैंसर सर्जरी दो से तीन घंटे चलती है। इसमें एक डॉक्टर के अलावा उनका असिस्टेंट, एनेस्थीसिया के डॉक्टर और दो से चार ओटी असिस्टेंट रहते हैं। खर्च पचास हजार से लेकर ढाई लाख तक आता है। सर्जरी में रोगी कम से कम सात दिन भर्ती रहता है। अस्पताल का खर्च पंद्रह हजार प्रतिदिन, एनेस्थीसिया के डॉक्टर तीन से पांच हजार प्रतिघंटा और 15 से लेकर 50 हजार सर्जन लेते। ऐसी दो से तीन सर्जरी एक दिन में डॉक्टर कर लेते हैं।
एमसीएच प्लास्टिक सर्जन शहर में न के बराबर ही हेयर ट्रांसप्लांट करते हैं। अधिकतर मुख कैंसर, कॉस्मेटिक सर्जरी, जन्मजात विकार के ऑपरेशन करते हैं। इसमें कैंसर सर्जरी सबसे ज्यादा होती है, जिसका खर्च तीन से चार लाख आता है। समय चार से पांच घंटे लगते हैं। एक दिन में डॉक्टर दो से तीन सर्जरी कर सकते हैं। डॉक्टर के साथ दस लोगों का स्टाफ, एनेस्थीसिया एक असिस्टेंट ओटी में रहते हैं। अस्पताल का खर्च हर रोज दस से पंद्रह हजार मरीज का आता है। डॉक्टर को 30 से 35 फीसदी हिस्सा मिलता है। कॉस्मेटिक सर्जरी ब्रेस्ट की सर्जरी कराने पर प्राइवेट अस्पताल में एक से डेढ़ लाख खर्च आता है, जिसमें डॉक्टर का इतना ही हिस्सा होता है। इसी तरह जनरल सर्जन गॉल ब्लैडर, हर्निया, बवासीर आदि की सर्जरी करते हैं, जो एक दिन में तीन से चार भी हो जाती हैं। गॉल ब्लैडर चालीस से पचास हजार रुपये में होती है। रोगी तीसरे दिन घर चला जाता है। 15 से 20 हजार रुपये अस्पताल लेता है, 10 से 15 हजार रुपये डॉक्टर को मिलते हैं। हर्निया की जटिल सर्जरी में दो से ढाई घंटे लगते हैं, जिसमें एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च आता है और 30 फीसदी डॉक्टर का शेयर होता है।
मैग्जिलोफेशियल सर्जन भी न के बराबर हेयर ट्रांसप्लांट कर रहे हैं। उनके सामने भी यही दिक्कत है कि वो जितना एक ट्रांसप्लांट में कमाएंगे उतनी देर में वे दूसरी अन्य सर्जरी कर सकेंगे। शहर में दांतों के डॉक्टरों की संख्या करीब 800 के आसपास है, जिनमें से 300 इंडियन डेंटल एसोसिएशन के सदस्य हैं। 50 से 70 एमडीएस मैग्जिलोफेशियल सर्जन हैं। इंडियन डेंटल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अवधेश तिवारी ने बताया कि एमडीएस मैग्जिलोफेशियल से करने के बाद एक साल की फेलोशिप इन हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी करते हैं। ये सर्जरी ओरल कैंसर, जबड़े के कैंसर, जीभ में कैंसर, गाल में कैंसर आदि से संबंधित रहती है। कैंसर सर्जरी दो से तीन घंटे चलती है। इसमें एक डॉक्टर के अलावा उनका असिस्टेंट, एनेस्थीसिया के डॉक्टर और दो से चार ओटी असिस्टेंट रहते हैं। खर्च पचास हजार से लेकर ढाई लाख तक आता है। सर्जरी में रोगी कम से कम सात दिन भर्ती रहता है। अस्पताल का खर्च पंद्रह हजार प्रतिदिन, एनेस्थीसिया के डॉक्टर तीन से पांच हजार प्रतिघंटा और 15 से लेकर 50 हजार सर्जन लेते। ऐसी दो से तीन सर्जरी एक दिन में डॉक्टर कर लेते हैं।
एमसीएच प्लास्टिक सर्जन शहर में न के बराबर ही हेयर ट्रांसप्लांट करते हैं। अधिकतर मुख कैंसर, कॉस्मेटिक सर्जरी, जन्मजात विकार के ऑपरेशन करते हैं। इसमें कैंसर सर्जरी सबसे ज्यादा होती है, जिसका खर्च तीन से चार लाख आता है। समय चार से पांच घंटे लगते हैं। एक दिन में डॉक्टर दो से तीन सर्जरी कर सकते हैं। डॉक्टर के साथ दस लोगों का स्टाफ, एनेस्थीसिया एक असिस्टेंट ओटी में रहते हैं। अस्पताल का खर्च हर रोज दस से पंद्रह हजार मरीज का आता है। डॉक्टर को 30 से 35 फीसदी हिस्सा मिलता है। कॉस्मेटिक सर्जरी ब्रेस्ट की सर्जरी कराने पर प्राइवेट अस्पताल में एक से डेढ़ लाख खर्च आता है, जिसमें डॉक्टर का इतना ही हिस्सा होता है। इसी तरह जनरल सर्जन गॉल ब्लैडर, हर्निया, बवासीर आदि की सर्जरी करते हैं, जो एक दिन में तीन से चार भी हो जाती हैं। गॉल ब्लैडर चालीस से पचास हजार रुपये में होती है। रोगी तीसरे दिन घर चला जाता है। 15 से 20 हजार रुपये अस्पताल लेता है, 10 से 15 हजार रुपये डॉक्टर को मिलते हैं। हर्निया की जटिल सर्जरी में दो से ढाई घंटे लगते हैं, जिसमें एक से डेढ़ लाख रुपये खर्च आता है और 30 फीसदी डॉक्टर का शेयर होता है।